Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र ‘कबीर’

जीवन है तो जिए जाना बहुत तकलीफ़ देता है अपने किसी करीबी काइस दुनिया से असमय चले जाना, किसी हंसते …


जीवन है तो जिए जाना

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र 'कबीर'
बहुत तकलीफ़ देता है

अपने किसी करीबी का
इस दुनिया से असमय चले जाना,

किसी हंसते – मुस्कुराते जीवन का
अचानक मृत्यु से छले जाना,

कल्पना भी न की हो
जिस मंजर की कभी,
घटता देख उसे सामने कुछ भी न कर पाना,

नियति के हाथों होकर मजबूर
आंसुओं में डूब जाना,

ऐसे विकट समय में हमें खुद को
बार बार पड़ेगा याद दिलाना
कि जाने वाला मुक्त हुआ है
जिंदगी के झंझट और तकलीफों से,

पीछे रहने वालों को है अभी तक
इसी दुनिया में निबाहना,

वो गया है आज
तो हम सबको भी एक न एक दिन
इस दुनिया से पड़ेगा जाना,

हमेशा के लिए कोई नहीं रहा यहां पर,
यूं समझें कि यह शरीर
हमारी आत्मा की बहुत लम्बी यात्रा के बीच
विश्राम का है एक अस्थाई ठिकाना,

सोचें हम यह भी
कि जाने वाला भी कहां चाहता होगा
हमारा अनंत काल तक यूं दुख मनाना,
यादें रुलाएंगी कुछ दिन जरूर
लेकिन सीने में ही पड़ेगा उनको दफनाना,
समय मरहम है, भरेगा जख्म धीरे धीरे,
आखिरकार जीवन को है
फिर से पटरी पर आना,

मौत अटल है
अपने वक्त पर तय है उसका आना,
लेकिन उसके आने तक
हमें दुनिया में है अपना किरदार निभाना,
जीवन है जब तलक उसे जिए ही जाना।

जितेन्द्र ‘कबीर’


Related Posts

इश्क की इंतहा-जयश्री बिरमी

January 16, 2022

इश्क की इंतहा प्यार हो ही जाता हैं गर हो जुत्सजूजब इश्क हो ही जाता हैं रूबरूजब हो जानिब वफा–ए–यारक्यों

आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ?

January 16, 2022

 आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ? हाल ही में आपने सुना होगा सोशल मीडिया पर

दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो

January 16, 2022

दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो,दिन ढले तो

सृष्टि में माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं

January 16, 2022

कविता सृष्टि में माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं सृष्टि में माता-पिता से बढ़कर कोई नहींहम क्या जाने हमारे लिए हमारी

पांच राज्यों में चुनाव तारीखों का ऐलान

January 16, 2022

कवितापांच राज्यों में चुनाव तारीखों का ऐलान हुआ हित धारकों का इंतजार खत्म हुआ पांच राज्यों में चुनाव तारीखों का

भावनाओं को व्यक्त-डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

भावनाओं को व्यक्त! क्यों होते हैं हम स्वयं के साथ सख्त,चलो करें, अपनी भावनाओं को व्यक्त,चिकित्सक भी होता है कभी

Leave a Comment