Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

ashish_yadav, lekh

ज्ञान की संस्कृति-आशीष यादव

 ज्ञान की संस्कृति बुद्धिमानो ने बताया है कि ज्ञान की संस्कृति से एक प्रकार का फल मिलता है और अविद्या …


 ज्ञान की संस्कृति

ज्ञान की संस्कृति-आशीष यादव
बुद्धिमानो ने बताया है कि ज्ञान की संस्कृति से एक प्रकार का फल मिलता है और अविद्या की संस्कृति से भिन्न प्रकार का ।” जैसा कि पहले कहा जा चुका है, ज्ञान की असली संस्कृति तो आप आध्यात्मिक ज्ञान का सम्वध्रन       है । शारीरिक सुविधाओं या शरीर की रक्षा करने की दिशा में ज्ञान का संवर्धन और अविद्या की संस्कृति है, क्योंकि इस शरीर की रक्षा करने का आप चाहे जो भी प्रयास करें वह स्वभाविक मार्ग का ही अनुसरण करेगा । वह क्या है ? बारम्बार जन्म तथा मृत्यु और शरीर के प्रकट होने पर रोग तथा वृद्धावस्था ।  लोग इस शरीर के ज्ञान का अनुशीलन करने में अति व्यस्त हैं, यद्यपि वे देखते हैं कि यह शरीर हर क्षण क्षीण होता रहता है शरीर की मृत्यु जन्म के समय ही निश्चित हो गई थी । यह तथ्य है । अतः आप इस शरीर के प्राकृतिक प्रवाह को यानी जन्म,  बुढ़ापा, रोग तथा मृत्यु को रोक नहीं सकते । 

         श्रीमद्भभागवत में भी कहा गया है  कि यह शरीर तीन मुख्य तत्वों – कफ, पित्त तथा वायु – से युक्त एक झोला है और जो कोई कफ, पित्त तथा वायु कि इस सम्मेल को स्वयं मान लेता है, वह गधा है । बड़े से बड़े दर्शनिक तथा विज्ञानी तक अपने कफ, पित्त तथा वात का यही सम्मेल मानते हैं । यही उनकी भूल है । वास्तुत: दर्शनिक तथा विज्ञानीजन आत्मा हैं और अपने कर्म के अनुसार वे अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे हैं । वे कर्म के नियम को नहीं समझते ।

          आखिर इतने सारे भिन्न-भिन्न व्यक्ति क्यों हैं ?  यदि मनुष्य का कफ, वात तथा पित्त के सम्मेल के अतिरिक्त और कुछ नहीं तो फिर वे एक जैसे क्यों नहीं ? कोई लखपति के घर में जन्म लेता है; किसी को कठोर श्रम करने पर ही   दो टाइम का भोजन नहीं मिल पाता । यह अंतर क्यों ? ऐसा कर्म के नियम के कारण होता है । जो इस रहस्य को समझता है वह ज्ञान को प्राप्त होता है ।

       यह मनुष्य-जीवन जीवन के रहस्य को समझने के लिए मिला है । जो इस मनुष्य रूप को इस प्रयोजन के में प्रयुक्त नहीं कर पाता वह कृपण यानी कंजूस है । गर्ग उपनिषद्  में भी ऐसा कहा गया है । यदि आपको दस लाख डॉलर मिले और आप इसका उपयोग यह सोच कर ना करें कि ”मैं इसे बैंक खाते में रखूंगा” तो आप कृपण हैं। आपको इसका पता नहीं कि अपने धन का किस तरह उपयोग करें। दूसरी और,  एक ऐसा व्यक्ति जो इस दस लाख डॉलर का उपयोग अन्य दस लाख डॉलर बनाने में करता है वह बुद्धिमान है इसी तरह यह मनुष्य जीवन अमूल्य है। जो इसका उपयोग आध्यात्मिक ज्ञान को अनुशीलन करने में करता है । वह ब्राह्मण है, बुद्धिमान है और जो भौतिकतावादी ज्ञान का अनुशीलन करता है वह कृपण है। एक ब्राह्मण तथा कृपण में यही अंन्तर है।

    जो व्यक्ति इस शरीर का उपयोग कुत्तों-बिल्लियों की तरह केवल इंन्दि्तृत्ती के लिए करता है वह कृपण है। वह नहीं जानता कि अपने ” दस लाख डॉलरों” का उपयोग कैसे करें । इसलिए पिता, माता,  राज्य तथा शिक्षकों का कर्तव्य है कि वह अपने आश्रितों को प्रभाव से ही आध्यात्मिक शिक्षा दें। निस्संदेह, श्रीमद्भाभागवत का कथन है कि जब तक कोई अन्य अपने आश्रितों को उस आध्यात्मिक ज्ञान के स्तर तक उठाने में सक्षम न हो जो उन्हें बारम्बार जन्म-मृत्यु से बचा सके तब तक उसे माता-पिता, गुरु या सरकार का प्रधान नहीं बनाना चाहिए

आशीष यादव 
कानपुर देहात 


Related Posts

वो सुप्रभात संदेश जिसने झकझोरा | the good morning message that shook

June 13, 2023

वो सुप्रभात संदेश जिसने झकझोरा जैसी ही सुबह हुई सभी के सुप्रभात के संदेश देख अंतर्मन को एक तृप्ति सी

अखंड भारत – अविभाजित भारत की परिकल्पना

June 13, 2023

अखंड भारत – अविभाजित भारत की परिकल्पना नए संसद भवन में अखंड भारत के नक्शे नुमा म्युरल आर्ट को लेकर

दूसरों कि थाली का खाना पसंद

June 13, 2023

दूसरों कि थाली का खाना पसंद, दूसरों को भी आपकी थाली का खाना पसंद अरे-अरे क्यों नाराज़ होते अगर कोई

विश्व बालश्रम निषेध दिवस 12 जून 2023 पर विशेष

June 11, 2023

विश्व बालश्रम निषेध दिवस 12 जून 2023 पर विशेष – 17 वां वार्षिक वेबीनार आयोजित आओ बच्चों को बालश्रम की

बेस्ट सेक्स के लिए अच्छे हैं ये सुपर फूड और गोल्डन रूल्स

June 11, 2023

बेस्ट सेक्स के लिए अच्छे हैं ये सुपर फूड और गोल्डन रूल्स सेक्स और रोमांस वैवाहिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग

दूसरे देशों मे दी जाने वाली सज़ा पर जरा गौर फरमाए- लव जिहाद

June 11, 2023

दूसरे देशों मे दी जाने वाली सज़ा पर जरा गौर फरमाए- लव जिहाद आज बहुत ही गहरी सोच मे डूबी

PreviousNext

Leave a Comment