Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Veena_advani

दूधारू हो , परंतु गाय हो गाय

दूधारू हो , परंतु गाय हो गाय वर्तमान युग में बढ़ती हुई महंगाई को मद्देनजर रखते हुए इस लेख को …


दूधारू हो , परंतु गाय हो गाय

दूधारू हो , परंतु गाय हो गाय

वर्तमान युग में बढ़ती हुई महंगाई को मद्देनजर रखते हुए इस लेख को लिखना चाहा । वाकई यदि हम अपना पहले का समय देखें और आज के समय से हम मिलान करें तो, महंगाई 3 गुना स्तर बढ़ गई है । ऐसे में किसी भी परिवार का अपने परिवार के प्रति अकेले आर्थिक जिम्मेदारी निभाना बहुत ही कठिन हो गया है । यदि आज के समय में देखा जाए तो, एक व्यक्ति की कमाई से घर को चलाना बहुत ही मुश्किल हो गया है जिसके चलते बहुत सी महिलाएं जो कि घर में अपने पुरुषों (पति , भाई , पिता ) का साथ देते हुए स्वयं घर से बाहर जाकर कुछ न कुछ काम कर आर्थिक कमाई पाना चाहती हैं और पा भी रही है । ताकि पूर्णता रूप से ना सही, कुछ हद तक परिवार की मदद कर सके। परंतु एक समस्या जो सामने खड़ी हो रही है , वह यह कि औरतें घर से बाहर निकले कमाएं , घर की आर्थिक परिस्थितियों में साथ भी दे , वह घर का पूरा काम भी करें , अपनी हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाए , अपने संस्कारों में भी बंधी ही रहे , जैसे कि ज्यादा ना बोलना , बहस ना करना , पुरुष को पुरुष प्रधान ही समझते हुए सम्मान देना वगैरह-वगैरह । जिसके चलते कामकाजी महिलाओं के काम को लेकर घर में विवाद उठता रहता है । इसका कारण महिलाओं की थकावट , कार्यभार आदि जिसके चलते वो सक्षम होते हुए भी सक्षम नहीं हो पाती ।

 वह महिलाएं जो आपके घर को भी संभाले और बाहर भी जिम्मेदारी को बखूबी निभाए । आप क्या सोचते हैं पुरुष प्रधान , की सिर्फ काम पर आप जाते हैं और आपके सामने बहुत सारे संकट आते हैं । एक सवाल महिलाओं को भी क्याअपने कार्यस्थल पर संकटों का सामना नहीं करना पड़ता होगा ? उनके उच्च अधिकारी उन पर दबाव नहीं डालते होंगे ? क्या आप यह सोचते हैं ! कि महिलाएं सिर्फ कार्यस्थल पर इसलिए जाती हैं कि उनका मन बहला रहे या वह अपने घर के सदस्यों से निजात पाना चाहती है । यदि आपकी सोच में ना जाने क्या-क्या सोच शामिल हो जाती है , कामकाजी महिलाओं को लेकर , अपने ही परिवार की महिलाओं को लेकर । तो आप हर रूप से गलत समझते हैं जितना दबाव आपकी मन मस्तिष्क पर दैनिक क्रियाओं को लेकर होता है , उसी प्रकार महिलाओं के ऊपर भी उतना ही दबाव रहता है । आप तो सिर्फ पुरुष प्रधान होकर यह सोचते हैं कि हमें बाहर जाकर कमा कर लाना है कैसे भी खुद को खपा कर लाना है । महिलाओं पर भी तो गौर करें महिलाओं को यह दबाव रहता है कि , उन्हें तो बाहर भी सुनना है कमा कर लाना है और घर की भी समस्त जिम्मेदारियों को निर्वाहन करना है , अगर कभी कार्यस्थल पर महिलाओं को कुछ खरी-खोटी अपने उच्चाधिकारियों से सुननी पड़ती है तो वह तो उसकी भड़ास घर पर भी नहीं निकाल सकती है । आप पुरुष प्रधान तो घर पर आकर बच्चों पर या अपनी पत्नी पर खास करके अपनी पूरी भड़ास निकालते हैं , कहीं का ग़ुस्सा कहीं पर निकालते । कहां तक सही है आप लोग ही जवाब दीजिए महिलाओं को कभी-कभी कार्यस्थल से घर तक पहुंचने में समय लग जाता है मान लीजिए कभी ऑटो नहीं मिला या मान लीजिए कोई ट्रेन नहीं मिली या लोकल ट्रेन छूट गई उनकी और जिस कारण से वह घर पर देर से आई तो घर पर सब उसे ऐसी नजरों से देखते हैं कि जैसे उसने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया है । वह महिला घर आकर सबसे पहले अपना सामान कहीं भी रख कर लग जाती है अपने घर के काम में अपनी जिम्मेदारी को निभाने में और जिम्मेदारी निभाते निभाते उससे सौ सवाल परिवार के सदस्य पूछ लेते हैं उन्हें सुना देते हैं , क्या कसूर उस महिला का ? यानी आप लोग कामकाजी महिलाएं भी चाहते हैं जो की मलाई दूध देने वाली भी हो सरल शब्दो मे कहूं तो दूधारू हो साथ ही वह हर तरह से खामोशी इख्तियार करते हुए अपने संस्कारों में बंधी रहे याने आप लोगों को एक गाय चाहिए जो खूंटे से बंधी भी रहे और खूंटे से खुलकर समय-समय पर आर्थिक मदद भी करती रहे । 
आशा है जो भी पाठक इस लेख को पढ़ें हो सकता है उसकी मानसिकता पर कुछ असर हो । शब्द बोलते हैं , शब्द तलवार से वार करते हैं , शब्द घायल करते हैं यदि इसको पढ़कर कुछ इंसान ही इस बात को अमल में लाएं तो लिखना सार्थक हो जाता है । बहुत ही ऐसी महिलाओं को मैं जानती हूं जो इस दौर से गुजर रही है जो सिर्फ एक दुधारू गाय की तरह बनकर रह गई हैं जिसे सिर्फ परिवार रूपी ग्वालों के द्वारा दूधा जा रहा है । और जिसे खूंटे से बांध कर रखना भी चाहते हैं । आज कल जब विवाह के लिए कोई लड़का लड़की देखने जाता है तो वो नौकरी वाली ही लड़की को पहले महत्व देता है । क्यों कि वो ही तो दुधारू बन सालों साल तक मलाई , घी और भी बहुत से फायदे देती रहेंगी । हां पर उनसे गाय बनने की उम्मीद लगाना सरासर गलती होगी ।

About author

Veena advani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र

Related Posts

प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024

December 31, 2023

 नव वर्ष 2024-22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका  विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा-प्रभु श्री

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं

December 30, 2023

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं ऐसी तमाम महिलाएं हैं, जिनकी समय के साथ सेक्स

तापमान भले शून्य हो पर सहनशक्ति शून्य नहीं होनी चाहिए

December 30, 2023

तापमान भले शून्य हो पर सहनशक्ति शून्य नहीं होनी चाहिए  समाज में जो भी दंपति, परिवार, नौकरी और धंधा टिका

नया साल, नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य।

December 30, 2023

नया साल, नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य। नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है,

नागपुर की वीना आडवाणी “तन्वी” को 26 वे अन्तर्राष्ट्रीय जुनूँ अवार्ड से किया जायेगा सम्मानित

December 30, 2023

नागपुर की वीना आडवाणी “तन्वी” को 26 वे अन्तर्राष्ट्रीय जुनूँ अवार्ड से किया जायेगा सम्मानित महाराष्ट्र, नागपुर । विगत वर्षों

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ?

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ?

December 30, 2023

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ? अपनाएं यह तरीका तुरंत मिलेगा आराम। सर्दियों की ठंड अक्सर

Leave a Comment