Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

देशभक्त नहीं हो सकते हैं” – सचिन राणा “हीरो”

देशभक्त नहीं हो सकते हैं देश के सैनिक की शहादत पर, जो रो नहीं सकते हैं… वो कुछ भी हो …


देशभक्त नहीं हो सकते हैं

देशभक्त नहीं हो सकते हैं" - सचिन राणा "हीरो"
देश के सैनिक की शहादत पर, जो रो नहीं सकते हैं…

वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन, देशभक्त नहीं हो सकते हैं..
देश में रह कर भी जो, देश के वीरों का अपमान करे…
देश की माटी कैसे फिर, ऐसे लोगों को स्वीकार करे…

देश की पीड़ा पर हंसकर जो, अरे फब्तियां कसते हैं…
वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन, देशभक्त नहीं हो सकते हैं..
सेना से गर्वित देश हमारा, सैनिक सेना की शान है…
सैनिक को पूजे भारत सारा, सेना ही हिंदुस्तान है…

इस गर्वित अनुभूति को जो, हृदय में बो नहीं सकते हैं…
वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन, देशभक्त नहीं हो सकते हैं…
वीर शहीदों के बलिदानों से, हमने इस भारत को पाया है…
भारत माँ की संतानों ने, सदा महापुरूषों को शीष झुकाया है…

लेकिन देश की रोटी खाकर भी, जो देश के हो नहीं सकते हैं…
वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन, देशभक्त नहीं हो सकते हैं…
देश के सैनिक की शहादत पर, जो रो नहीं सकते हैं…
वो कुछ भी हो सकते हैं लेकिन, देशभक्त नहीं हो सकते हैं..

सचिन राणा “हीरो” (एंकर कवि व गीतकार)
हरिद्वार उत्तराखंड (मो 9759672053)


Related Posts

Bhut yad aate ho tum by vijay Lakshmi Pandey

July 23, 2021

 शीर्षक : बहुत याद आते हो “तुम”…!!! ऊँची -ऊँची इमारतें …! शहरों की चहल -पहल , महंगी गाड़ियों की रेलम-रेल

Barish kavita by abhijeet anand bihar

July 23, 2021

शीर्षक – “बारिश”  आज धरा की गुहार है रंग लाई, नीले नभ में घनघोर बदरी छाई, प्रकृति की छटा मनमोहक

Daya kavita by anup kumar verma

July 23, 2021

 शीर्षक – दया  दया धर्म और प्रेम का, रखे नित हम ध्यान।  दया हृदय में रखिए, करे नहीं अभिमान।। करे

Talash kavita by Kalpana kumari Patna

July 23, 2021

 स्वरचित कविता तलाश ——– जाने कैसी डोर बंधी है, चाहूं भी तो छोड़ सकूं ना, मेरे हृदय के तार हो

swarg kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

स्वर्ग सुकर्म को चुनो है अब,    मनःशान्ति सुख मिलता।       स्वर्ग सा आनंद धरा में मिलता,  

chhoti behna kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 छोटी बहिना एक डाली के फूल थे हम ,     कितने बसंत साथ जिये।         हर

Leave a Comment