Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

डॉ. राजेंद्र प्रसाद- सुधीर श्रीवास्तव

डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीरादेई सीवान बिहार मेंतीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में,जन्मा था एक लाल।दुनिया में चमका नाम उसका,थे वो …


डॉ. राजेंद्र प्रसाद

डॉ. राजेंद्र प्रसाद- सुधीर श्रीवास्तव
जीरादेई सीवान बिहार में
तीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में,
जन्मा था एक लाल।
दुनिया में चमका नाम उसका,
थे वो बाबू राजेंद्र प्रसाद।।

तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष बन,
संविधान सभा के अध्यक्ष रहे।
राष्ट्रपति बन राजेंद्र बाबू जी,
जन मानस के आदर्श बने।।

स्वदेशी व बहिष्कार आंदोलनों का
उन पर गहरा असर हुआ।
कांग्रेस में शामिल होकर,
राष्ट्रीय कमेटी में चयन हुआ।

गाँधीजी के संपर्क में आ
बाबू राजेंद्र ने यह भूमिका निभाई
बनाया गाँधी जी को महात्मा
जग को उनकी महत्ता समझाई।।

अहिंसा के मर्म को समझा उनने,
अपनी संस्कृति की चिंता की।
राजेंद्र बाबू और सरदार पटेल में
ऐसी कितनी समानता थी।।

व्यापक और परिपक्व विचार के
अद्भुत गुण के ये योद्धा थे।
आत्मविश्वास के संचार पुरुष वे
राष्ट्रवादी संघर्ष के पुरोधा थे।।

सभी विचारधाराओं का सम्मान,
जीवन में किया सदा ही उनने।
ग्यारह दिसंबर उन्नीस सौ 46 को
संविधान सभा के वे अध्यक्ष गये चुने ।।

संविधान निर्माण में आप आ
शिल्पकार की भूमिका निभा गये।
आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति हो,
बारह वर्ष तक पद पर रहे,।।

भारत माता का सपूत ये
कुल, राष्ट्र का हैं गौरव ये।
भारत रत्न राजेंद्र प्रसाद जी ,
बसे हैं भारत के कण कण मे।।

हर भारतवासी के दिल में
अपनी वजह से जिंदा हैं।
नमन उन्हें हम सबका है
नमन करे हर बन्दा है।।

कभी न भूलें हम आपको,
यही भावना रखते हैं
उनके आदर्शों पर चल पायें,
संकल्प यही हम लेते हैं।।

👉 सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

Etana kaphi hai by Jitendra kabir

July 11, 2021

 इतना काफी है वो कहते हैं कि लिखने से तेरे क्रांति आ जाए इतना महान भी तू लेखक नहीं, मैं

कविता बोलती जिन्दगी-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

July 11, 2021

बोलती जिंदगी बोलती जिंदगी, पूछती रह गई,कुछ तो बोल,मौन क्यो हो गये ?धर्म के नाम पर,कर्म के नाम पर,आज क्यों

Kavi devendra arya ki kavitayen

July 11, 2021

देवेन्द्र आर्य की कविताएं  1. कवि नहीं कविता बड़ी हो ——————————- इस तरह तू लिख कि लिख के कवि नहीं

Bas tujhko hi paya by pravin pathik

July 11, 2021

 ” बस,तुझको ही पाया है” खो दिया सब कुछ मैंने यूॅं बस, तुझको ही पाया है।        

geet daduron tum chup raho ab by shivam

July 3, 2021

– गीत दादुरों तुम चुप रहो अब ऐ किनारों, इन हिलोरों को तुम्हें सहना पड़ेगा।जिंदगी दिन- रात है, दिन रात

Kavita ek seema jaruri hai by jitendra kabir

July 3, 2021

 एक सीमा जरूरी है रिश्तों में अनुचित मांग पर एक बार जब हम झुक जाते हैं, तो आने वाले बहुत

Leave a Comment