Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satish_samyak

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू-सतीश सम्यक

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू रात के सफर मेंजयपुर से नोहर तकआने वाली बसके अंन्दर बैठा था मैं। लगभग भागपाटी …


ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू-सतीश सम्यक
रात के सफर में
जयपुर से नोहर तक
आने वाली बस
के अंन्दर बैठा था मैं।

लगभग भागपाटी के
चार बजे थे।
काची नींद से जाग गया,
बाहर थूकने की खातिर
सरकाया शीशा तो
रात के आखरी पहर में
धुंधला सा ,
सड़क किनारे बसे घरों की
दीवारों पर नाम दिखाई दिया
तुम्हारे गांव का।

कैसे थूक सकता था
उस गांव की जमीन पर
जो तुमसे जूड़ी थी।
और मैं
बाहर गर्दन निकाल कर
लेने लगा तुम्हारे गांव की
ठंडी हवा।
जिसमें आ रही थी तुम्हारी खुशबू।

सतीश सम्यक 
राजस्थान 


Related Posts

हाय रे गंतव्य जीवन – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 22, 2021

 हाय रे गंतव्य जीवन चली अचानक गई यहां से, जिसका कोई विश्वास नहीं, अंधकार में टटोल रहा हो , जैसे

लॉक लगा के रखना-अंकुर सिंह

November 22, 2021

 लॉक लगा के रखना चलो अब हम चलते है। ख्याल अपना रख लेना। किए मुझसे वादे पूरे कर मेरे यादों

मेरी काव्य धारा-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 22, 2021

 मेरी काव्य धारा मेरी काव्य धारा में, डूबा प्रेम तुम्हारा है , रचना भी तुम्हारी है, प्रणय भी तुम्हारा है 

दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है सोशल  मीडिया के दुनिया में आगमन के बाद  आ गई है हम सबके हाथ एक

संत शिरोमणी नानक देव -डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 संत शिरोमणी नानक देव सिखों के प्रथम गुरु  संत शिरोमणी नानक देव बहाए प्रेम की  गंग सदैव प्रकाश पूंज फैलाने

प्यार की डोर-डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 प्यार की डोर हम सब जिनसे बँधे हुए  वो   है  प्यार   की  डोर वर्ना रिश्ते चटक  रहे है बिना   किये 

Leave a Comment