Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

दुनियादारी

 दुनियादारी जितेन्द्र ‘कबीर’ बड़े खुश थे सभी चुप रहा करते थे जब तक, जरा सी जुबान जो खोली तो शिकवे …


 दुनियादारी

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

बड़े खुश थे सभी

चुप रहा करते थे जब तक,

जरा सी जुबान जो खोली

तो शिकवे हजार हो गये।

बड़ी तारीफें होती थी

जब करते थे सबके मन की,

कभी जो अपने लिए किया 

तो अफसाने हजार हो गये।

बड़ा पसंद था साथ सबको

खर्च करते थे जब खुलकर,

जरा सी मुट्ठी क्या बंद की

तो लोग दरकिनार हो गये।

बड़े चर्चे थे दरियादिली के

मदद जब करते थे सबकी,

एक बार जो हमने मांग लिया

तो बहाने हजार हो गये।

बड़ा याद करते थे सब

काम पड़ता था जब तक,

जरा सा बेकार क्या हुए

तो दर्शन भी दुश्वार हो गये।

बड़ा इतराते थे सभी

तारीफें जब तक निकलती रही,

आलोचना जो एकाध निकली

तो फासले हजार हो गये।

साथ निभाने के थे वादे

पक्ष में थे हालात जब तक,

वक्त जो खिलाफ हुआ जरा सा

तो गायब सरकार हो गये।

पूछी जाती थी हर पसंद

कभी कभी जो आते थे,

निवासी हुए जब से पक्के

तो पुराने अखबार हो गये।

अपने हाथों से सींचा था

जिन फूलों को बड़े प्यार से,

बड़े जरा से क्या हुए

तो कांटे बेशुमार हो गये।

स्नेह के धागों से

बंधे थे रिश्ते अब तक,

अक्लमंद जरा से क्या हुए

तो सब दुनियादार हो गये।

            जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश


Related Posts

गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं।।

October 22, 2023

गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं।। 1-निश्चय निश्चित निष्छल काल दौर स्वीकारता कर्तव्य परम्परा के दायरे में सिमटना

Kavita : Virasat | विरासत

October 19, 2023

विरासत युद्ध और जंग से गुजरतेइस दौर में – सड़कों पर चलतेएंटी माइनिंग टैंकों औरबख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच-

Kavita : ओ मेरी हिंदी

October 19, 2023

 ओ मेरी हिंदी मेरी हिंदी मुझे तुम्हारे अंतस् मेंमाँ का संस्कार झलकता हैक्योंकि तू मेरी माँअर्थात् मातृभाषा हैऔर मातृभाषा- मातृभूमि

Kavita on navratri

October 19, 2023

 नवरात्रि सुनो दिकु….. नौ दिन नवरात्रि केहमारे जीवन में आनंद लेकर आते हैज़िंदगी को जुमकर कैसे जिया जाता हैगरबा और

Kavita : चीन का हर माल ख़तरनाक

October 19, 2023

चीन का हर माल ख़तरनाक मैंने निजात पाया हैहर उस चीज़ पर शिवाय उसकेजो कमबख़्त चीन की डायनामाइट छछूंदर हैकितनी

शैलपुत्री

October 16, 2023

शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के, घर बेटी एक आई। दाएं हाथ में त्रिशूल,बाएं हाथ में कमल लाई। वृषभ है वाहन इसका,इसलिए

PreviousNext

Leave a Comment