Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल …


जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगा
आज हसे दुनिया चाहे कल वैसा ही देख भरेगा।।

मेरी खामोशी को दुनिया , मेरी कमजोरी मान लेना
वक्त , वक्त कि बात है , जो बोएगा वही पाके रहेगा।।

आज लाठी तेरे हाथ में, होगी कल लाठी मेरे हाथ में
यही तो वक्त का चक्र है , जो फिर-फिर चलता रहेगा।।

सच्च कि जुबां कब तलक कोई बंद कर सकता
सच्च कड़वा ही सही पर , सच्च सदैव विजयी रहेगा।।

उसके दर पर जो श्रद्धा संग शीश झुकाता मानव
उसके पताके में जीत का ही रंग , रब ही तो भरेगा।।

दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगा।।२।।

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

नववर्ष मंगल भावना | navvarsh mangal bhavna

December 31, 2022

नववर्ष मंगल भावना नव वर्ष में कुछ यूं जहां में प्रेम का विस्तार हो,ना कोई भूखा हो शहर में बीमार

अलविदा 2022 |सोचो आगे क्या करना है ?

December 31, 2022

अलविदा 2022 |सोचो आगे क्या करना है ? सोचो आगे क्या करना है ?सोचो कैसे आगे बढ़ना है ?सोचो क्या

कविता अहमियत| kavita ahmiyat

December 30, 2022

अहमियत वक़्त की अहमियत को समझो,यह न वापिस आएगा।छूट जाएगा जीवन में बहुत कुछ,तू केवल पछताएगा।अहमियत दे रिश्तों को बन्दे,यही

मंगल हो नववर्ष| navvarsh par kavita

December 30, 2022

मंगल हो नववर्ष मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार। नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।। बाँट

तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ| Tumse ab mai kya chupaun

December 30, 2022

 तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ , सोचता हूँ यह भी मैं। किस्सा खत्म ही यह

मनोविकार | manovikar

December 29, 2022

 मनोविकार उठता जब शत्रु मनोविकार फ़ैल भयंकर दावानल-सा।  काम, क्रोध, लोभ, मोह से संचित पुण्यों को झुलसा। मन से उपजा

PreviousNext

Leave a Comment