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poem, Prem Thakker

देर ना हो जाये आने में |der na ho jaye aane me – prem thakker

देर ना हो जाये आने में सुनो दिकु…… अब सांसे रुक रुक कर चलती हैयह आँखें हरपल तुम्हारी याद में …


देर ना हो जाये आने में

देर ना हो जाये आने में |der na ho jaye aane me - prem thakker

सुनो दिकु……

अब सांसे रुक रुक कर चलती है
यह आँखें हरपल तुम्हारी याद में बहती है

ना कोई स्वाद है अब खाने में
बहुत सी दरारे आ चुकी है
तुम बिन मेरे आशियाने में

खुद को तसल्ली देने के लिये
रोज़ वही रास्ते से चलता हूँ

में तुम से बात करने के लिये
खुद को ही वीडियो कॉल करता हूँ

मर चुके है सारे अंग मेरे
सब की बस एक ही पुकार है

कब आओगी मेरी ज़िंदगी
मुजे ज़िंदा करने के लिए सिर्फ तुम्हारा इंतज़ार है

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात
ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत


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