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जीवन की यात्रा!

जीवन की यात्रा! उम्मीद के दीए को जलाकर,दर्द और तकलीफ को भूलाकर,मुश्किलों को सुलझा कर,हिम्मत को खुद में समाकर,जीते जा …


जीवन की यात्रा!

उम्मीद के दीए को जलाकर,
दर्द और तकलीफ को भूलाकर,
मुश्किलों को सुलझा कर,
हिम्मत को खुद में समाकर,
जीते जा तू जीते जा,
जीवन की यात्रा को पूरा कर!!

जोश से स्वयं को चला कर,
आलस्य को हटाकर,
परिश्रम से कमा कर,
अपने फर्ज को अदा कर,
आगे आगे तू बढ़ते जा,
जीवन की यात्रा को पूरा कर!!

खुद पर भरोसा सदा कर,
काबिलियत को आजमा कर,
ह्रदय में नम्रता बसाकर,
कुछ ना रह जाए अधूरा,
जीवन की यात्रा को पूरा कर!!

About author

डॉ. माध्वी बोरसे!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


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