Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

दिकु के झुमके

दिकु के झुमके सुनो दिकु….. अनोखे से झुमके तुम्हारेपल पल याद आते है आज भी उनकी झणकार कामेरे कानों में …


दिकु के झुमके

दिकु के झुमके
सुनो दिकु…..

अनोखे से झुमके तुम्हारे
पल पल याद आते है

आज भी उनकी झणकार का
मेरे कानों में एहसास कराते है

जब चूमना चाहता हूँ उन को स्वप्न में
ना जाने ये कहाँ भाग जाते है

कभी कभी तो बाज़ार में जब उनका रूप देखता हूँ
तब यह बदमाश मुजे बड़ा रुलाते है

मुजे चुप कराने के लिए ये
तुम्हारी हंसी को मेरे ख्यालों में ले आते है

अपनी अदाओं की चमक से
ये फिर से मुजे मनाते है

अनोखे से झुमके तुम्हारे
मुजे हरपल याद आते है

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment