Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 बेंचों के लिए अधिसूचना जारी

जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 बेंचों के लिए अधिसूचना जारी – विवाद सुलझाने में तेजी आएगी व्यापारियों जीएसटी करदाताओं के …


जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 बेंचों के लिए अधिसूचना जारी – विवाद सुलझाने में तेजी आएगी

जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 बेंचों के लिए अधिसूचना जारी

व्यापारियों जीएसटी करदाताओं के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल सस्ते व शीघ्र न्याय का सुनहरा अवसर साबित होगा

जीएसटी विवादों में अपीलेट ट्रिब्यूनल दूरगामी विवाद निवारण प्रणाली खड़ी करने व समय, पैसे की बचत करने में मील का पत्थर साबित होगी – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज भारत 142 करोड़ जनसंख्या वाला दुनियां का सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश हैइसलिए ही पूरी दुनियां की नजरे भारत पर लगी रहती है कि इतनी बड़ी भारी भरकम जनसंख्या वाला देश अपनी आंतरिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यानें बाहरी स्तरपर कैसे बैलेंस रखकर सफलताओं के झंडे गाड़ते हुए सुविधाओं से दुनियां की पांचवी अर्थव्यवस्था बनाकर अब तीसरे पायदान की ओर बढ़ चुका है एवं वह दिन दूर नहीं होगा जब विश्व की प्रथम अर्थव्यवस्था पर आकर खड़ा होगा, जिसके लिए कुछल नेतृत्व, आंतरिक व बाहरी कमान, दृढ़ संकल्प रणनीतियों के साथ संचालित करना, कोई आसान काम नहीं है परंतु भारत सब करके दिखा रहा है, यही कारण है कि आज दुनियां में भारत की प्रतिष्ठा रुतबा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अगर 142 करोड़ जनसंख्या है तो स्वाभाविक रूप से अनेक क्षेत्रों को नियमित विनियमित करना नेतृत्व का चैलेंजिंग वाला काम है। इन क्षेत्रों में अगर हम एक न्याय क्षेत्र को देखें तो इतनी भारी भरकम जनसंख्या के लिए सिविल, फौजदारी, फैमिली कोर्ट सहित हर क्षेत्र के लिए अलग अपीलेट ट्रिब्यूनल की नियुक्ति करना होता है इस सोच को आगे बढ़ते हुए 2017 में लगाए गए जीएसटी को 6 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अब् जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल का नोटिफिकेशन आज दिनांक 15 सितंबर2023 को जारी किया गया जिससे व्यापारियों जीएसटी करदाताओं में खुशी की लहर छा गई है, क्योंकि इसके पहले विवाद को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाती थी जिसके कारण करदाताओं को समय व पैसा अपेक्षाकृत अधिक लगता था और न्यायालयपर भी अनावश्यक बोझ बढ़ता था जिसका समाधान अपीलेट ट्रिब्यूनलके रूप में किया गया है, जो 28 राज्यों 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 31 अपीलेट बनाने की अधिसूचना जारी की गई। चूंकि इस अधिसूचना से व्यापारिक और जीएसटी करदाताओं के सीधे हित जुड़े हैं इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, जीएसटी विवादों में अपीलीय ट्रिब्यूनल दूरगामी विवाद निवारण प्रणाली खड़ी करने में समय व पैसों की बचत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
साथियों बात अगर हम दिनांक 15 सितंबर 2023 को जारी जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की अधिसूचना की करें तो, 6 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने जीएसटीएपीलेट ट्रिब्यूनल स्थापित करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जीएसटी एपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 राज्य पीठों की स्थापना की जाएगी। बता दें मार्च में संसद ने वित्त विधेयक में बदलाव को मंजूरी दी थी, ताकि जीएसटी से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना हो सके। वर्तमान में,कर अधिकारियों के फैसले से असंतुष्ट करदाताओं को संबंधित उच्च न्यायालयों में जाना पड़ता है।नोटिफिकेशन के मुताबिक यूपी में सबसे ज्यादा 3 बेंच होंगी। वहीं गुजरात कर्नाटक, राजस्थान,तमिलनाडु और महाराष्ट्र में 2-2 बेंच होंगी। अन्य जगहों पर सिर्फ एक बेंच होगी। दिल्ली को छोड़कर ज्यादातर केंद्र शासित प्रदेशों में कोई स्वतंत्र पीठ नहीं है। उच्च न्यायालय पहले से ही लंबित मामलों के बोझसे दबे हुएहैं और उनके पासजीएसटी मामलों से निपटने के लिए कोई विशेष बेंच नहीं है। इसलिए जीएसटी से जुड़े विवादों की समाधान प्रक्रिया में काफी ज्यादा समय लग जाता है।2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स पूरे भारत में लागू किया गया था, लेकिन शिकायतों के निपटारे के लिए कोई उचित एपीलेट मैकेनिज्म नहीं था। ऐसे में जुलाई 2022 में जीएसटी ट्रिब्यूनल्स की स्थापना को लेकर मंत्रियों के एक समूह का गठन किया गया था।सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार और जीएसटी परिषद को बिना किसी देरी के जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने का आदेश दिया था। जीएसटी कानून को पारित किए हुए छह साल बीत चुके हैं लेकिन जीएसटीएटी का गठन नहीं किया गया था। इसकी अनुपस्थिति में करदाताओं को उच्च न्यायालयों में रिट याचिकाओं का सहारा लेना पड़ रहा था, जिसने करअनुपालन प्रणाली में अनिश्चितता को जन्म दिया था। हालांकि जीएसटी कानून को लागू किए जाने के तुरंत बाद ही जीएसटीएटी को अधिसूचित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद सितंबर 2019 में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा आगे की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के बाद, इसके गठन की प्रक्रिया वहीं थम गई। इस मामले में केंद्रीय मुद्दा जीएसटीएटी पीठ की सदस्यता का था। प्रस्तावित रूप से, जीएसटीएटी की हर पीठ में तीन सदस्य नियुक्त किए जाने थे, केंद्र और राज्य सरकारों के दो प्रतिनिधि, और कानून यान्यायिक सेवा में अनुभव वाले एक सदस्य।इस विषय पर अब तक विकसित हुई न्यायिक समझ के अनुसार, उन मामलों में जहाँ न्यायिक क्षेत्राधिकार न्यायाधिकरणों को सौंपा जाता है वहाँ न्यायाधिकरण पीठ की सदस्यता इस तरह होनी चाहिए ताकि राज्य की कार्यपालक शाखा के प्रतिनिधियों की संख्या, न्यायिक सेवा के प्रतिनिधियों से ज़्यादा न हो। इसका उद्देश्य विवाद निवारण प्रणाली की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है क्योंकि इस तरहके न्यायाधिकरणों के सामने आने वाले मामले अक्सर सरकारी विभागों के खिलाफ दायर किए गए होते हैं। पिछले छह वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारें इस कश्मकश को दूर करने में विफल रही थी। वकीलों को न्यायिक सदस्यों के दायरे से बाहर रखा जा सकता है या नहीं, यह मुद्दा भी इस न्यायिक मामले के तहत विचाराधीन था।
साथियों बात अगर हम अपील ट्रिब्यूनल के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर गठन की करें तो बीते वर्ष जुलाई में बनाए गए ग्रुप आफ मिनिस्टर्स में कुल छह सदस्य थे जिनमें अध्यक्ष के तौर पर हरियाणा के डिप्टी सीएम के अलावा आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री, गोवा के उद्योग मंत्री, राजस्थान के कानून एवं वैधानिक मामलों के मंत्री, उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री और ओडिशा के वित्तमंत्रीशामिल थे। ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ने जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन को लेकर चर्चा करने के लिए कई बैठकें की और केंद्रीय वित्तमंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर सभी राज्यों में जीएसटी ट्रिब्यूनल की न्यायपीठ स्थापित करने के आदेश जारी किए हैं। बता दें कि 28 जून को जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी ट्रिब्यूनल बनाने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी थी।
साथियों बात अगर हम जीएसटीएटी को व्यापारिक व करदाताओं के लिए एक सुनहरे अवसर के रूप में देखने की करें तो, सुनहरा अवसर इस कश्मकश में केंद्र और राज्य सरकारें समाधान पर पहुंची है जीएसटीएटी के गठन को डिजिटल रूप से स्वदेशी, अगली पीढ़ी की दूरगामी विवाद निवारण प्रणाली खड़ी करने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसके ज़रिए देश के अन्य न्यायाधिकरणों और न्यायालयों के लिए नए मापदंड स्थापित किए जा सकते हैं। नए जीएसटीएटी को जीएसटीएन द्वारा डाली गई बुनियाद से शुरू किया जाना चाहिए, जो अब बड़ी पैमाने पर डेटा संभालने वाला, एक लाइव और स्थिर प्लेटफॉर्म बन चूका है। करदाताओं के अधिकारों और केंद्र व राज्य सरकारों के कर-संबंधी हितों की रक्षा करने के लिए, अगली पीढ़ी के तकनीकी ढांचे पर टिका, एक मज़बूत और नियम-आधारित न्यायाधिकरण बनाया जाना एक अनिवार्य कदम है। जीएसटी द्वारा लाए गए आमूलचूल परिवर्तनों को और इसके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे भरपूर प्रयासों को देखते हुए, यह स्वाभाविक है कि आने वाले वर्षों में इसको लेकर मामलों मुकदमों में तेज़ी आएगी। एक प्रभावी न्यायाधिकरण स्थापित करने का यही सही समय है, इससे पहले की मामले-मुकदमों की संख्या नियंत्रण से बाहर हो जाए। दूसरे न्यायाधिकरणों और न्यायालयों के अनुभवों से सबक सीखना भी ज़रूरी है, ताकि उनकी गलतियों को दोहराया न जाए।
साथियों बात अगर हम जीएसटी सुधारो, करदाताओं का आधार बढ़ाने, नियम कड़े करने की करें तो, मीडिया के अनुसार विभाग अभी करदाताओं का आधार बढ़ाने के लिये काम कर रहा है। फिलहाल कॉरपोरेट इनकम टैक्स देने वालों में से सिर्फ 40 फीसदी ही जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं, ऐसे में विभाग जीएसटी में पंजीकृत कंपनियों की संख्या बढ़ाने के उपायों पर गौर कर रहा है, इसके लिए कॉरपोरेट इनकम टैक्स देने वालों के डेटाबेस का अध्ययन किया जा रहा है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ियों की संभावनाओं को देखते हुए, कुछ कंपनियों नियमों का दुरुपयोग कर रही हैं, ऐसे में पंजीकरण के नियमों को कड़ा बनाने पर विचार करना समय की मांग है। फर्जी पंजीकरण को पकड़ने के लिए केंद्र और राज्यों के कर अधिकारी मिलकर अभियान चला रहे हैं, इस अभियान में 13,900 करोड़ रुपये की चोरी से जुड़े 45,000 फर्जी जीएसटी पंजीकरण जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा, अधिकारियों ने 1,430 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत तरीके से लाभ लेने को भी रोका है। बता दें कि अभी जीएसटी के तहत 1.39 करोड़ कंपनियां पंजीकृत हैं। यह एक जुलाई, 2017 को जीएसटी की शुरुआत के समय की संख्या के मुकाबले लगभग दो गुणा है। इस दौरान हर महीने का औसत मासिक जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ा है। जहां 2017-18 में यह 89,885 करोड़ रुपये रुपये था, वह 2022-23 में बढ़कर 1.50 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।चालू वित्त वर्ष में अब तक औसत कलेक्शन 1.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की 31 बेंचों के लिए अधिसूचना जारी – विवाद सुलझाने में तेजी आएगी।व्यापारियों जीएसटी करदाताओं के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल सस्ते व शीघ्र न्याय का सुनहरा अवसर साबित होगा।जीएसटी विवादों में अपीलेट ट्रिब्यूनल दूरगामी विवाद निवारण प्रणाली खड़ी करने व समय, पैसे की बचत करने में मील का पत्थर साबित होगी।

About author

kishan bhavnani

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 

Related Posts

Hindi divas 14 september lekh by Mamta Kushwaha

September 13, 2021

हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर   जैसा की हम सभी जानते है हिन्दी दिवस प्रति वर्ष १४ सितम्बर को मनाया जाता हैं

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Jeevan aur samay chalte rahenge aalekh by Sudhir Srivastava

September 12, 2021

 आलेख        जीवन और समय चलते रहेंगें              कहते हैं समय और जीवन

Badalta parivesh, paryavaran aur uska mahatav

September 9, 2021

बदलता परिवेश पर्यावरण एवं उसका महत्व हमारा परिवेश बढ़ती जनसंख्या और हो रहे विकास के कारण हमारे आसपास के परिवेश

Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai

September 9, 2021

 Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai जंगल स्वतंत्रता का एक अद्वितीय उदाहरण है, जहां कोई नियम नहीं , जिसकी पहली

Leave a Comment