Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

तुझे भी हक है-भावना ठाकर ‘भावु’

 “तुझे भी हक है” सामाजिक व्यवस्था में स्त्री की भूमिका सबसे अहम् होती है घर का ख़याल रखना, सास-ससुर, पति, …


 “तुझे भी हक है”

तुझे भी हक है-भावना ठाकर 'भावु'
सामाजिक व्यवस्था में स्त्री की भूमिका सबसे अहम् होती है घर का ख़याल रखना, सास-ससुर, पति, बच्चें सब हर जरूरत पर घर की स्त्री के उपर ही निर्भर होते है। साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात ये की स्त्री को एक दूसरे जीव को अपने अंदर पालना होता है और जन्म देना होता है। इस क्रिया में औरतों के अंदरूनी शरीर की सबसे ज़्यादा ताकत खर्च होती है।

पर आमतौर पर देखा जाता है ज़्यादातर स्त्री खुद के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होती है। घर में सबका खाना हो जाए उसके बाद जो बचता है उससे काम चला लेती है। कभी दाल नहीं बचती तो कभी सब्ज़ी। ऐसे में मुझे तो चलेगा अचार के साथ खा लूँगी करके कुछ भी खा कर चला लेती है। दूध, फ्रूटस और ड्रायफ्रूटस पति और बच्चों को याद करके खिलाएगी पर कभी अपने लिए सोचकर दो बादाम खुद नहीं खाएगी, या एक गिलास दूध खुद नहीं पिएगी पर ऐसा क्यूँ करना है? 

जबकि पूरा दिन सबकी देखभाल करते आपके पैरों को ही सबसे ज़्यादा दौड़ना होता है। दस मिनट का काम है अगर आपके लिए कुछ नहीं बचा तो फटाफट सब्ज़ी बना लीजिये क्यूँ अचार से काम चलाना है।

स्त्रियों को चालीस के आसपास पहुँचते ही मोनोपोज़ से जुड़ी कई समस्याओं की शुरुआत हो जाती है। और पचास तक पहुँचते ही वज़न बढ़ने से लेकर कभी कमर दु:खती है तो कभी घुटने, कभी बाल जड़ते है तो कभी नींद ना आने की समस्या। ज़िंदगी के प्रति नीरसता और चिड़चिडेपन का शिकार हो जाती है। होट फ़्लेशिस, अवसाद और इमोशनल होते खुद को अकेला पाती है। स्त्रियों को इस उम्र में खुद ही खुद का ख़याल रखना होता है। 

अच्छे खान-पान के साथ थोड़ा योग, एक्सरसाइज़, मेडिटेशन और वाॅकिंग पर भी ध्यान देना चाहिए। दूध, फ्रूटस, मल्टी विटामिन्स और कैल्शियम की इस उम्र में स्त्रियों को खास जरूरत होती है। खुद का स्वास्थ्य ठीक होगा तभी आप पूरे परिवार का अच्छे से ध्यान रख पाएगी।

कुछ-कुछ समय पर हम वाहनों की भी सर्विस करवाते है। मोबाइल भी अपडेट करते है तो ये शरीर भी एक मशीन ही है इसके प्रति बेदरकारी क्यूँ ? अंदरूनी खामियों को हैल्दी खान-पान से ठीक करके खुद का भी ध्यान रखें और अपनी बेटीयों को भी बचपन से बेहतरीन खान-पान की आदत ड़ालें। जैसा आप अपना ध्यान रखेगी वैसा ही बेटी भी सिखेगी। वो ज़माना गया जब बेटीयों को ये सिखाया जाता था कि जो है जितना है ऐसे में खुश रहना सीख लें।

स्त्रियों को अधिकारों के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य के लिए भी जागृत होने की जरूरत है। एक उम्र के बाद अपने लिए वक्त निकालना चाहिए और खुद के लिए जीना चाहिए। कभी डिप्रेशन जैसा महसूस हो तब अपनी पसंदीदा एक्टिवीटीस के साथ पढ़ना, संगीत सुनना और सहेलियों के साथ पिकनिक मनाने या फिल्म देखने निकल जाना चाहिए। खुद के तन-मन को ऐसे तैयार करो की आख़री साँस तक किसीके सहारे की जरूरत महसूस ना हो। याद रखो आप परिवार की नींव हो नींव मजबूत होगी तभी इमारत टीक पाएगी। आलस और बेपरवाही आपको उम्र से पहले बुढ़ा बना देंगी। वूमेन लिबरेशन और स्त्री स्वतंत्रता के लिए बहुत लड़ लिया अब खुद के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का समय आ गया है।

भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगलूरु, कर्नाटक)


Related Posts

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ भारत की लड़ाई| India’s fight against plastic pollution

March 15, 2023

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ भारत की लड़ाई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जी20 देशों में प्लास्टिक की खपत 2050 तक

आध्यात्मिकता से जुड़कर हेट स्पीच, अनैतिक आचरण को दूर भगाएं

March 13, 2023

आओ हेट स्पीच को छोड़, मधुर वाणी का उपयोग करें आध्यात्मिकता से जुड़कर हेट स्पीच, अनैतिक आचरण को दूर भगाएं

क्या अब प्यार और संबंध भी डिजिटल हो जाएंगे

March 13, 2023

क्या अब प्यार और संबंध भी डिजिटल हो जाएंगे मनुष्य के बारे में कहा जाता है कि वह सामाजिक प्राणी

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता

March 13, 2023

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता आज के भागदौड़ भरे जीवन में अच्छे जीवन की एक संकीर्ण धारणा पर ध्यान

युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा

March 13, 2023

‘युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा’ युवाओं को सशक्त बनाने की कुंजी, कौशल विकास के साथ है, जब एक युवा

समय न ठहरा है कभी, रुके न इसके पाँव।

March 13, 2023

समय न ठहरा है कभी,रुके न इसके पाँव।संग समय के जो चले, पहुंचे अपने गाँव।। जब हम समय बर्बाद करते

PreviousNext

Leave a Comment