Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Nandini_laheja, poem

दिल और धड़कन | Dil aur dhadkan

दिल और धड़कन धड़कन से है अस्तित्व दिल का,और दिल से ही है धड़कन।इक दूजे बिन अधूरे हैं दोनों,जैसे प्रियतमा …


दिल और धड़कन

दिल और धड़कन | Dil aur dhadkan

धड़कन से है अस्तित्व दिल का,
और दिल से ही है धड़कन।
इक दूजे बिन अधूरे हैं दोनों,
जैसे प्रियतमा और प्रियतम।
जब तक धड़कन चलती रहती,
दिल बेपरवाह रहता।
करता रहता मनमर्ज़ी ये,
ना किसी की सुनता।
कभी ख़ुशी में ,संभाले ना संभालता,
और दुःख में उदास ये होये।
धड़कन होती परेशान बहुत हैं ,
इसके हर भावों से।
कहती जब तक में संग तेरे,
जीवन को जी ले ख़ुशी से।
ना कर उदास चित को अपने
मैं भी होती हूँ मध्यम इससे।
पर मेरा वादा हैं ऐ दिल तुमसे,
मैं करुँगी हिफाजत तेरी।
बस न किसी आवेश में आना,
वर्ना बेकाबू होगी गति मेरी।
हम दोनों मेहमान है मानव तन में
इक दूजे के साथी।
पर जब बुलावा आता ईश्वर का,
में छोड़ तुम्हे चली जाती।

About author

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

Related Posts

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

छोड़ दो नफरत करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

छोड़ दो नफरत करना सिर्फ इसलिए कि कुछ बाघ नरभक्षी निकल जाते हैं,तो क्या दुनिया से उनका वजूदमिटा दिया जाना

मानव तन – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

 मानव तन अनमोल  यह तन पानी का बुलबुलामाया नगरी यह है संसारतारण हार प्रभु संग हैखोज लो बारम्बार बीता हुआ

Leave a Comment