Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को …


 द्विधा में लोकतंत्र

 विरोध किसका संस्कृति का?

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी
क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को उठाया जाता हैं? जब विश्व के ११७ देशों ने जिसमें ४७ देश इस्लामिक देश हैं जिन्हे भी अपने धर्म पर मन और आस्था हैं ,उन्हों ने भी योग का स्वीकार किया हैं तो अपने देश में ये विरोध क्यों?योग स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं इसे साबित करने की जरूरत नहीं हैं।अपने ऋषि मुनियों की सालों की तपस्या और साधना के बाद जो तय किए गए आसनों से क्या क्या फायदे होते हैं और कौन कौन ये आसन कर किस शारीरिक समस्या के लिए किया जा सकता हैं, इन सारे मापदंडों के साथ जिस योग पद्धति का निर्माण हुआ हैं उसे धर्म से जोड़ कर क्यों बौना बनाया जा रहा हैं।

 सूर्य शक्ति का स्त्रोत्र हैं,जीवन दाता हैं जिसकी गेरहाजरी में एक पत्ता भी नही उग सकता,कोई जीवन पनप नहीं सकता उसकी आराधना धार्मिक कैसे? सूर्यनामस्कार कैसे धार्मिक हो गए,प्रार्थना ही बंदगी हैं तो भाषा का जुदा होना उस महत्व को कम कैसे कर सकता हैं जो उस प्रक्रिया के हार्द में हैं।क्या ये राजकीय रंग हैं,क्या ये धार्मिक रंग हैं? या कोई सोची समझी साजिश ? उनकी जो देश के सभी प्रस्तावों के विरोध करके दर्शाते रहते हैं।

केंद्र सरकार के आदेश ,जिसमे ७ जनवरी तक स्कूलों में  विद्यार्थियों को सूर्यनमस्कार करवाने पर एक बवाल सा खड़ा किया गया हैं।जिसमे सभी सोशल मीडिया ने संवाद  प्रतिसंवाद का आयोजन कर अपनी चैनलो का  टी. आर.पी. बढ़ाने के लिए ही सही इस मुद्दे पर चर्चा तो कर ही रहे हैं।जिसमे अभी अपनी अपनी धार्मिक और राजनैतिक रोटियां सेक लेते हैं और जो प्रश्न जिस पर चर्चा या संवाद हो रहा हैं वह तो वहीं का वहीं रह जाता हैं ।

एक जमाने में शत्रार्थ के लिए संवाद आयोजन होता था और आज शास्त्र हनन के लिए आयोजन होता हैं।अगर विद्यार्थी सूर्यनामस्कार करके स्वास्थ्य लाभ पता हैं तो कुछ धर्म के ठेकेदारों को क्यों तकलीफ हो रही हैं? ये बात समझ से परे हैं।कोई कहता हैं ये धार्मिक  हैं लेकिन संस्कार और संस्कृति कब से धर्म से जुड़ने लगे? प्रकृति का कोई धर्म या झंडा थोड़ा होता हैं।वह तो प्रकाश,जल, फल सब कुछ ही बिना धर्म की पहचान पूछे ही दे देती हैं। हैं मांगा कभी प्राकृतिक संपदाओं ने किसी से धार्मिक पहचान पत्र? देश की संस्कृति ही देश की पहचान होती हैं जिसे नष्ट कर क्यों खोनी हैं अपनी ही पहचान, ये भी समझने वाली  बात हैं।किसी को धार्मिक अतिक्रमण लग रहा हैं तो किसी को बच्चों पर थोपा जाने का भ्रम हैं।कल को तो कहेंगे कि अभ्यास की भी क्या जरूरत हैं? क्यों थोपा जाएं बच्चों पर एक बोझ जिसे अभ्यास कहतें हैं।

 कोई तो सूर्यासन को संविधान का उल्लघंन कहते हैं,मुझे जितना पता हैं, उसमे कही नहीं लिखा हैं कि सूर्यासन नहीं करवाना चाहिए इस धर्म निरपेक्ष देश में।और इसी धर्म निरपेक्ष देश में धर्म के नाम से राजनैतिक दल भी बनते हैं और दूसरे धर्म के विरुद्ध उलजलूल अक्षेप भी किए जाते हैं तो कहां हैं धर्मनिरपेक्षता 

 इस देश में जहां हरेक बात को धर्म से जोड़ा जाता हैं,लोकतंत्र के विरुद्ध जोड़ा जाता हैं।देश में और भी कई धर्म हैं क्यों कोई किसी बात का विरोध नहीं कर रहे हैं क्यों एक धर्म विशेष को ही हरेक प्रश्न उठा ने की आदत सी पड़ गई हैं।देश का विभाजन करके भी अपनी तृष्णाओं को संतृप्त नहीं करने वालों की मंशा पर प्रश्न उठना स्वाभाविक हो जाता हैं।क्या ये स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं तो और क्या हैं?आज विश्व में प्रचलित योग,सूर्यनामस्कार का अपने ही देश में होता विरोध बहुत ही आहत करने वाला हैं।

इस मामले में सीधा प्रहार देश के नेतृत्व पर जाता हैं,कहा जाता हैं कि अगर देश के नेतृत्व को किडनी या ह्रदय रोग होता हैं तो पूरा देश उन रोगों की दवाई थोड़ा खायेगा?मतलब उनको योग पर आस्था हैं तो देश क्यों उस पर विश्वास करें? देखो ये कितना मूर्खतापूर्ण आक्षेप हैं या कहो कि दलील है ये। इस अपराधिक विषारोपण के लिए किसे जिम्मेवार कहा जायेगा? राजनैतिक दलों को? धार्मिक  नेतृत्व को? या हमारी सहनशीलता को?इस प्रश्न के बारे में सभी लोगों के लिए सूचना अतिआवश्यक बनता हैं।

  अब तेलंगाना के चुनावी प्रचार में क्या क्या वादे हो रहे सोचो जरा!मुस्लिम समुदाय के लिए खास हस्पताल बनवाएं जायेंगे जिसमे उनकी ही स्वस्थ जांच और सारवार को प्राथमिकता दी जाएगी ,बाद में क्रिश्चंस और बाद में दूसरे अल्पसंख्योको मौका दिया जायेगा,कहां हैं धर्म निरपेक्षता?यही लोग सब में फुट डालकर अपना मत जुटाने का उल्लू सीधा कर रहे हैं।क्यों देशवासियों को ये समझ में नहीं आता? इतने सालों में अल्पसंख्यकों का क्या  और  कितना विकास हुआ उसका लेखा जोखा लगाने का समय आ गया हैं।दूसरे अल्पसंख्यकों का विकास आराम से हो रहा हैं तो सबसे बड़े अल्पसंख्यकों का विकास क्यों अवरोधित हो रहा हैं।क्या वह छोटे छोटे प्रभोलनों का शिकार हो रहा हैं या बंदर बांट का शिकार हो रहा हैं? अब जागने का समय आ गया हैं हरेक जाति  और धर्म के अनुयायी ,देशप्रेमियों के लिए कि अपने छोटे छोटे लाभ को प्राप्त करने के उद्देश के लिए देश का नुकसान न हो जाएं।देश को उन्नत बनाएंगे तभी हमारी भी उन्नति हो पाएगी।अगर देश पर संकट आये तब हम कहां से सुरक्षित रह पाएंगे?  विदेशी ताकतों द्वारा देश को बरबाद करने के इरादों से  मिलती सहाय के कोई मायने नहीं हैं,तुम तब तक ही सुरक्षित हो जब तक देश सुरक्षित हैं।अगर आपको सहाय देने वाले विदेशियों ने हमला किया भी तो उसमें आपके लिए भी एक गोली,l–बम होगा ही।कोई गोली या बम पर किसका भी नाम नहीं लिखा होता हैं, वह विनाशक हैं और विनाश ही करेगा

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

कविता -बुजुर्ग

August 21, 2022

बुजुर्ग घर का मानबुजुर्गों का सम्मानजीवन ज्ञान।। दादा की यादउनका आशीर्वादहम आबाद।। दादी सुकूनघर की शान रहीदुर्भाव नहीं।। है मात-पिताहमारे

हम फरिश्ते से हो जाएं!

August 21, 2022

हम फरिश्ते से हो जाएं! फरिश्तों की तलाश क्यों आसमान में,फरिश्ते तो है इसी जहान में,जो भी मानवता भलाई के

नाम के सितारे

August 19, 2022

नाम के सितारे कुछ अरसे पहले कोई पान मसाले के विज्ञापन में तीन तीन सुपर स्टार के काम करने पर

चल पहल कर!

August 19, 2022

 चल पहल कर! किसी के भरोसे क्यों रहना, सब करें उसके बाद क्यों करना, भेड़ चाल क्यों जरूरी है चलना,

महत्वपूर्ण उत्सव, अमृत महोत्सव!

August 14, 2022

महत्वपूर्ण उत्सव, अमृत महोत्सव! सदियों की गुलामी के पश्चात,100 वर्ष के विद्रोह के बाद,हुआ हमारा देश आजाद,15 अगस्त 1947 को,हुई

ऐसा मेरा हिंदुस्तान हो!!

August 14, 2022

ऐसा मेरा हिंदुस्तान हो! सभी का सम्मान हो,हम देश की शान हो,देश के लिए हमारे प्राण हो,देश हमारी जान हो,ऐसा

PreviousNext

Leave a Comment