Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले …


ढलता सूरज

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सी
उगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थी
जब हौंसले थे तब भी और अब उम्र ढली तब भी
बसे रहते हैं वही छोटे छोटे कदम
और वही प्यारी मुस्कान दिल में
अब चाहे जिन्हे वह हो गए आदमकद आयने से
पता नहीं क्षय के बाद क्या होता होगा
याद रख पाऊंगी या सब कुछ छोड़ जाऊंगी
अगर छूट भी गए तो कैसे भूल पाऊंगी
और कैसे जी और जा पाऊंगी छोड़ उन्हे
जीया हैं उम्र भर जिसके लिए
ओह! तब तो जीवनलीला ही समाप्त हो जायेगी
तो विरह में जीने का सवाल होगा ही कहां?

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

कविता: शब्द | kavita: shabd

March 13, 2023

कविता: शब्द मन के अनगिनत विचारों को,सबके सन्मुख दे खोल।कहलाते है शब्द वही,या कहते इन्हें हम बोल।शब्द होते दर्पण व्यक्तित्व

Kavita: eknishthta |कविता :एकनिष्ठता

March 12, 2023

कविता: एकनिष्ठता नदी का एक पड़ाव होता हैवो बहती है समंदर की तलाश मेंबादल भी चलते हैं, बहते हैं मौसम

स्वाभिमान है तेरा असली गहना।

March 9, 2023

स्वाभिमान है तेरा असली गहना। लिखना सिखा,पढ़ना सिखा,सबसे आगे बढ़ना सीखा,स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा? सहना

भांग के साइड इफेक्ट्स

March 9, 2023

भांग के साइड इफेक्ट्स आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है,मुझे नींद

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

PreviousNext

Leave a Comment