Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है-जितेंद्र कबीर

 दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है सोशल  मीडिया के दुनिया में आगमन के बाद  आ गई है हम सबके हाथ एक …


 दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है

दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है-जितेंद्र कबीर
सोशल  मीडिया के दुनिया में

आगमन के बाद 

आ गई है हम सबके हाथ

एक शक्ति…

– बड़ी से बड़ी हस्ती तक पहुंच बनाकर

उससे कुछ अच्छा सीख पाने की,

साथ ही उसकी उपलब्धियों पर सवाल उठाकर

उसकी प्रतिष्ठा धूमिल कर पाने की भी,

दुर्भाग्यवश दूसरा विकल्प पसंदीदा है

ज्यादातर लोगों का।

– कोई भी खबर या सूचना त्वरित गति से

जन-जन तक पहुंचाने की,

साथ ही किसी भी खबर या सूचना को 

तोड़-मरोड़ कर अपना हित साध जाने की भी,

दुर्भाग्यवश दूसरा विकल्प पसंदीदा है

ज्यादातर लोगों का।

– ज्ञान के सागर का मंथन करके सारी दुनिया

अपनी मुट्ठी में कर पाने की,

साथ ही फालतू के ऊल-जलूल कंटेंट देखकर

सारा समय व्यर्थ में गंवाने की भी,

दुर्भाग्यवश दूसरा विकल्प पसंदीदा है

ज्यादातर लोगों का।

– मानवता के भले की खातिर अच्छे विचार

सारी दुनिया तक पहुंचाने की,

साथ ही अतिवादी मानसिकता के शिकार होकर

सब जगह मजहबी खुमार फैलाने की भी,

दुर्भाग्यवश दूसरा विकल्प पसंदीदा है

ज्यादातर लोगों का।

    जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment