Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

धरती कहे पुकार के (Only One Earth’ यानी केवल एक पृथ्वी)

 “धरती कहे पुकार के” (Only One Earth’ यानी केवल एक पृथ्वी) जल रहा है सीना माँ का बहती बयार सिसकती, …


 “धरती कहे पुकार के” (Only One Earth’ यानी केवल एक पृथ्वी)

सौम्य नज़रों से देखो

जल रहा है सीना माँ का बहती बयार सिसकती, आसमान के आँचल से है अग्नि की बारिश होती शीत। लहर को साँसे तरसे पंछी की ज़ात पिघलती, ज़हरीले धुओं में जलते कायनात सुबकती, रुक जा मानव अब तो ठहर जा कितने अत्याचार करेगा कुदरत की रंगीनियों में कितना ज़हर भरेगा।

हम इंसानों ने आज तक प्रकृति को प्रदूषित करने का एक मौका नहीं गंवाया, मुफ़्त में मिल रहे हवा पानी ऑक्सीजन हरियाली की लेश मात्र हमें कद्र नहीं।

नदी , तालाब , समुद्र , हवा , पानी , जंगल , आकाश , मिट्टी , जीव , जंतु, वृक्ष सब में जीवन है और सबने हमें कुछ न कुछ दिया ही है, पर हमने बदले में प्रदूषण दिया है शोषण , दोहन किया है। कितने सारे जीव हमारे कारण विलुप्ति की कगार पर है। नदियों में गटर का और फैक्ट्रियों का गंदा जल बहाते है, वृक्षों को काट कर कांक्रीट के जंगल खड़े कर रहे है। समुद्र किनारे घूमने जाते है तो पानी की बोतलें और प्लास्टिक की थैलियां और रैपर दरिया में बहा देते है।

फ़र्क ये है कि खतरा अब इंसानों की ज़िंदगी पर मंडरा रहा है इसलिये दर्द और संवेदना प्रकट हो रही है। सोचिए आज जितना दर्द हमें हो रहा है उतना ही भले ये सारी चीजें निर्जीव लगे पर दर्द प्रकृति को भी होता है।

जंगल नष्ट किए जा रहे हैं, नदी और झरनों का रुख बदला जा रहा है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है। बढ़ते प्रदूषण और प्रकृति को होने वाले नुकसान को कम करने को लेकर जागरुकता अभियान चलाने के लिए पर्यावरण दिवस मनाया जाता है पर एक दिन की जागरुकता किस काम की।

कभी सोचा आधुनिकता की दौड़ में पर्यावरण को हम नुकसान पहुँचा रहे हैं। हम प्रकृति से दूर जा रहे हैं। अब झरना, नदी, झील और जंगल देखने के लिए हमें बहुत दूर जाना पड़ता है. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का खामियाजा हम समय-समय पर भुगत भी रहे हैं। कभी बाढ़ आ जाती है तो कभी बादल फटते हैं, कहीं धरती में पानी सूख रहा है तो कहीं की जमीन आग उगल रही है। ये सब हवामान बदलने की वजह से हो रहा है। पेडों के कटने से हवा इतनी दूषित हो गई है कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिलना और वाहनों का धुआँ है। वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं । जल में शहरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थ युक्त गंदा पानी बहाया जाता है । इससे जल के स्त्रोत जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है ।

बढ़ती आबादी के कारण निरंतर होनेवाला शोरगुल से ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है । घर के बरतनों की या अन्य चीज़ों की खट-खट, मशीनों की खट-खट और वाद्‌य-यंत्रों की आवाज़ें दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। वाहनों का शोर, उपकरणों की आवाज़ें और चारों दिशाओं से आनेवाली विभिन्न प्रकार की आवाजें ध्वनि प्रदूषण को जन्म दे रही हैं। महानगरों में तो हर तरह का प्रदूषण इंसानों को क्षति पहुंचाने वाला बन गया है।

प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर हैं । प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं । प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं । गंदा जल, जल में रहने वाले जीवों के लिए भी बहुत हानिकारक होता है। ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव उत्पन्न करता है, इससे बहरापन, चिंता, अशांति जैसी बीमारियां होती है।

घरों से निकलता दूषित पानी बहकर नदियों में जाता है। कारखानों के कूड़े-कचरे एवं अपशिष्ट पदार्थ भी नदियों में ही छोड़ा जाता है। जल प्रदूषण से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड, हैजा आदि खतरनाक बीमारियाँ होती है। अब हर जीवों को बीमारीयों से बचाना है तो

प्रदूषण को रोकना बहुत जरूरी है। पर्यावरणीय प्रदूषण आज की बहुत बड़ी समस्या है, इसे यदि वक़्त पर नहीं रोका गया तो हमारा नाश होने से कोई भी नहीं रोक सकता। पृथ्वी पर उपस्थित कोई भी प्राणी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सभी का जीवन हमारे कारण खतरे में पड़ा है। 

हम इंसान गलती पर गलती किए जा रहे है, स्वच्छ साँसें और निरोगी जीवन चाहिए तो अब प्रकृति को बचाने का बीड़ा जन जन को उठाना होगा। 

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

आओ परिस्थितियों से लड़कर इतिहास रचें

November 27, 2022

हिम्मत-ए-मर्दां मदद-ए-ख़ुदा आओ परिस्थितियों से लड़कर इतिहास रचें जो खुद में स्थिर होते हैं, हर परिस्थितियों से लड़ते हैं, वही

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा

November 27, 2022

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा डिग्रीयां तो पढ़ाई के खर्चे की रसीदें है – ज्ञान तो वही है जो किरदार

आओ अपनी काबिलियत का लोहा मनवाएं|let’s prove our ability

November 27, 2022

आओ अपनी काबिलियत का लोहा मनवाएं आओ अपने व्यक्तित्व को अपनी पहचान बनाकर इतिहास रचें व्यक्तित्व निर्माण एक सतत प्रक्रिया

लव जिहाद-आंखों पर पट्टीयां ना बांधों प्यार की बेटियों

November 26, 2022

आंखों पर पट्टीयां ना बांधों प्यार की बेटियों- लव जिहाद Love jihad जी हां , आज जब खुद से ही

तबस्सुम| Tabassum

November 25, 2022

तबस्सुम तबस्सुम| Tabassum  एक ऐसी कलाकारा जिसको भूल पाना मुश्किल होगा,हालाकि वह उतनी मशहूर नहीं थी। न ही बिग बैनर

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए)| Free Trade Agreement (FTA)

November 25, 2022

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए)| Free Trade Agreement (FTA) अर्थव्यवस्था को गति देने में मुक्त व्यापार समझौता मील का पत्थर साबित

PreviousNext

Leave a Comment