Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Ankur_Singh, lekh

दिन में तीन बार मैं अपने फैसला नहीं बदलता

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के जन्मदिवस 17 अप्रैल के अवसर पर मैं अपने द्वारा लिखे एक लेख (दिन में तीन …


पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के जन्मदिवस 17 अप्रैल के अवसर पर मैं अपने द्वारा लिखे एक लेख (दिन में तीन बार मैं अपने फैसले नहीं बदलता) के माध्यम से वर्तमान सत्ता हेतु पल-पल बदलते राजनीतिक दल और प्रतिनिधियों को एक संदेश देना चाहता हूं , कृपया कर इस लेख को अपने समाचार पत्र में छापने का कष्ट करें,

दिन में तीन बार मैं अपने फैसला नहीं बदलता

दिन में तीन बार मैं अपने फैसला नहीं बदलता

जी हां बात कर रहा बाग़ी बलिया के लाल, अपने फैसलों और सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले जननायक पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी जिनका जन्म 17 अप्रैल 1927 को हुआ था। हां, उन्हीं जननायक चंद्रशेखर की बात हो रही है जो जो अपने क्रांतिकारी विचारों से कभी समझौता करने को राज़ी नहीं हुए, जिसने देश के इमरजेंसी दौरान इंदिरा जी के दो प्रस्तावों पहला सरकार के पक्ष में रहो और सरकार में मंत्री बन जाओ दूसरा या फिर सलाख़ों के पीछे जेल में रहो में, दूसरा प्रस्ताव जेल में रहना स्वीकार किया।
आयें मैं जिक्र करता हूं वो वाक्या जब अध्यक्ष जी (चंद्रशेखर) जी ने कहा कि जाकर राजीव से कह दीजिए कि चंद्रशेखर तीन बार दिन में अपने फैसले नहीं बदलता, घटना की शुरुआत होती है 1990 के आखिरी दौर में लालकृष्ण आडवाणी के रथयात्रा दौरान उनकी गिरफ़्तारी पर भारतीय जनता पार्टी ने बीपी सिंह के सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार अल्पमत मैं आ गई।
तत्कालीन परिस्थिति अनुसार देश पुनः आम चुनाव का खर्च उठाने को तैयार नहीं था और राजीव गांधी भी नहीं चाहते थे पुनः चुनाव हो क्योंकि राजीव कांग्रेस संगठन को दुरुस्त करने में लगे थे।
खैर बक़ौल चंद्रशेखर ग्यारह बजे रात को चंद्रशेखर जी के पास रमेश भंडारी का फ़ोन आया कि आप मेरे घर कॉफी पीने के लिए आइए, चंद्रशेखर जी को लगा बिना किसी तय कार्यक्रम के रात 11 बजे कॉफी का बुलावा, माजरा कुछ और ही है , खैर निश्चित समय पर अध्यक्ष जी पहुंचे वहां जाने पर देखा कि राजीव गांधी भी वही है और राजीव गांधी से भी सामान्य बातचीत हुई उस दिन सरकार बनाने का कोई जिक्र भी नहीं हुआ।
कुछ दिन बाद आर के धवन आए और अध्यक्ष जी से कहा कि आप से राजीव गांधी मिलना चाहते है राजीव के निमंत्रण पर चंद्रशेखर जी उनसे मिलने पहुंचे वहां राजीव ने अध्यक्ष जी से कहा कि क्या आप सरकार बनाना चाहेंगे?
इसपर चंद्रशेखर जी कहते है कि सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं है हमारे पास, राजीव ने फिर निमंत्रण दिया आप सरकार बनाए हम बाहर से आपको समर्थन देंगे, इसपर चंद्रशेखर जी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि कांग्रेस के लोग भी सरकार में शामिल हो यदि वरिष्ठ नेताओं को समस्या है तो नौजवान नेता ही सरकार में शामिल हो तो राजीव ने भरोसा दिलाया कि आप सरकार बना लीजिए कुछ माह में कांग्रेस के लोग भी सरकार में शामिल हो जाएंगे।
10 नवम्बर 1990 का वो दिन भी आया जब लोगों से घिरे रहने वाले चंद्रशेखर जी देश के प्रधानमंत्री बने, सच कहूं तो चंद्रशेखर को मिला प्रधानमंत्री का ताज कांटों से भरा ताज था क्योंकि जब जननायक ने शपथ ली उस समय देश आर्थिक समस्याओं (तीन हफ्ते का विदेशी मुद्रा थी उस समय देश के पास) के साथ सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे देश मंडल आयोग के दंगे से जल रहा था, नौजवान युवक आत्महत्या कर रहे थे और पूरे देश में 70-75 जगहों पर कर्फ्यू लगा, आसान नहीं था सरकार चलाना फिर भी इस विषम परिस्थितियों में चंद्रशेखर जी ने देश की बागडोर संभाला।
खैर देश की स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर आना शुरू हो रहीं थी, अयोध्या मंदिर मस्जिद के मामले पर युवा तुर्क ने तेजी दिखाते हुए दोनों पक्षों में आपसी समझौता का भरपूर प्रयास किया, संयोग से ये बात अध्यक्ष जी ने शरद पवार को बता दी और पवार साहब ने ये राजीव गांधी को बताने में कोई देरी नहीं थी, राजीव गांधी नहीं चाहते थे कि मंदिर मस्जिद समझौता का श्रेय चंद्रशेखर जी को जाए, इन्हीं बीच रचे राजनीतिक षड्यंत्र के बीच राजीव गांधी के घर के सामने हरियाणा पुलिस के दो सिपाही सादे कपड़ों में पकड़े गए। उसके बाद भारतीय राजनीति में भूचाल सा आ गया, और इस मामले पर जब कांग्रेस द्वारा जब इस मामले को उछाला गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने इस पूरे मामले की जांच कराने का प्रस्ताव रखा और कहा कि इसकी निगरानी स्वयं मैं करुंगा, लेकिन कांग्रेस मानने को तैयार नहीं हुई, कांग्रेस ने इस मामले पर सांसद राष्ट्रपति पर प्रधानमंत्री के धन्यवाद ज्ञापन को बायकट करने की चेतावनी दी।
चंद्रशेखर जी समझ गए कि ये कांग्रेस की मंशा क्या है और चंद्रशेखर जी का व्यक्तित्व सत्ता के लिए झुकने वालो जैसी नहीं थी, कांग्रेस अपना समर्थन वापस ले इसके पहले 6 मार्च 1991 को जननायक ने अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस को इस बात का ज़रा भी भनक नहीं थी कि अध्यक्ष जी सत्ता को ऐसे ठुकरा देने, क्योंकि राजीव गांधी जी भी नहीं चाहते थे कि मध्यावधि चुनाव हो क्योंकि राजीव भी कांग्रेस संगठन को चुस्त दुरुस्त करना चाहते थे । राजीव गांधी ने शरद पवार को बुला कर कहा कि क्या मैं चंद्रशेखर को इस्तीफा वापस लेने का ज़ोर दे, राजीव के कहने पर पवार चंद्रशेखर जी के पास गए और कहा राजीव गांधी चाहते है कि सरकार चले और आप इस्तीफा वापस ले लीजिए, इतना सुनते ही चंद्रशेखर जी ने शरद पवार की तरफ देखते हुए कहां की आप प्रधानमंत्री पद का मज़ाक ऐसे कैसे बना सकते है, क्या मैं राजीव की जासूसी करने को कहूंगा और हाँ, जाकर राजीव से कह देना कि चंद्रशेखर एक दिन में तीन बार अपने फैसले नहीं बदलता।
वहीं मैं आज की राजनीतिक देखता हूं यहां नेता हो चाहे कोई राजनीतिक दल सरकार में बने रहने के लिए किसी भी हद तक चले जाते है, अपने सिद्धांतों की श्रद्धांजलि तक दे देते हैं जो कि लोकतंत्र पर बहुत बड़ा आघात है।
सच कहूं चंद्रशेखर सिद्धांतों वाला नेता भारतीय भारतीय राजनीति में मिलना आसान नहीं लग रहा, चंद्रशेखर जी पर कहीं ये लाइन बड़ी सटीक है-

सियासत में सादगी का धरोहर हो जाना ।
आसान नहीं किसी को चंद्रशेखर हो जाना।

About author 

Ankur singh
अंकुर सिंह

हरदासीपुर, चंदवक
जौनपुर, उ. प्र. -222129.


Related Posts

क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है?

July 16, 2022

  क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है? प्रियंका ‘सौरभ’ (आखिर एक तनख्वाह से, कितनी

अग्निपथ योजना का विरोध बेरोजगारी संकट का सूचक है।

July 15, 2022

 अग्निपथ योजना का विरोध बेरोजगारी संकट का सूचक है। प्रियंका ‘सौरभ’ बेरोजगारी आज भारत में चिंताजनक चिंता का कारण बनता

“फ़िल्म को हीट बनाने के नया फार्मूला” /Film ko hit banane ke naya formula

July 15, 2022

 “फ़िल्म को हीट बनाने के नया फार्मूला” /Film ko hit banane ke naya formula  फ़िल्मों के साथ हमारा समाज गहराई

World Youth Skills Day 2022/विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई 2022/

July 14, 2022

विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई 2022 पर विशेष कौशलता विकास संकट मोचक बौद्धिक अस्त्र कौशलता विकास परिवर्तन के वाहक

शेरों के बहाने हंगामा, विपक्ष की दहशत का प्रतीक

July 14, 2022

 शेरों के बहाने हंगामा, विपक्ष की दहशत का प्रतीक/sheron ke bahane hangama, vipaksh ki dahshat ka prateek   प्रियंका ‘सौरभ’  (क्या

जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो

July 13, 2022

 “जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो” प्रतिवर्ष 10 जुलाई जनसंख्या नियंत्रण दिवस पर सबको याद आता है कि

Leave a Comment