Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satish_lakhotiya

देशभक्ति २१ वी सदी में-सतीश लाखोटिया

देशभक्ति २१ वी सदी में वतन पर क्या गाऊँ मैंदेशभक्ति के गीतहम माटी के पुतलेभूल गए उन शहीदो कीदेश पर …


देशभक्ति २१ वी सदी में

वतन पर क्या गाऊँ मैं
देशभक्ति के गीत
हम माटी के पुतले
भूल गए उन शहीदो की
देश पर मर मिटनेवाली प्रीत

याद करो उन मातृभूमि के दीवानों को
मर मिटने को रहते तैयार
भारत माँ की लाज बचाने को

अब न जाने
वह ललक कहाँ खो गई
शुर वीरो को जन्म देनेवाली माताएं
लुप्त ही हो गई

ज़ज्बा दिखता सिर्फ
वतन के लोगो में दिखावे के लिए
तिरंगा लेकर शोर – शराबा करने के लिए
मानो या न मानो, यह सच
गिनती के ही जाँबाज रह गए
सीमा पर लड़ने जाने के लिए

रक्षा अपने हिंद की
कर सकते दिल से हम भी
भ्रष्टाचारियों, व्याभिचारियों से
मुक्त कराने का संकल्प ले हम भी

देशभक्ति के कई रंग
आओ हर रंग में रंग जाए हम
तिरंगे के शान की खातिर
आओ अलख जगाए दिल में हम भी

लहर चले – लहर चले
हो हर दिल में यही अरमान
मेरा वतन – मेरा जतन
रोम रोम में बसा मेरे हिंदुस्तान

मैं अकेला ही नहीं
गाएंगे मिलकर देशभक्ति के गीत
स्वर से मिलेंगे स्वर
चलाएंगे एक ही अभियान
मेरा भारत महान
मेरा तिरंगा महान
यही मेरा धर्म
यही मेरा ईमान

सतीश लाखोटिया
नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

ये ना सोचो/ye na socho

November 5, 2022

ये ना सोचो कशमोकश मे उलझी मेरी जवानी हैलोग कहते वीणा कलम कि दीवानी है।। हालाते मंज़रों ने जज़्बात लिखना

कविता-मानगढ़ धाम की गौरव गाथा/mangarh dham ki Gaurav yatra

November 5, 2022

आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने

कविता-विकास के नाम से सुना था/vikas ke nam se soona tha

November 5, 2022

कविता-विकास के नाम से सुना था विकास के नाम से सुना था पर उसका भी दामन खाली हैकिसे सुनाऊं अपनी

कविता-हम जनता सबके मालिक हैं/hum janta sabke malik hai

November 5, 2022

कविता-हम जनता सबके मालिक हैं सरकार कानून सब साथ देंगे बस हमें कदम बढ़ाना हैहम जनता सबके मालिक हैं यह

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है/ muskan me mithas ki parchhai hai

November 1, 2022

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है मुस्कान में मिठास की परछाई है इस कला में अंधकारों में भी भरपूर खुशहाली

वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal

October 31, 2022

 वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल  वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी

PreviousNext

Leave a Comment