Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Jayshree_birmi

डिजिटल डिटॉक्स

 डिजिटल डिटॉक्स  जयश्री बिरमी आजकल सुबह होती हैं मोबाइल में बजते अलार्म से और वहीं पर फोन हाथ में ले …


 डिजिटल डिटॉक्स 

जयश्री बिरमी
आजकल सुबह होती हैं मोबाइल में बजते अलार्म से और वहीं पर फोन हाथ में ले कर दिन शुरु होता हैं।दिन में जो भी काम हम करें किंतु ध्यान तो आपने फोन पर ही रहता हैं।फिर लेते हैं हाथ में अखबार और वह भी पूरा पढ़ा भी नहीं जाता और टीवी शुरू हो जाता हैं जहां पूरे विश्व के समाचार देखना और विविध चैनलों पर हम चिपके रहते हैं।और फिर शुरू होता हैं मानसिक दौरा fb का ,जहां बहुत सारे पोस्ट देखना,कुछ में रिमार्क करना तो किसी में लाइक करना या कुछ पोस्ट करना।फिर शायद व्हाट्सएप की बारी आती हैं, जिसमें सुप्रभात,विविध देवी देवताओं के नमन के या प्रार्थना वालें चित्रों से ले कर कुछ सुविचारों के फॉरवर्ड्स के साथ साथ कुछ विडियोज,जिसमें कुछ तो देखें जातें हैं तो कोई फक्त स्क्रॉल कर दिए जाते हैं।फिर बारी आती हैं इंस्टाग्राम की,वहां भी fb और व्हाट्सएप जैसी ही पोस्ट होती होने के बावजूद वहां भी कुछ समय आराम से निकल जाता हैं ।उपर से अगर आप ट्वीटर पर भी कार्यरत रहते हैं तो बात ही खत्म कुछ ही नहीं बहुत सारा समय कब गुजर जाएगा ये आपको पता ही नहीं चलेगा।ये पंचायत का अड्डा हैं जैसे गावों में लोग चौरों पर बैठ कर पूरे गांव की बातों को बढ़ा चढ़ा कर सब की बातें करते थे।

         वैसे भी आयुर्वेद में सलाह दी जाती हैं कि अगर स्वस्थ रहना हैं तो व्रत उपवास करना चाहिए।वही बात यहां भी उपयुक्त हैं हफ्ते में एक दिन सिर्फ फोन करे या फोन आए तो उसका जवाब दें। न व्हाट्स आप, न fb , न इंस्टाग्राम और न ही ट्वीटर पर जाएं,कुछ भी देखना या पोस्ट नही करने की कसम खा लें।इस अप्रतिम कार्य के लिए गुरुवार यानि की वीरवार उत्तम रहेगा।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी

January 7, 2022

अपना हाथ जगगन्नाथ बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

अलविदा २०२१- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

 अलविदा 2021 एक बुरे स्वप्न की समाप्ति सा लग रहा हैं इस वर्ष का समाप्त होना।और मन थोड़ा आहत भी

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

लघुकथा मां- जयश्री बिर्मी

January 6, 2022

 लघुकथा  मां- बहुत ही पुरानी बात हैं,जब गावों में बिजली नहीं होती थी,मकान कच्चे होते थे,रसोई में चूल्हे पर खाना

PreviousNext

Leave a Comment