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Jitendra_Kabir, poem

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र ‘कबीर’

जीवन है तो जिए जाना बहुत तकलीफ़ देता है अपने किसी करीबी काइस दुनिया से असमय चले जाना, किसी हंसते …


जीवन है तो जिए जाना

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र 'कबीर'
बहुत तकलीफ़ देता है

अपने किसी करीबी का
इस दुनिया से असमय चले जाना,

किसी हंसते – मुस्कुराते जीवन का
अचानक मृत्यु से छले जाना,

कल्पना भी न की हो
जिस मंजर की कभी,
घटता देख उसे सामने कुछ भी न कर पाना,

नियति के हाथों होकर मजबूर
आंसुओं में डूब जाना,

ऐसे विकट समय में हमें खुद को
बार बार पड़ेगा याद दिलाना
कि जाने वाला मुक्त हुआ है
जिंदगी के झंझट और तकलीफों से,

पीछे रहने वालों को है अभी तक
इसी दुनिया में निबाहना,

वो गया है आज
तो हम सबको भी एक न एक दिन
इस दुनिया से पड़ेगा जाना,

हमेशा के लिए कोई नहीं रहा यहां पर,
यूं समझें कि यह शरीर
हमारी आत्मा की बहुत लम्बी यात्रा के बीच
विश्राम का है एक अस्थाई ठिकाना,

सोचें हम यह भी
कि जाने वाला भी कहां चाहता होगा
हमारा अनंत काल तक यूं दुख मनाना,
यादें रुलाएंगी कुछ दिन जरूर
लेकिन सीने में ही पड़ेगा उनको दफनाना,
समय मरहम है, भरेगा जख्म धीरे धीरे,
आखिरकार जीवन को है
फिर से पटरी पर आना,

मौत अटल है
अपने वक्त पर तय है उसका आना,
लेकिन उसके आने तक
हमें दुनिया में है अपना किरदार निभाना,
जीवन है जब तलक उसे जिए ही जाना।

जितेन्द्र ‘कबीर’


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