Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी

 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के किया सुशोभित देशऱत्न प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद मुस्कान भरी मुखमंडल परअंकुरित न हो सके …


 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी
किया सुशोभित देशऱत्न

प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद

मुस्कान भरी मुखमंडल पर
अंकुरित न हो सके ‘मद

वो सरल सादगी के मूरत
भारत माँ के प्यारे फूल

तिलक लगाए जमीं के धूल
सेवाभाव की महक खुब!

फिजाऔ में है फैल रही
सूरज चाँद सितारे हवाएँ

समर्पण की है गवाह बनी
स्वतंत्र भारत के ध्वज हाथ

लिये जन मन संग फहरायी
दिखा दिया सादगी की शान
दुनिया वालों कर ले पहचान

शोभा पा रही राष्ट्रीय चमन
देशरत्न तुझे शत-शत नमन।

अश्रुपूरित हुई भींगी नयन
प्रेरणास्पद रहेगी सदा जीवन।

         डॉ.इन्दु कुमारी
                मधेपुरा बिहार


Related Posts

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

April 27, 2022

 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी कभी तो मेरी याद

देखो हर शब्द में रब

April 27, 2022

 देखो हर शब्द में रब दिल को जीत लेते शब्द दिल को भेद भी देते शब्द दिल को बहलता मिठास

काट दिए मेरी कलम के पर

April 27, 2022

 काट दिए मेरी कलम के पर तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगीसौलह श्रंगार करके , मैं खुद

मोहब्बत ए परवाना

April 27, 2022

मोहब्बत ए परवाना कहते हैं वो मोहब्बत ए परवाने , इस अंजुमन में रखा क्या हैतेरे हुस्न दीदार के बिना

गम की बदली

April 25, 2022

 ‘गम की बदली’ मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने

कविता -मेरा जीवन सुखी था

April 25, 2022

 कविता -मेरा जीवन सुखी था  मेरा जीवन सुखी था  जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे  मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता

PreviousNext

Leave a Comment