Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

तर्क या कुतर्क- जितेन्द्र ‘कबीर’

तर्क या कुतर्क जंग के समर्थन मेंकिसी के तर्कमुझे तब तक स्वीकार नहींजब तक वो खुद सपरिवारउस जंग में कूद …


तर्क या कुतर्क

तर्क या कुतर्क- जितेन्द्र 'कबीर'

जंग के समर्थन में
किसी के तर्क
मुझे तब तक स्वीकार नहीं
जब तक वो खुद सपरिवार
उस जंग में कूद न जाए,
अगर कोई ऐसा करता है
तो यह मान लेना चाहिए
कि अब बात उसके अस्तित्व की है
और उसके पास लड़ने के सिवा
और कोई विकल्प नहीं,
किसी राष्ट्र की एकता, अखंडता,
संप्रभुता और धर्म-युद्ध के
बाकी सारे तर्क
ज्यादातर हथियार ही बने हैं
सत्ता-लोलुप शक्तियों के हाथों
निर्दोष व कमजोर जनता के
उत्पीड़न हेतू।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Mansik shanti ke upay by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 मानसिक शांति के उपाय मानसिक शांति के लिए करके देखें यह कुछ एक उपाय, समय दें उस शख्स को जो

misail man kalam by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

मिसाइल मैन कलाम 15 अक्टूबर 1931को जन्में   रामेश्वरम, तमिलनाडु के गरीब मुस्लिम परिवार में कलाम धरा पर आये। गरीबी की

Bhukhe ke hisse ki roti by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 भूखे के हिस्से की रोटी मैं देखता हूं बहुत बार अपनी छोटी सी बिटिया को खाना खाते हुए, साथ में

Maa kavita by poonam udaychandra

July 31, 2021

 “माँ” आज देखा है चेहरा अपनी  माँ का मैंने।  उभरती लकीरों और आंखों का गहना।।  मुश्किल बड़ी रास्ते छोटे, उसका

Na ho dushmani agar by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 न हो दुश्मनी अगर न हो दुश्मनी दो देशों के बीच अगर तो कई नेताओं और दलों की राजनीति में

Vijay divash kavita by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

 विजय दिवस बहुत गर्व है हमें अपने जाँबाजों,रणबांकुरों पर जिनके हृदय में हिंदुस्तान बसता है, जिनका हौसला चट्टान सा शरीर

Leave a Comment