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टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों?

टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों? सड़क विकास और रखरखाव के वित्तपोषण …


टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों?

टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों?

सड़क विकास और रखरखाव के वित्तपोषण के लिए टोल एकत्र किए जाते हैं। परिणामस्वरूप, यह टोल टैक्स लगाकर नवनिर्मित टोल सड़कों की लागत की भरपाई करता है। यह टोल सड़कों के रखरखाव के लिए भी शुल्क लेता है। टोल टैक्स एनएचएआई को आय प्रदान करता है, जिसे विभिन्न निजी पार्टियों/ठेकेदारों को वितरित किया जाता है। कई ऐसी सड़कें हैं जहां बड़ी संख्या में गड्ढे मौजूद हैं। टोल सड़कें रखरखाव की बहुत खराब स्थिति में हैं। फ़ास्ट टैग प्रणालियाँ दोषपूर्ण या धीमी हैं जिसके कारण भारी देरी और असुविधा होती है। यह या तो ऑपरेटरों की अक्षमता या रखरखाव की कमी है। सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे करने का कोई मतलब नहीं है। इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाया जाना चाहिए। अब इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियां भी प्रवेश कर रही है। ये अपने फायदे के लिए काम करती है और खूब पैसा वसूल करती है तभी आप देख रहे है कि देश भर में अरबों का टोल टैक्स अपनी जेब में डालने के बाद भी सड़कों की हालत खस्ता है।

प्रियंका सौरभ

टोल टैक्‍स या सिर्फ टोल वह शुल्‍क है जो वाहन चालकों को तय सड़कों, पुलों, सुरंगों से गुजरने पर देना पड़ता है। ऐसी सड़कों को टोल रोड कहा जाता है। यह इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है। यह रोड टैक्‍स से इतर है जो आरटीओ वाहन मालिकों से वसूल करते हैं। टोल टैक्‍स कलेक्‍ट करने के लिए सड़कों पर टोल बूथ या टोल प्‍लाजा (कई बूथों को मिलाकर) होते हैं। आमतौर पर दो टोल बूथ के बीच 60 किलोमीटर की दूरी होती है। भारत में चार पहिया या उससे बड़े वाहनों से टोल टैक्‍स लिया जाता है। सड़कें बनाने में अच्‍छा-खासा पैसा खर्च होता है। नैशनल हाइवे/एक्‍सप्रेसवे बनाने में अरबों रुपये लग जाते हैं। ऐसे में टोल के जरिए वह लागत वसूली जाती है। मेंटेनेंस के लिए भी टोल टैक्‍स लिया जाता है। एक बार हाइवे की लागत रिकवर हो जाने पर टोल टैक्‍स 40% हो जाता है, जो मेंटेनेंस में इस्‍तेमाल होता है। आमतौर पर टोल रोड के हर 60 किलोमीटर स्‍ट्रेच पर टैक्‍स लिया जाता है। अगर स्‍ट्रेच इससे छोटा है तो रोड की वास्‍तविक लंबाई के आधार पर टैक्‍स वसूला जा सकता है। टोल टैक्‍स कितना होगा, यह तय करने के कई और फैक्‍टर्स भी होते हैं जैसे पुल, सुरंग, बाईपास, हाइवे की चौड़ाई या अन्‍य शर्तें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खराब सड़कों से गुजरने वाले टोल क्यों दें? सड़कें खराब हैं तो सरकार की नीतियों की वजह से, इसकी सरकार भरपाई करे।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ओवरलोडेड ट्रकों के चलने पर चिंता जताई है और कहा है कि इन ट्रकों की वजह से सड़कों की हालत खस्ता हो रही है। कोर्ट ने कहा कि ओवरलोडेड ट्रक भी भ्रष्टाचार का एक और जरिया हैं और अब इन्हें काबू करने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। टोल सड़क के विकास और रखरखाव को फंड देने के लिए एकत्र किए जाते हैं। नतीजतन, यह टोल टैक्स लगाकर नवनिर्मित टोल सड़कों की लागतों की भरपाई करता है। यह टोल सड़कों के रखरखाव के लिए भी शुल्क लेता है। सड़क विकास और रखरखाव के वित्तपोषण के लिए टोल एकत्र किए जाते हैं। परिणामस्वरूप, यह टोल टैक्स लगाकर नवनिर्मित टोल सड़कों की लागत की भरपाई करता है। यह टोल सड़कों के रखरखाव के लिए भी शुल्क लेता है। टोल टैक्स एनएचएआई को आय प्रदान करता है, जिसे विभिन्न निजी पार्टियों/ठेकेदारों को वितरित किया जाता है। यहां कई ऐसी सड़कें हैं जहां बड़ी संख्या में गड्ढे मौजूद हैं। टोल सड़कें रखरखाव की बहुत खराब स्थिति में हैं। फ़ास्ट टैग प्रणालियाँ दोषपूर्ण या धीमी हैं जिसके कारण भारी देरी और असुविधा होती है। यह या तो ऑपरेटरों की अक्षमता या रखरखाव की कमी है। सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे करने का कोई मतलब नहीं है। इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

कोर्ट के निर्णय के अनुसार जो सडकें केंद्र सरकार या राज्य सरकारें बनवायेंगी उन पर कोई टोल टैक्स नहीं लगता है। लेकिन जिन्हें ये सरकारें नहीं बनाती है उन पर टोल टैक्स देय होता है ताकि सडक बनाने वाली संस्था सडक निर्माण की अपनी कीमत वसूल सके। जब आप किसी सडक पर यात्रा करते हैं तो टोल टैक्स वसूलने वाली संस्था का नाम भी लिखा होता है। यह सडक बनाने वाली संस्था ही होती है। राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ) बनाता है। यह भले ही सरकारी संस्था है लेकिन सरकार से अलग एक स्वायत्त संस्था है। यह जो भी सडक बनायेगी, टोल टैक्स वसूलेगी। अब इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियां भी प्रवेश कर रही है। ये अपने फायदे के लिए काम करती है और खूब पैसा वसूल करती है तभी आप देख रहे है कि देश भर में अरबों का टोल टैक्स अपनी जेब में डालने के बाद भी सड़कों की हालत खस्ता है। टोल प्लाजा के नियमों ने उन लोगों के लिए टोल का भुगतान करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया, जिनके पास फास्टैग है और फिर भी 10 सेकंड से अधिक सेवा समय के लिए इंतजार करना पड़ता है। अगर वेटिंग लाइन 100 मीटर से अधिक लंबी हो जाती है, तो टोल प्लाजा नियम, वाहनों को टोल का भुगतान किए बिना गुजरने की अनुमति देते हैं।

हर टोल लेन में टोल बूथ से 100 मीटर की दूरी पर पीली पट्टी होनी चाहिए। टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह हाल के वर्षों में पेश किया गया। टोल प्लाजा नियमों के अनुसार अनिवार्य किया गया है। फास्टैग टोल भुगतान के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन तकनीक का इस्तेमाल होता हैं। केंद्रीय परिवहन मंत्री ने 60 किलोमीटर से कम दूरी वाले टोल प्लाजा को बंद करने की घोषणा की थी। 60 किलोमीटर के भीतर केवल एक टोल बूथ होगा। सरकारी अधिकारियों ने पिछले साल जीपीएस आधारित टोलिंग शुरू करने की योजना की घोषणा की। स्थानीय निवासी और बार-बार उपयोग करने वाले एनएचएआई टोल नियम 2022 के अनुसार रियायतों का आनंद लेते हैं। हालांकि ये राहत देने वाले टोल प्लाजा नियम पूरे भारत में एक समान नहीं हैं। नए टोल प्लाजा नियम 2022 के अनुसार भी वाहन मालिकों के लिए फास्टैग होना जरुरी है। लेकिन अधिकारी उन लोगों के आवागमन को प्रतिबंधित नहीं कर सकते जिनके पास फास्टैग नहीं है। ऐसे यूजर्स को जिस कैटेगरी में उनका वाहन आता है, उसके लिए दोगुनी रकम चुकानी पड़ती है।

About author 

Priyanka saurabh

प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार
facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh 


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