Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखे

 दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखे आंखें हिंदी चलचित्र था जो बचपन में देखा था जिसकी याद आज समाचारों …


 दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखे

आंखें हिंदी चलचित्र था जो बचपन में देखा था जिसकी याद आज समाचारों में अपने पड़ोसी देश की बातें सुन उस गाने की याद आ गई।उसकी ये पंक्ति तो एकदम योग्य लगती है’दे दे अल्ला के नाम पर दे दे इंटरनेशनल फकीर आएं है।दिराम नहीं तो डॉलर चलेगा कमीज नहीं तो कॉलर चलेगा’।सही पकड़ा है न गाना?
कुछ दिनों से जो सुन और देख रहे है उनके बारे में देख इंसानियत के नाते बहुत दुख होता है किंतु उनके नेताओं की हेकड़ी नीचे नहीं बैठ रही।
 वहां पर बदहाली की इंतहा है पहले तो महंगाई बढ़ने के समाचार चल रहे थे।दूध ,अंडा,सब्जियां आदि बहुत महंगा हो गया था।लोगों को महंगाई की मार ने मार डाला था।बेरोजगारी ने तो मार के रख दिया है आवाम को।बच्चे दूध और खाने को तरस रहे हैं।अब तो ये हाल हैं कि आटे के लिए जनता सड़क पर लेट मरने के लिए दुआ मांग रही हैं। आटे की ट्रकों के पीछे लोग दौड़ रहे हैं और वहां आटे के लिए मारामारी होती हैं।कुछ लोग तो आटा पा जाते है दूसरे उदास हो रोते है कि घर जा कर बगैर आटे के क्या मुंह दिखाएंगे।लेकिन जिस देश में अराजकता उस हद तक बढ़ी हुई हैं कि कानून के रक्षा करने के दावेदार वकीलों का चुनाव पूरा हुआ तो एक के बाद एक वकील दुनाली से,पिस्टल से और तीसरा तो ए के 47 से अपनी खुशी जाहिर करने के लिए गोलियां चलाई।लोगो को खाने को दाने नहीं और वकील लोगों के पास चलने की गोलियां है ये ताज्जुब की बात हैं।
 उपर से देश का मुखिया दुनिया से देश भूखमरी से बचाने के लिए मदद मांग ने निकल पड़े हैं।और वहां जा कर मदद के साथ में अपने देश के मुखिया के साथ बैठ समझौते की बात करनी है।उनके राष्ट्रपति से इल्तज़ा के जा रही है कि पड़ोसियों से बात करवा दे।अब बहुत हो चुके युद्ध हर युद्ध के बाद उनके देश और आवाम ने बहुत कुछ खोया हैं।एक हाथ में चाहे सफेद झंडा हो दूसरे हाथ में न्यूक्लियर बम रख बात करने तजवीज करने वाले उनके मुखिया की तो ’जय हो’।कहते है दोनों देश न्यूकलर कंट्री हैं और कुछ इधर उधर हुआ तो कोई क्या हुआ देखने वाला नहीं बचेगा।
उनके देश की बदहाली की टीवी पर उनके ही देश के प्रबुद्ध लोग चर्चा करने आते है तब बात सच्ची लगती है।
 दूसरी ओर बॉर्डर पर तालिबानों के हमले और उनके ही देश में आतंकवादियों का केहर।जिनको उन्होंने ही पाला है वही उनके सामने पड़ आतंकवाद फैला रहे हैं।इसे बदहाली में आटा गीला कहते हैं।हमारे देश में आतंक फैलाते फैलाते खुद ही उसका शिकार हो गया फिर भी सुधर ने का नाम नहीं ले रहा।अभी भी कश्मीर का मुद्दा नहीं छूट रहा।उनकी आवाम खुल्ले आम कह रहे है कि काश वे लोग भारत में होते।कोई भी योजना बगैर देश भगवान भरोसे चल रहा हैं।खुद तो प्रवास योजनाएं कर कहां से कर्ज मिलेगा उसी चिंता में हैं।
 खुल्ले आम वे अपना देश छोड़ भारत आने के लिए तैयार हैं।लेकिन अब बहुत देर हो गई हैं,जो पैसे अस्ला खरीदने और आतंकवाद फैलाने के लिए खर्च किया वह देश के विकास के लिए करते तो आज ये परिस्थित नहीं आनी थी। ’बोएं पेड़ बाबुल के आम कहां से होय’ एकदम सही कहावत है इनके लिए।

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

न लिंग भेद होता न नारीवाद पनपता

September 4, 2022

“न लिंग भेद होता न नारीवाद पनपता” Pic credit–Image by YuliiaKa “खुली रखो बेटियों के लिए भी एक छोटी सी

बेपरवाह

September 3, 2022

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बे परवाह।जिनको कछू न चाहिए, वे साहन के साह।। बेपरवाह साधारण बातों और संदेह से

बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की जरूरत।

September 3, 2022

बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की जरूरत। दुनिया में बोली जाने वाली प्रत्येक भाषा एक विशेष संस्कृति, माधुर्य, रंग

ज़िम्मेदार आख़िर कौन

September 3, 2022

“ज़िम्मेदार आख़िर कौन” pic credit -freepik यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:। अर्थात : जिस परिवार

पहले अपने अवगुणों का बाॅयकोट करो

September 2, 2022

“पहले अपने अवगुणों का बाॅयकोट करो” आजकल सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है “बाॅयकोट” यानी कि बहिष्कार का।

आईएनएस विक्रांत( INS-VIKRANT)

September 2, 2022

आईएनएस विक्रांत( INS-VIKRANT) मेक इन इंडिया – विमान वाहक युद्धपोत बनाने में भारत की आत्मनिर्भरता की क्षमता का प्रदर्शन भारत

Leave a Comment