Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कविता-जो अब भी साथ हैं

परिवार के अन्य सदस्य या तो ‘बड़े आदमी’ बन गए हैं या फिर बन बैठे हैं स्वार्थ के पुजारी। तभी …


परिवार के अन्य सदस्य
या तो
‘बड़े आदमी’ बन गए हैं
या फिर
बन बैठे हैं स्वार्थ के पुजारी।

तभी तो
कोई नहीं ठहरता
उन कमरों के पास
जहाँ
धीरे-धीरे
मौन में बदल रही है
दादा-दादी की पुकार।

न कोई आता है
तन्हाई का साथी बनने
न पूछता है
स्वास्थ्य का हाल
न किसी को याद रहता है
उनके स्वाद की दुनिया।

मैं…
अब और नहीं कह पाऊँगा
उन भावनात्मक स्थितियों के बारे में
मैंने उन्हें जिया है
पर जस का तस
शब्दों में ढाल नहीं सकता।

पर
मैं जो कर सकता हूँ,
वह मैं करता हूँ—
हर दिन
थोड़ी देर सही
पर बैठता हूँ
अपने वृद्ध दादा-दादी के पास।

कभी उनकी हथेली थामकर
कभी बस चुपचाप पास बैठकर
समय को थाम लेता हूँ
उस मोड़ पर
जहाँ दुनिया ने
उन्हें अकेला छोड़ दिया।

-प्रतीक झा ‘ओप्पी’ (उत्तर प्रदेश)
Email Id: Kvpprateekjha@gmail.com


Related Posts

Pushp by priya dewangan

August 25, 2021

“पुष्प” लाली पीली बैगनी, बागों खिलते फूल।उपवन में रहते सभी, कलियाँ जाती झूल।।कलियांँ जाती झूल, प्रेम की बात बताती।अपनी खुशबू

Anuttarit sawal by sarla soni ( Meera krishna)

August 25, 2021

“अनुत्तरित सवाल” सवाल ये नहीं कि कौन किस ख़ेमे के साथ हैसवाल ये है किकौन देश के अपमान पर मौन

Bandhan na rahega koi by indu kumari

August 25, 2021

 बंधन न रहेगा कोई मीरा के श्याम राधा के संग रहे हमेशा मीरा को नहीं मलाल हर पल जोहती बाट

Sabse lachar prani byJitender Kabir

August 25, 2021

 सबसे लाचार प्राणी अच्छा कोई काम करे  अगर उनका दल तब तो जायज है फिर भी प्रशंसा के अतिरेक में

Koi ek bhi mil jaye by Jitendra Kabeer

August 25, 2021

 कोई एक भी मिल जाए ऐसे समय में  जबकि चाहत आम है बहुत लोगों में कि सबके दिलों पर वो

Aisi bahano ki kaun sune by Jitendra Kabeer

August 25, 2021

 ऐसी बहनों की कौन सुनें? रक्षाबंधन के अवसर पर असमंजस में रहती हैं वो स्त्रियां ब्याही गई हैं जो किसी

Leave a Comment