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Kalpana_bhadauriya, poem

दोहे-भाव माधुरी-कवियित्री कल्पना भदौरिया”स्वप्निल “

दोहे-भाव माधुरी मुंडमाल उर में धरे, उमानाथ भगवान | चंद्रमौलि का जाप है, नाथ वही गुणवान || वास करें निज …


दोहे-भाव माधुरी

दोहे-भाव माधुरी-कवियित्री कल्पना भदौरिया"स्वप्निल "
मुंडमाल उर में धरे, उमानाथ भगवान |

चंद्रमौलि का जाप है, नाथ वही गुणवान ||

वास करें निज धाम में, भजन करें कैलाश |
रमा भस्म अब अंग में, मिले दर्श विश्वास ||

नीलकंठ के नाम से, पूर्ण सकल सब काम |
भक्ति -भाव में जो रमे, भजे राम का नाम ||

चंद्रमौलि के प्रेम में, भंग लिये है आज |
मोह जाल सब त्याग के, कहे तुम्हें सरताज ||

ओम नमः के जाप से, पहुँच शिवम के धाम |
जपो मंत्र यह आज से, पूर्ण सकल सब काम ||

महादेव के ध्यान से, मिले श्रेष्ठ है धाम |
रोग मुक्त हो देह अब, अधर रहे शिव नाम ||

सर्प माल गल डाल के, कंठ रहे विष धार |
शिवाहोम के नाद में, बढ़े प्रेम विस्तार ||

प्रथम पूज्य है नाथ जो, आशुतोष के पूत |
रमे रहे जो भंग में, मले भस्म अभिभूत ||
___________________
कवियित्री
कल्पना भदौरिया”स्वप्निल “
लखनऊ
उत्तरप्रदेश


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