द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे, …
द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
September 29, 2021
विचारधारा अनगिनत विचारों की धारा में, नित बहता जाता यह जीवन है। पल भी यह ना चैन पाता,विचारों में मग्न
September 25, 2021
खामोशियां बोलती हैं यह सच है कि तुम बोलते कुछ नहीं बस तुम्हारी खामोशियां बोल जाती हैं सामने आते हो
September 25, 2021
बलि की बकरी एक चालाक आदमी एक आजाद घूमती बकरी को उसकी पसंदीदा घास का लालच देकर अपने बाड़े में
September 25, 2021
बेटियाँ जग की लाडली जग की आधी आबादी कहलाती है बेटियाँ हर घर की रौनक है घरों को सजाती
September 25, 2021
हुंकार रसवंती के प्रणेता पैनी दृष्टि पहुँची पहले ऐसे थे रवि कालजयी रचनाएं धूमिल न होगी चमके चाँद सितारे मलिन
September 24, 2021
*माँ लौट आ वापस ……* आता है माँ का ख्याल, मन झकझोर जाता है, माँ लौट आ वापस, तेरा बेटा