द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे, …
द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
May 15, 2022
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
May 14, 2022
माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर
May 14, 2022
विश्व परिवार दिवस 15 मई 2020 पर विशेष कविता प्रथम गुरु है माता पिता जिस परिवार में माता-पिता हंसते हैं
May 14, 2022
टूट रहे परिवार ! बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव ! रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !!
May 11, 2022
कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है
May 10, 2022
उम्मीद उदास रातों में उम्मीद की शमां जलाओ यारो सन्नाटे की दीवारों पर खुशियां सजाओ यारो फिर ये ख़ामोशी भी