Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी जी की लघुकथाएँ

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी जी की लघुकथाएँ 1)चादर देखकर कोरोना से पीड़ित दो आदमी एक ही निजी हस्पताल में भर्ती …


डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी जी की लघुकथाएँ

1)चादर देखकर

कोरोना से पीड़ित दो आदमी एक ही निजी हस्पताल में भर्ती हुए। पूछताछ कर एक का नाम दर्ज किया गया ‘लाख’ और दूसरे का नाम ‘करोड़’।

दोनों से पूछा गया, “क्या मेडिकल बीमा करवा रखा है?” दोनों का उत्तर तो हाँ था लेकिन स्वर-शक्ति में अंतर था।

बहरहाल, दोनों से उनकी आर्थिक-शक्ति और बीमा की रकम के अनुसार फीस लेकर हस्पताल में अलग-अलग श्रेणी के कमरों में क्वारेंटाइन कर दिया गया। लाख के साथ एक मरीज़ और था, जबकि दूसरे कमरे में करोड़ अकेला था। लाख को इलाज के लिए दवाईयां दी गईं, करोड़ को दवाईयों के साथ विशेष शक्तिवर्धक टॉनिक भी। फिर भी दोनों की तबियत बिगड़ गई।

लाख को जांचने के लिए चिकित्सक दिन में अपने समय पर कुछ मिनटों के लिए आता तो करोड़ के लिए चिकित्सक का समयचक्र एक ही बिन्दू ‘शून्य घंटे शून्य मिनट’ पर ही ठहरा हुआ था। उसके बावजूद भी दोनों का स्वास्थ्य गिरता गया, दोनों को वेंटीलेटर पर ले जाया गया।

कुछ दिनों के बाद…

लाख नहीं रहा…

और करोड़ के कुछ लाख नहीं रहे।

2)नीरव प्रतिध्वनि

हॉल तालियों से गूँज उठा, सर्कस में निशानेबाज की बन्दूक से निकली पहली ही गोली ने सामने टंगे खिलौनों में से एक खिलौना बतख को उड़ा दिया था। अब उसने दूसरे निशाने की तरफ इशारा कर उसकी तरफ बन्दूक उठाई। तभी एक जोकर उसके और निशानों के बीच सीना तान कर खड़ा हो गया।  

निशानेबाज उसे देख कर तिरस्कारपूर्वक बोला, “हट जा।”

जोकर ने नहीं की मुद्रा में सिर हिला दिया।

निशानेबाज ने क्रोध दर्शाते हुए बन्दूक उठाई और जोकर की टोपी उड़ा दी।

लेकिन जोकर बिना डरे अपनी जेब में से एक सेव निकाल कर अपने सिर पर रख कर बोला “मेरा सिर खाली नहीं रहेगा।”

निशानेबाज ने अगली गोली से वह सेव भी उड़ा दिया और पूछा, “सामने से हट क्यों नहीं रहा है?”

जोकर ने उत्तर दिया, “क्योंकि… मैं तुझसे बड़ा निशानेबाज हूँ।”

“कैसे?” निशानेबाज ने चौंक कर पूछा तो हॉल में दर्शक भी उत्सुकतावश चुप हो गए।

“इसकी वजह से…” कहकर जोकर ने अपनी कमीज़ के अंदर हाथ डाला और एक छोटी सी थाली निकाल कर दिखाई।

यह देख निशानेबाज जोर-जोर से हँसने लगा।

लेकिन जोकर उस थाली को दर्शकों को दिखा कर बोला, “मेरा निशाना देखना चाहते हो… देखो…”

कहकर उसने उस थाली को ऊपर हवा में फैंक दिया और बहुत फुर्ती से अपनी जेब से एक रिवाल्वर निकाल कर उड़ती थाली पर निशाना लगाया।

गोली सीधी थाली से जा टकराई जिससे पूरे हॉल में तेज़ आवाज़ हुई – ‘टन्न्न्नन्न…..’

गोली नकली थी इसलिए थाली सही-सलामत नीचे गिरी। निशानेबाज को हैरत में देख जोकर थाली उठाकर एक छोटा-ठहाका लगाते हुए बोला, “मेरा निशाना चूक नहीं सकता… क्योंकि ये खाली थाली मेरे बच्चों की है…”

हॉल में फिर तालियाँ बज उठीं, लेकिन बहुत सारे दर्शक चुप भी थे उनके कानों में “टन्न्न्नन्न” की आवाज़ अभी तक गूँज रही थी।

3)अस्पृश्य प्रकृति

“जय श्री देव…” घर के मुख्य दरवाज़े के बाहर से एक स्त्री स्वर गूंजा।

जाना-पहचाना स्वर सुन कर अंदर बैठी 12-13 वर्षीय लड़की एक बार तो कुर्सी से उछल कर खड़ीं हुई लेकिन कुछ सोचती हुई फिर बैठ गयी।

कुछ क्षणों बाद वही स्वर फिर गूंजा। अब वह लड़की उठकर बाहर चली गयी। लड़की को देखकर बाहर खड़ी महिला ने पुनः किन्तु पहले से धीमे स्वर में “जय श्री देव” बोलते हुए देवता की मूर्ती रखे एक बर्तन को उसके सामने कर दिया।

बर्तन देखते ही वह लड़की एक कदम पीछे हट गयी और बोली, “आंटीजी आज नहीं दूँगी, आप अगले हफ्ते आना।”

“क्यूँ बिटिया?” महिला ने यह बात सुनकर आश्चर्य से पूछा।

उस लड़की ने कहा  “कुछ नहीं आंटी…”

उसी समय उस लड़की की माँ भी बाहर आ गयी।

माँ ने उस महिला के बर्तन में एक सिक्का डाला, उसमें रखी मूर्ती को हाथ जोड़े और फिर फुसफुसाते हुए बोली, “बिटिया पीरियड्स में है, इसलिए भगवान के कार्यों में स्पर्श नहीं करना है।”

वह महिला चौंकी और  उसने भी धीमे स्वर में कहा, “हम और हमारी जिंदगी, सब कुछ तो इसी का बनाया हुआ है… फिर भी?”

“क्या करें, रीति-रिवाज हैं… बच्ची का मामला है ना!” माँ ने फीकी सी मुस्कराहट के साथ उत्तर दिया।

उस महिला ने लड़की की माँ की आँखों में झांकते हुए कहा, “मैनें बहुत कोशिश की थी मेहनत कर के घर चलाने की, लेकिन गरीब-अनपढ़ विधवा को अंत में सिर्फ इन्हीं भगवान का सहारा मिला।”

और वह बर्तन में रखी मूर्ती को देखकर बोली, “देव मुझे तो माफ़ कर दोगे? आपको छू रही हूँ… आज मैं भी तो… लेकिन बच्चों का मामला है ना!”

4)शक्तिहीन

वह मीठे पानी की नदी थी। अपने रास्ते पर प्रवाहित होकर दूसरी नदियों की तरह ही वह भी समुद्र से जा मिलती थी। एक बार उस नदी की एक मछली भी पानी के साथ-साथ बहते हुए समुद्र में पहुँच गई। वहां जाकर वह परेशान हो गई, समुद्र की एक दूसरी मछली ने उसे देखा तो वह उसके पास गई और पूछा, “क्या बात है, परेशान सी क्यों लग रही हो?”

नदी की मछली ने उत्तर दिया, “हाँ! मैं परेशान हूँ क्योंकि यह पानी कितना खारा है, मैं इसमें कैसे जियूंगी?”

समुद्र की मछली ने हँसते हुए कहा, “पानी का स्वाद तो ऐसा ही होता है।”

“नहीं-नहीं!” नदी की मछली ने बात काटते हुए उत्तर दिया, “पानी तो मीठा भी होता है।“

“पानी और मीठा! कहाँ पर?” समुद्र की मछली आश्चर्यचकित थी।

“वहाँ, उस तरफ। वहीं से मैं आई हूँ।“ कहते हुए नदी की मछली ने नदी की दिशा की ओर इशारा किया।

“अच्छा! चलो चल कर देखते हैं।“ समुद्र की मछली ने उत्सुकता से कहा।

“हाँ-हाँ चलो, मैं वहीं ज़िंदा रह पाऊंगी, लेकिन क्या तुम मुझे वहां तक ले चलोगी?“

“हाँ ज़रूर, लेकिन तुम क्यों नहीं तैर पा रही?”

नदी की मछली ने समुद्र की मछली को थामते हुए उत्तर दिया,

“क्योंकि नदी की धारा के साथ बहते-बहते मुझमें अब विपरीत धारा में तैरने की शक्ति नहीं बची।“

-0-

About Author

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी जी की लघुकथाएँ

मेरा संक्षिप्त परिचय निम्नानुसार है:

नाम: डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

शिक्षा: विद्या वाचस्पति (Ph.D.)

सम्प्रति: सहायक आचार्य (कम्प्यूटर विज्ञान)

साहित्यिक लेखन विधा: कविता, लघुकथा, बाल कथा, कहानी

10 पुस्तकें प्रकाशित, 8 संपादित पुस्तकें

30 शोध पत्र प्रकाशित

16 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त

फ़ोन: 9928544749

Email: chandresh.chhatlani@gmail.com

Address: 3 प 46, प्रभात नगर, सेक्टर-5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) – 313 002

Know more about writer: https://sites.google.com/view/chandresh-c/about

Author’s website: http://laghukathaduniya.blogspot.com/


Related Posts

Zindagi tukdon me by jayshree birmi

September 12, 2021

 जिंदगी टुकड़ों में एक बार मेरा एक दोस्त मिला,वह जज था उदास सा दिख रहा था। काफी देर इधर उधर

Mamta laghukatha by Anita Sharma

September 12, 2021

 ममता सविता का विवाह मात्र तेरह वर्ष की अल्प आयु में हो गया था।वो एक मालगुजार परिवार की लाडली सबसे

Babu ji laghukatha by Sudhir Kumar

September 12, 2021

लघुकथा             *बाबू जी*                     आज साक्षरता

Jooton ki khoj by Jayshree birmi

September 9, 2021

 जूतों की खोज आज हम जूते पहनते हैं पैरों की सुरक्षा के साथ साथ अच्छे दिखने और फैशन के चलन

Laghukatha maa by jayshree birmi ahamadabad

August 3, 2021

लघुकथा मां बहुत ही पुरानी बात हैं,जब गावों में बिजली नहीं होती थी,मकान कच्चे होते थे,रसोई में चूल्हे पर खाना

vyangkatha- police ka chakravyuh by suresh bhatia

June 23, 2021

व्‍यंग्‍य कथा –पुलिस का चक्रव्‍यूह. मुंगेरी ने कसम खायी थी उसका कितना ही बड़ा नुकसान हो जावे, थाने में रिपोर्ट

Previous

Leave a Comment