Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

जीवन में द्वंद का समापन!

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या …


जीवन में द्वंद का समापन!

जीवन में द्वंद का समापन!

कभी पाऊं खुद को अनजान,
तो कभी महान,
कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,
मुझ में हे अच्छाई या बहुत सी बुराई,
कभी आशा तो कभी निराशा,
कभी अस्वस्थ तो कभी मस्त,
कभी उदय तो कभी अस्त,
कहीं बड़ा तो कहीं छोटा,
कभी सच्चा तो कभी खोटा,
कभी अभिमान तो कभी नम्रता,
कभी क्रोधित तो कभी भरपूर क्षमता,
कभी मन में विष तो कभी अमृत,
कुछ आवश्यक तो कुछ अनावश्यक,
कुछ उचित तो कुछ अनुचित,
जिंदगी लगे अभिशाप तो कभी कभी वरदान,
कभी हर पल भारी तो कभी लगे मूल्यवान,
कहीं आजादी तो कहीं गुलामी,
कई हम राजा तो कहीं कोई और स्वामी,
कौन यह अपना कौन है पराया,
कभी अपनों ने साथ छोड़ा और परायो ने अपनाया,
कुछ जटिल तो कुछ सरल,
कहीं खंडहर तो कहीं महल,
कभी क्रांति तो कभी शांति,
कभी लाभ तो कभी हानि,
कहीं अग्नि तो कहीं पानी,
कभी हम सुख में तो कभी हम दुख में,
कभी सर उठा के, तो कभी चले झूक के,
कभी अमीरी तो कभी गरीबी,
द्वंद हमारे मन में आए कभी भी,
तो यह जान लेना है जरूरी,
एक दूसरे से इनका है वजूद,
हम सबके जीवन में यह है मौजूद,
एक दूसरे के बिना इनकी परिभाषा अधूरी,
वक्त वक्त पर इनका का एहसास भी है जरूरी,
जिंदगी इन एहसासों के बिना है नीरस,
तो जरूरी है स्वयं में हो धीरज,
दुख के बिना सुख कि आस नहीं,
गर्मी के बिना शीतलता का एहसास नहीं,
चलो अपनाए जीवन की हर परिस्थिति,
और भूले ना हम यहां पर है कुछ वक्त के अतिथि!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं

February 7, 2022

कविता हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हमारी किस्मत खुली भारतीय सभ्यता संस्कृति हमें मिली हमारी पीढ़ियों की

ई-कचरा

February 7, 2022

ई-कचरा! कंप्यूटर और उससे संबंधित अन्य उपकरण,टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन से जुड़े उत्पादन,उपयोग से बाहर होने पर कहते हैं

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

Leave a Comment