Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

देश प्रेम- शैलेन्द्र श्रीवास्तव

देश प्रेम मुहल्ले की सड़क सीधे रेलवे स्टेशन तक जाती थी ।छोटा स्टेशन था जहाँ से उस समय केवल दो …


देश प्रेम

देश प्रेम- शैलेन्द्र श्रीवास्तव

मुहल्ले की सड़क सीधे रेलवे स्टेशन तक जाती थी ।छोटा स्टेशन था जहाँ से उस समय केवल दो ट्रेन अप डाऊन इलाहाबाद फैजाबाद के बीच चला करती थी ।
हर सुबह जब पहली गाडी फैजाबाद से इलाहाबाद के लिए हमारे शहर सुलतानपुर पर आने वाली होती तो मुहल्ले की सड़क पर खादी कुर्ता पहने ,हाथ मे चरखा वाला झण्डा लिए बाबा स्टेशन जाते दिखाई पड़ते थे ।उनके पांव मे चप्पल भी नहीं ह़ोती थी ।
प्लेटफार्म पर गाड़ी आते बाबा “भारत माता की जय ,जवाहर लाल नेहरू की जय ,महात्मा गांधी की जय ” का घोष करते हुये ट्रेन के.इंजन से गार्ड के डिब्बे तक आते जाते थे जबतक ट्रेन प्लेट फार्म से छट नहीं जाती थी ।
दो घंटे बाद जब फैजाबाद जाने वाली ट्रेन के आने का समय होता बाबा फिर स्टेशन की ओर जाते दिख जाते थे ।मुहल्ले का कोई बाबा को देख कर ,भारत माता की जय बोलता तो बाबा खुश होकर उसे दोहराते हुये आगे बढ जाते थे । .
बाबा नियमित रूप से स्टेशन पर देश.प्रेम के नारे लगाने जाते ,सर्दी हो गर्मी उनका नागा नहीं होता था ।
मुहल्ले के किसी व्यक्ति को कभी इलाहाबाद वाली गाड़ी पकड़नी होती तो बाबा को मुहल्ले. की सड़क से गुजरते ही उसे आभास हो जाता था कि गाड़ी आने वाली है ।
बाबा किस गांव के रहने वाले हैं ,यह जानने की कोशिश मुहल्ले किसी आदमी ने कभी नहीं की ।बस सब इतना ही जानते थे बाबा आजादी की लड़ाई मे शामिल रहे हैं ।
बताते हैं ,गांधी बाबा सन् ३१ मे इस शहर मे आये थे औऱ जगरामदास धर्म शाला मे सभा की थी ।
उनका भाषण सुनने के लिए वह भी अपने गांव से उस सभा मे शरीक रहा है ।
गांधी बाबा ने आम बोली मे गुलामी से मुक्त होने के लिए आन्दोलन मे जुड़ने का आह्वान किया ।उनकी बातों से प्रभावित होकर वह गांव से शहर आ गये ।
शहर मे दो तीन धर्म शाला थी जिसमें कोई भी मुफ्त रह सकता था ।बस बाबा ने भी एक धर्म शाला मे रहने लगे ।औऱ जन जागरण के लिए भारत माता की जयकारा करते शहर मे प्रभात फेरी लगाने लगे ।
धीरे धीरे शहर का हर आदमी बाबा को पहचानने लगा । उनकी लगन देखकर शहर के एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने उनको कांग्रेस दफ्तर मे एक कमरे मे रहने की जगह दे दी । वहीं रहकर बाहर से आने वाले आन्दोलन कारियों की आवभगत करने का काम भी करते औऱ हर सुबह जयकारा करते शहर की सड़कों पर फेरी रेलवे स्टेशन भी जाते थे ।
बाबा ४२के भारत छोड़ो आन्दोलन मे जेल भी गये ।जब शहर के अन्य आन्दोलन कारी जेल से छूटे तो वह भी बाहर आ गये ।
भारत को आजादी मिली तो कुछ बड़े नेता आजादी का स्वाद चखने मे लग गये । एम.पी.,एम.एल.ए.बने ,कुछ कांग्रेस की छोटी बड़ी संस्थाओ मे फिट हो गए ।जो अधिक कुल नहीं बन सका वह गांधी आश्रम मे नौकरी मे लग गये या नगर पालिका मे पार्षद हो गये ।
…पर बाबा कहीं नहीं फिट हो पाये ।पढे लिखे थे नहीं , सीधे सादे गंव ई आदमी किसी दौड़ मे शामिल नहीं हुये ।
वह आज भी कांग्रेस के दफ्तर मे रहते हैं ।हाँ, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने बाबा को कांग्रेस दफ्तर मे ही चपरासी की नौकरी दे दी जिससे उनकी मासिक आय ह़ोने लगी ।
अब उनका मुख्य काम दफ्तर की साफ सफाई करना औऱ सुबह स्टेशन जाकर भारत माता की जय बोलने के साथ जवाहर लाल नेहरू का भी जय बोलना हो गया ।
यह उन दिनों की बात है जब हमारा कस्बाई शहर से शहर मे तब्दील हो रहा था ।
. # शैलेन्द्र श्रीवास्तव
6A-53, वृंदावन कालोनी
लखनऊ -226029
मो.+917021249526


Related Posts

महिलाएँ: समाज की वास्तविक वास्तुकार

July 18, 2023

महिलाएँ: समाज की वास्तविक वास्तुकार हमारा समाज कहता है, पृथ्वी पर सबसे मूल्यवान वस्तु ‘स्त्रियाँ’ हैं। आइए इस धरती पर

दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

July 18, 2023

 दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

July 18, 2023

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ? राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक

संयुक्त राष्ट्र वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) अपडेट 2023 जारी

July 13, 2023

संयुक्त राष्ट्र वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) अपडेट 2023 जारी – भारत की बल्ले-बल्ले UN multidimensional poverty report 2023 संयुक्त

दुनियां की नजरें भारत पर – चंद्रयान-3 की 14 जुलाई 2023 को लांचिंग

July 12, 2023

दुनियां की नजरें भारत पर – चंद्रयान-3 की 14 जुलाई 2023 को लांचिंग भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेज़ी से

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति

July 12, 2023

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति यदि मैं आज किसी के पसंद अनुसार चलती, या सरल भाषा मे अगर ये

PreviousNext

Leave a Comment