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ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था मानव बुद्धिजीवी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन है 21वीं सदी में भारत की युवा जनसांख्यिकीय उसकी सबसे …


ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था

मानव बुद्धिजीवी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन है

21वीं सदी में भारत की युवा जनसांख्यिकीय उसकी सबसे बड़ी ताकत है – राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 न्यू इंडिया की आधारशिला – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर किसी भी देश की आर्थिक सुदृढ़ता का पैमाना उसकी अर्थव्यवस्था से लगाया जा सकता है हालांकि अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में उसके मानकों के आधार पर उसका आकलन किया जाता है।अर्थशास्त्र में मुख्यतः तीन प्रकार की अर्थव्यवस्थाएं पढ़ाई जाती हैं- प्राइमरी सेक्टर (कृषि आधारित), सेकंडरी सेक्टर (उद्योग आधारित) तथा इन दोनों को मानव संसाधन द्वारा संचालित करने वाली सर्विस सेक्टर इकॉनमी। विगत दो दशकों से भी कम समय में उभरने वाला नवीनतम क्षेत्र है- ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था। चूंकि आज हम ज्ञानआधारित अर्थव्यवस्था की बात कर रहे हैं इसीलिए यहां यह रेखांकित करना जरूरी है कि मानव बुद्धिजीवी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन है और हमारा भारत देश एक युवा राष्ट्र है 21वीं सदी में भारत की युवा जनसांख्यिकीय उसकी सबसे बड़ी ताकत है और हमारी वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को तीव्रता से गति देने के गुण समाहित हैं। सबसे बड़ी बात हमारे पीएम का भी ग्रीन प्रोजेक्ट 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का है इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था पर चर्चा करेंगे।
साथियों बात अगर हम कौशलता विकास की करें तो कुछ वर्षों से कौशलता विकास के बारे में बहुत विशालता से सुन रहे हैं और पूरे देश में कौशलता विकास का अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है जिसमें हुनर हाट, वेबीनार, प्रदर्शनियां इत्यादि के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का ही एक हिस्सा है।ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था को कहा जाता है जिसमें वृद्धि का मुख्य स्रोत खेत अथवा खनिज नहीं बल्कि ज्ञान होता है। यह अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से ज्ञान एवं सूचना के उत्पादन, वितरण और उपभोग पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए देखा जाए तो भारत के कुछ नगरों जैसे दिल्ली, कोटा और वाराणसी में कोचिंग सेंटरों की भरमार है। यहाँ की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा भाग ज्ञान के क्रय-विक्रय पर आधारित है।
साथियों बात अगर हम सूचना प्रौद्योगिकी की करें तोबेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगर सूचना प्रौद्योगिकी के केंद्र बन चुके हैं जहाँ ज्ञान आधारित सेवायें (कंसल्टेंसी इत्यादि) ऑनलाइन प्रदान की जाती हैं। विभिन्न विषयों पर पुस्तकें और शोध आधारित जर्नल प्रकाशित करने वाली संस्थाएं और प्रकाशन कम्पनियाँ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का ही अंग हैं। ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में ज्ञान एक उत्पाद के रूप में खरीदा और बेचा जाता है। इसलिए हमको भी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में समुचित निवेश करने की आवश्यकता है और कई स्तर पर रणनीतियाँ बनानी अनिवार्य हैं ताकि ज्ञान के क्षेत्र में मौलिकता का सृजन हो। भारत को एक सुदृढ़ ज्ञान आधारित व्यवस्था बनाने के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय स्तरपर भिन्न रणनीतियाँ अपनाने की आवश्यकता है।
साथियों बात अगर हम ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के स्त्रोतों की करे तो, इस प्रकार शोध एवं विकास के संस्थान, आईटी कम्पनियाँ, शिक्षक, प्राध्यापक, लेखक, पत्रकार, वैज्ञानिक, कंसल्टेंसी प्रदान करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ ये सभी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में कार्य करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी युग में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्थाओं की उन्नति तीव्र गति से हुई है किंतु भारत की ज्ञान-विज्ञान पर आधारित प्रगति के इस युग में अपेक्षाकृत धीमी गति है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत की शिक्षण व्यवस्था मौलिक ज्ञान के उत्पादन की अपेक्षा डिग्री धारकों का उत्पादन अधिक कर रही है जिसका समाधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में किया गया है। बाजार में जब कोई वस्तु क्रय-विक्रय हेतु उपलब्ध होती है तो उसके बिकने की संभावना कई कारकों पर निर्भर होती है जिसमें गुणवत्ता, मार्केटिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था इत्यादि महत्वपूर्ण हैं। भारत के बारे में सामान्य धारणा रही है कि यहाँ उत्पन्न होने वाले ज्ञान में मौलिकता और गुणवत्ता की भारी कमी है। ज्ञान की गुणवत्ता इस पर निर्भर करती है कि उसे उत्पन्न करने वाला कितना प्रतिभाशाली है।
साथियों ध्यान देने वाली बात यह है कि कक्षा बारह तक केविद्यालय ज्ञान के उत्पादक नहीं होते जबकि विश्वविद्यालय और उच्च शोध संस्थान मौलिक ज्ञान के उत्पादन हेतु ही बने हैं। भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को पुष्ट करने के लिए वर्तमान पीएम की सरकार ने स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक ऐसे अनेक प्रयास किये हैं जिन्हें परिवर्तित होते भारत अथवा ‘न्यू इंडिया’ की आधारशिला के रूप में देखा जा सकता है।
साथियों बात अगर हम माननीय केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री के ऑस्ट्रेलिया मेलबर्न में दिनांक 23 अगस्त 2022 के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने की करें तो पीआईबी के अनुसार, उन्होंने आज मेलबर्न के डॉकलैंड्स में कंगन इंस्टीट्यूट में ‘वेट: भविष्य के लिए कौशल विकसित करने हेतु नीति वार्ता’ में विक्टोरियन स्किल्स अथॉरिटी केसीईओ बेंडिगो कंगन इंस्टीट्यूट की सीईओ और ऑस्ट्रेलियाई कौशल इकोसिस्टम के लीडर्स के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान चर्चाएं युवाओं को भविष्य के कौशल से लैस करने, उन्हें रोजगार से जोड़ने और कौशल परिणामों में सुधार करने,उद्योग व अकादमिक संबंधों को मजबूत करने और कौशल संबंधी जरूरतों के लिए एक चुस्त प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए भारत में ऑस्ट्रेलियाई कौशल मानकों और प्रमाणन ढांचे को इस्तेमाल करने की क्षमता के इर्द गिर्द केंद्रित रहीं।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के कौशल संस्थानों के साथ गठजोड़ करने में भारत की रुचि व्यक्त की। उन्होंने कौशल विकास में आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और ऑस्ट्रेलिया में कई अवसरों के लिए भारत के युवाओं को कौशल युक्त करने की दिशा में, भारत के साथ साझेदारी करने की ऑस्ट्रेलिया की उत्सुकता की सराहना भी की। भारत और ऑस्ट्रेलिया के पास कौशल आकलन, योग्यता और कौशल मान्यता, पाठ्यक्रम विकास, कार्यशक्ति विकास के क्षेत्रों में एक साथ काम करने के कई अवसर हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दोनों देशों में भविष्य के लिए तैयार कार्यशक्ति, वैश्विक अवसरों के ताले खोलने के लिए हमें बेहतर तरीके से तैयार करेगी। उन्होंने दोनों देशों को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्थाओं में तब्दील करने के लिए एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं को सीखने का आह्वान किया।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें दो हम पाएंगे कि ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था मानव बुद्धिजीवी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन है। 21वीं सदी में भारत की युवा जनसांख्यिकीय
उसकी सबसे बड़ी ताकत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 न्यू इंडिया की आधारशिला है।

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Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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