Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
तुम बोलो न

Aalekh

तुम बोलो न-पत्र शैली कथा

तुम बोलो न तुम कम बोलते हो… बहुत कम। इतने दिनों में न जाने कितनी बार मैंने यह तुमसे सुना …


तुम बोलो न

तुम कम बोलते हो… बहुत कम। इतने दिनों में न जाने कितनी बार मैंने यह तुमसे सुना है। कभी तब, जब मैंने शिकायत की कि तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते रोज तो कभी जब तुम खुद मेरे स्नेह में सराबोर हो जाते हो तो कह देते हो, ” जितनी बातें तुमसे करता हूँ, मैंने किसी से कभी नहीं की… मैं कर ही नहीं पाता। “
यह सुनकर मैं सोच में पड़ जाती हूँ क्योंकि मुझे तुमसे बात करते हुए कभी ऐसा लगा ही नहीं कि तुम मितभाषी हो क्योंकि तुम उस समय मुझसे ज्यादा बोलते हो जबकि मैं बहुत बातूनी कही जाती हूँ।
कभी – कभी मैं तुम्हें टोक देती हूँ कि तुम मेरी बात नहीं सुनते, अपनी ही सुनाते रहते हो और तुम सकपका कर कहने लगते हो कि अरे ग़लती हो गई, तुम बोलो न… मगर मैं तब तक उन बातों को कहने का उत्साह खत्म कर चुकी होती हूँ इसलिए दोबारा नहीं बोलती।
लेकिन बाद में सोचती हूँ कि तुम सकपका क्यों जाते हो! बोलो न… वो तमाम बातें जो तुमने किसी से कहना चाह कर भी नहीं की… वे बातें जो फिजूल हों मगर मेरे सामने तुम कह डालो, बेझिझक। हक़ से प्यार से कहो क्योंकि मैं हूँ… मैं हूँ तुम्हारे साथ जो तुम्हें बिना जज किये सुनूँगी हाँ बेशक कुछ बातों पर लड़ लूँ मगर तब भी तुम्हारी बातों पर अपना हक़ नहीं छोड़ सकती अब।
सच कहूं तो खुद को बहुत खुशनसीब मानने लगी हूँ, तुम्हारी बातों का खजाना जो सिर्फ़ मेरे लिये खुलता है।
मासूमियत से भरी, समझदारी पगी सभी तरह की बातों का रस है जिनमें। दुनिया के लिये तुम कुछ और होंगे मगर मेरे आगे तुम अपने सम्पूर्ण स्वरूप में, जैसे हों वैसे ही रहते हो, यही सबसे बड़ी बात है हमारे इस रिश्ते में।
कहीं पढ़ा था कि प्रेम बनावट नहीं देता, निश्छलता देता है। जिस प्रेम में सहजता से सामने आने पर भय का भाव रहे वहाँ प्रेम पनप ही नहीं सकता।
जहाँ बोलने के लिये विषय की आवश्यकता नहीं होती केवल चाहत होती है बातों की ताकि एक दूसरे के नजदीक़ बने रहें, वहाँ ये बातें रिश्तों में करीब होने का एहसास भरती हैं।
हम लड़ते हैं क्योंकि हम एक दूसरे के आगे जैसे हैं, वैसे ही बने रहते हैं। हम बोल देते हैं मन की बातें जिनसे क्रोध या स्नेह का वातावरण भले ही बन जाए मगर दुराव – छिपाव नहीं होता।
तुम बोला करो… क्योंकि अब मैं जानती हूँ कि तुम मेरे लिये ही बोलते हों अपने स्वभाव के विपरीत जाकर क्योंकि तुम्हें मेरे आगे सहजता लगती है।
किसी से न बोलने वाला जब किसी एक से बात करने लगे तो उस पर प्रेम क्यों न बरसेगा… तुम बोलो ताकि मैं भी भीग सकूँ तुम्हारे शब्दों के सागर में और नृत्य कर सकूँ उन भावों के गायन पर जो तुम अक्सर ही गुनगुना देते हो।
तुम बात करो मुझसे क्योंकि मैं तुम्हें सुनते रहना चाहती हूँ समय की अवधि से परे और इस संसार की आपा धापी से दूर रहकर क्योंकि तुम मेरी दुनिया के इकलौते व्यक्ति हों जिसे बोलते देखना मुझे रूह तक प्रकाशित कर देता है।

मेघा राठी
भोपाल मध्य प्रदेश
मो. 8817071084 ( प्रकाशन हेतु नहीं )

संक्षिप्त साहित्यिक परिचय:सम्मान*- राष्ट्रिय कवी संगम द्वारा शब्द शक्ति सम्मान, शीर्षक साहित्य परिषद् द्वारा शब्द श्री सम्मान, प्रेरणा जिज्ञासा मंच द्वारा निर्णायक हेतु सम्मान, अनुगूंज साहित्यिक संस्था की प्रतियोगिताओं में दो बार निर्णायक हेतु सम्मान,माहेश्वरी समाज भोपाल की ओर से नारी रत्न सम्मान, नगर निगम नसरुल्लागंज (म.प्र.)द्वारा हिंदी साहित्य रत्न सम्मान, साहित्य के लिए सक्रिय योगदान हेतु शीर्षक स्तम्भ सम्मान, काव्यञ्चल समूह द्वारा गुरु द्रोण सम्मान( निर्णायक हेतु), साहित्य श्री सम्मान( तूलिका मंच द्वारा) , समता सम्मान(भारतीय समता समाज व विशेष दृष्टि फिल्म्स व टीवी प्रोडक्शन द्वारा) , वाणी साधिका सम्मान अन्य कई समूहों द्वारा सम्मानित, टीवी चैनल इंडिया न्यूज पर प्रस्तुतियां

पुस्तक– गुस्ताखियां (उपन्यास), उंगलियां ( उपन्यास ) पुष्पगंधा ( साँझा संकलन) बात इतनी सी( साँझा संकलन), सृजन शब्द से शक्ति तक( साँझा संकलन) , प्रतिबिम्ब लघुकथा संकलन सांझा) सोपान समूह द्वारा प्रकाशित साँझा संकलन, प्रगतिशील लेखक संघ एवम् नई कलम पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित काव्य रत्न , आस पास से गुजरते हुए ( साँझा लघुकथा संग्रह), लघुकथा कलश, पंजाबी पत्रिका गुसइयाँ में लघुकथा अस्तित्व का पंजाबी में अनुवाद, किस्सा कोताह, कॉफी हाउस,दैनिक भास्कर – मधुरिमा, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान,दैनिक जागरण,पंजाब केसरी, अमर उजाला, वनिता, जागरण सखी, नूतन कहानियां, गृहलक्ष्मी व दिल्ली प्रैस की पत्रिकाओं सहित विभिन्न ई मैग्जीन्स व पंजाब केसरी, अमर उजाला, जनसत्ता ,दैनिक जागरण , हरि भूमि, हिमाचल प्रदेश के साप्ताहिक समाचार पत्र गिरिराज सहित विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और बेव साइट्स पर लगातार प्रकाशित, मुट्ठी में जुगनू– लघुकथा संग्रह का संपादन

अन्य- सेठ एम आर जयपुरिया स्कूल की 40 से अधिक शाखाओं में आयोजित एकांकी प्रतियोगिता क्रिसेंडो में निर्णायक, स्टोरी मिरर पर महिंद्रा ग्रुप द्वारा आयोजित प्रतियोगिता की ब्रांड एंबेसडर, यू ट्यूब चैनल -‘ तेरी मेरी कहानी ‘ की लघुकहानी प्रतियोगिता की निर्णायक, तीन सांझा संकलन व 15 से अधिक एकल संग्रहों का सम्पादन, इंटरनेशनल बेव पोर्टल स्टोरी मिरर और अनकहे अल्फाज़ द्वारा आयोजित ’ भारत के वीर प्रतियोगिता ’ की ब्रांड एंबेसेडर, गृहलक्ष्मी पत्रिका में श्रेष्ठ कहानी के रूप में ” डस्टबिन ” कहानी को चुना गया साथ ही उसके कवर पेज पर भी फोटो प्रकाशित


Related Posts

Kya sayana kauaa ….ja baitha by Jayshree birmi

November 17, 2021

 क्या सयाना कौआ………जा बैठा? हमे चीन को पहचान ने के लिए ज्यादा कोशिश नहीं करनी पड़ती।हम १९६२ से जानते है

Bal diwas he kyo? By Jayshree birmi

November 12, 2021

 बाल दिवस ही क्यों? कई सालों से हम बाल दिवस मनाते हैं वैसे तो दिवस मनाने से उस दिन की

Masoom sawal by Anita Sharma

November 12, 2021

 ” मासूम सवाल” एक तीन सवा तीन साल का चंचल बच्चा एकाएक खामोश रहने लगा….पर किसी ने देखा नही।उस छोटे

Prem prateek by jayshree birmi

November 7, 2021

प्रेम प्रतीक गहने शरीर का सिंगार हैं तो गुण आंतरिक शक्ति और सिंगार भी हैं।अच्छा स्वभाव और सकारात्मक विचारों से

Haar Dubara (cricket) by Jayshree birmi

November 7, 2021

 हार दुबारा(क्रिकेट )? क्रिकेट एक खेल हैं और इसे खेलदिली से ही खेलना चाहिए।वैसे तो सभी खेलों को ही खेलदिली

कुदरत और हम – जयश्री बिरमी

November 7, 2021

 कुदरत और हम  दुनियां में विकास और पर्यावरण में संतुलन अति आवश्यक हैं।किंतु विकास के लिए पर्यावरण के महत्व  को

PreviousNext

Leave a Comment