धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
March 25, 2022
शीर्षक-कवि का ह्रदय है कवि का ह्रदय है खजाना विचारों का , कविता हैं उसकी कुंजी।हँसाते, रुलाते,कभी दिल को छू
March 25, 2022
हमेशा के लिए कुछ भी नहीं न यह जीत आखिरी हैऔर न यह हार आखिरी है,रोजाना का संघर्ष है जीवनचलेगा
March 25, 2022
पाखंड लगता है एक विजेता!अपने सारे संसाधनझोंक देता हैयुद्ध के मैदान मेंजीत के लिए,विजय उसका चरित्र हैलेकिनजब वो लगाता है
March 25, 2022
हालात बदलेंगे क्या? आज जब नारे बुलंद होंगेदुनिया भर मेंमहिलाओं की सुरक्षा के,बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगीहवस के
March 25, 2022
कोई रंग ऐसा बरस जाए इस बार होली में कोई रंग आसमां सेऐसा बरस जाए,कि बस इंसानियत के रंग में
March 25, 2022
इतिहास साहित्य में नजर आता है उन लोगों की बुद्धि को नमन!जो समझते हैंकि फिल्मकार इतिहास दिखाता हैजबकि ज्यादातर वोपैसा