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देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में?

बयानवीरों की जय हो! देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में? पक्ष-विपक्ष अपनी सुविधानुसार …


बयानवीरों की जय हो!

देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में?

पक्ष-विपक्ष अपनी सुविधानुसार बयान देने में माहिर – ऐ बाबू ये तो पब्लिक है, ये सब जानती है – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर हमें अनेकों देशों के पक्ष-विपक्ष के बयानों को मीडिया के माध्यम से सुनने को मिलता है जिसमें एक बयान कामन हो चला है कि, देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बातें सामने लाई जा रही है!यानें मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश और दूसरा संविधान खतरे में? इस प्रकार के बयान पक्ष विपक्ष द्वारा अपने वह पार्टी के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी सुविधाओं के अनुसार दिए जाते हैं तथा अगर बात आंग पर आई तो फट से पीछा छुड़ा लिया जाता है कि यह उसका निजी बयान है, पार्टी या सरकार या दूसरा हित से कोई लेना देना नहीं! शाबाश!! यह हुई ना बात, सांप भी मरे लाठी भी न टूटे, परंतु ए बाबू ये तो पब्लिक है, ये सब जानती है ये, तो पब्लिक है। हम पड़ोसी मुल्क ने भी जब दो दिन पहले पीओके जाकर यह मुद्दा उठाया तो वैश्विक मीडिया में आया घरेलू आर्थिक दुर्गति से ध्यान हटाने की कोशिश है, अभी भारत में भी कुछ दिनों से अलग अलग मुद्दों पर अलग अलग नेताओं के द्वारा बयान आया कि, देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
साथियों बात अगर हम भारत की करें तो कश्मीर में चल रहे अतिक्रमण रोधी अभियान, उद्योगपति का रिसर्च कंपनी की रिपोर्ट मामला, रामचरित्तमानस मामला, असम के बाल विवाह कानून के खिलाफ कार्यवाही, ज्ञानवापी मुद्दा सहित पिछले कुछ दिनों, महीनों और सालों के आरंभ मुद्दे उठाकर देखें तो हमें बयानवीरों का यह बयान जरूर मिलेगा कि मुद्दों से भटकाने की कोशिश! या संविधान खतरे में है? एजेंसियों का दुरुपयोग इत्यादि याने जो पक्ष सत्ताधारी है, तो विपक्ष बोलता है। यदि विपक्ष सत्ताधारी हो जाता है तो पक्ष था वह विपक्ष ने आकर यही बोलता है! यह हम पिछले दशकों से ही देखते आ रहे हैं। बल्कि आज भी जो पक्ष केंद्र में विपक्ष है और जो राज्य में विपक्ष है, उनके बयानवीरों की शैली हम देखेंगे के एकसी ही होगी, जहां जो विपक्ष में होगा यह शैली जरूर होगी। परंतु ऐ बाबू ये तो पब्लिक है, ये सब जानती है ये तो पब्लिक है।
साथियों बात अगर हम बुधवार 15 फ़रवरी 2023 को 370 हटाए गए राज्य सहित अनेकों राज्यों व मुद्दों की करें तो वहां अनेकों बयानवीरों के बयान इस तरह के हैं, हालांकि यह मीडिया में उठाए गए हैं और टीवी चैनलों पर भी इन्हें देखा जा सकता है, परंतु मेरा मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि व्यंग्य के रूप में सच्चाई जाहिर करना है। आइए हम बयान पढ़ते हैं। 370 हटाए गए राज्य की एक पार्टी की अध्यक्षा ने राज्य में चल रहे अतिक्रमण रोधी अभियान की आलोचना करते हुए बुधवार को सत्ताधारी पार्टी के नेतृत्व वाले केंद्रपर बेरोजगारी और उद्योगपति विवाद जैसे अहम मुद्दों से देश का ध्यान हटाने के लिए इस राज्य का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।उन्होंने यहांसंवाददाताओं से कहा, उद्योगपति मुद्दे और इससे देश की अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान से ध्यान हटाने के लिए उन्हें इस राज्य से बेहतर कुछ नहीं मिलता,जैसे अतिक्रमण रोधी अभियान। असम में बाल विवाह कानून के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई हो रही है। सीएम ने कुछ दिन पहले बाल विवाह पर सख्ती की बात कही थी और अब उसका असर दिखने लगा है।चार हज़ार से ज्यादा लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है और 2200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आगे भी धरपकड़ जारी है, लेकिन इसको लेकर सियासत भी जारी है।जहां एक तरफ एक पार्टी प्रमुख ने दुल्हे की गिरफ्तारी के बाद शादीशुदा महिलाओं की देखरेख को लेकर सवाल उठाया है तो वहीं एक विधायक ने इसे असल मुद्दों से भटकाने का प्रयास बताया है।दरअसल,एक पार्टी केविधायक ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिर्फ असम के सीएम द्वारा बजट की खामियों और उद्योगपति के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है। पार्टी बाल विवाह के खिलाफ है लेकिन सरकार जागरूकता फैलाने, साक्षरता दर बढ़ाने जैसे कदमों पर ध्यान नहीं दे रही है। बाल विवाह के नाम पर लोगों को जेल भेजना गलत है। असम सरकार ने अभी भी बाल विवाह रोकथाम अधिनियम को लागू करने के लिए नियम नहीं बनाए हैं। बिहार के मंत्री के रामचरितमानस को लेकर दिए गए अपमानजनक बयान पर सियासी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। राज्य के डिप्टी सीएम ने मंत्री के रामचरितमानस पर दिए गए अपमानजनक बयान पर कहा कि वे संविधान का पालन करते हैं। संविधान सभी को भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी देती है। उन्होंने कहा कि क्या यह कोई मुद्दा है, संविधान हमें बोलने की आजादी देता है। महंगाई और बेरोजगारी की बात कोई क्यों नहीं करता, केंद्रीय सत्ताधारी पार्टी असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वे जो चाहें कर सकते हैं, महागठबंधन नहीं टूटेगा। वही यूपी के एक नेता द्वारा भी रामचरितमानस पर उठाए गए सवालों पर इस तरह की बातें की जा रही है। प्रमुख विपक्षी पार्टी अध्यक्ष ने कल एक बयान में कहा कि पीएम की हमेशा मुद्दे को भटकाने की कोशिश रहती है ताकि लोगों को यह मालूम हो कि जो वो बोल रहे हैं वो सच है। हमने सदन में उनसे बहुत से प्रश्न पूछे थे कि उद्योगपति इतना बड़ा लखपति कैसे बना? और इतने घोटाले क्यों हो रहे हैं? हम जवाब चाहते हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख पार्टी के प्रमुख ने कथित तौर पर सत्ताधारी पार्टी और उसके सहयोगी ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे को उठा रहे हैं क्योंकि वे लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी एक पुरानी मस्जिद है और मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सत्ताधारी पार्टी के अदृश्य सहयोगी समय-समय पर सामने आते हैं और नफरत के बीज बोते हैं। एक नेता ने कहा जो लोग देश के प्रशासन को ठीक से नहीं संभालते हैं वे विभिन्न समुदायों के बीच एक खाई पैदा करने और स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमने इसे कई राज्यों में देखा है। बेरोजगारी, गरीबी और अन्य मुद्दे बढ़ रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार छोटे मुद्दों के पीछे पड़ी है, एक ऐसा बयान एक नेता ने भी दिया कि केरल एक ऐसी जगह है जहां सामुदायिक आधार पर कोई सीमा नहीं है और लोग भाईचारे और सौहार्द में विश्वास करते हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी नाटक में शामिल होकर देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा था कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में बदलाव निश्चित है।जब वे सत्ता से बाहर होते हैं, तो वे देश को बचाना चाहते हैं, और जब सत्ता में होते हैं, तो वे खुद को बचाना चाहते हैं। लोग इस तरह की सोच को समझ चुके हैं और इसलिए बदलाव निश्चित है। इस तरह के अनेकों बयान अनेकों बार आते रहते हैं और मुझे ऐसा लगता है, आगे भी आते ही रहेंगे।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बयानवीरों की जय हो,देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में? पक्ष-विपक्ष अपनी सुविधानुसार बयान देने में माहिर हैं पर, ए बाबू ये तो पब्लिक है ये सब जानती है, ये तो पब्लिक है।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

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