Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

तुलसी आज| Tulsi-aaj

तुलसी आज क्यों में तुलसी तेरे आंगन की बनूंमेरी अपनी महत्ता मैं ही तो जानूं संग तेरे रहूंगी जीवन भर …


तुलसी आज

तुलसी आज| Tulsi-aaj

क्यों में तुलसी तेरे आंगन की बनूं
मेरी अपनी महत्ता मैं ही तो जानूं

संग तेरे रहूंगी जीवन भर के लिए
प्यार भरी संगिनी बन कर तेरे लिए

अपनों को बाहर नहीं रखा करतें है
उन्हे दिल में रख पास पास बैठते हैं

बैठ पास गुफ्तुगु कर कामना जानते है
इश्क की कदर कर प्यार पहचानते हैं

तुलसी बन आंगन में खड़ी तुम्हे निहारूं
आते जाते साजन की राह मैं जिहारूं

कहां का प्यार तुमने दिया प्रभु वृंदा को
जिसे स्वीकार कर के भी अस्वीकार की

मैं तो तेरे चरणों में भी रह लूंगी सदा
कही दूर आंगन मेरा अब स्थान कहां

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

Leave a Comment