द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे, …
द्वारिका में बस जाओ
वृंदावन में मत भटको राधा,
October 7, 2021
विषय-हिन्दी दिवस अभिव्यक्ति की पूर्णता जिस भाषा में होती….. हृदय के उद्गार जिस भाषा में उपजे….. भावनाओं की अभिव्यक्ति जिन
October 7, 2021
मैं क्या लिख दूँ.!!! प्रस्तुत कविता में हो रहा संवाद हमारे और हमारे बेटे के बीच का है…!! तूनें कहा
October 7, 2021
तुम कहो तो…!!! तुम कहो तो महकूँ मैं और चुन लूँ जिंदगी के चार पल या ख़ुशी से मौन जो
October 7, 2021
“मौसम” मौसम तो बदलते रहते हैं। जीवन में कयी पड़ाव आते रहते हैं। कभी खुशी-कभी गम । प्रकृति के बदलते
October 7, 2021
शीर्षक-बापू और लाल आज ही इस धर -धामपर दो विभूतियों ने ले अवतार दो अक्टूबर को कर सार्थक राष्ट्र
October 7, 2021
“मोम सी नारी” बाहर से सख्त अन्दर से नर्म है। भावनाओं में बह सर्वस्व लुटा देती। हाँ अधिकतर छल से