Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Virendra bahadur

जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती | jillian haslam

जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती भारत की आजादी के बाद ज्यादातर अंग्रेज …


जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती

जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती | jillian haslam

भारत की आजादी के बाद ज्यादातर अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए थे। जो थोड़े रह गए थे, उनमें एक हैं रस्किन बांड। वह जानेमाने लेखक हैं। उनके पिता उब्रे एलेक्जेंडर बांड राॅयल एयरफोर्स, इंडिया में अधिकारी थे। उनके बेटे रस्किन बांड भारत में ही रह गए थे। दूसरे हैं बालीवुड के जानेमाने एक्टर टाॅम ऑल्टर, जो बहुत सुंदर हिंदी बोलते थे। पर यहां आज हम ऐसी ही ब्रिटिश परिवार की भारत में रह गई महिला परिवार की बात करने जा रहे हैं, जो इस समय ब्रिटेन में रह रही हैं। पर वह अपने जन्मस्थान कोलकाता को भूली नहीं हैं। उनका नाम है जिलियन हसलम। वह समय आजादी के पहले का था। जिलियन के पिता ब्रिटिश सेना में थे। 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो सभी अंग्रेज भारत से वापस ब्रिटेन चले गए थे। उन्हें वापस जाने के लिए एक साल का समय दिया गया था। परंतु जिलियन का परिवार ब्रिटेन वापस नहीं गया। बात यह थी कि उन दिनों जिलियन के पिता की तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी। वह सेना के अस्पताल में भर्ती थे। लंबे समय के बाद वह ठीक हुए। पर उन्होंने ब्रिटेन वापस जाने के बारे में कभी सोचा नहीं। वह कोलकाता में ही स्थाई हो गए थे। 1970 में जिलियन का जन्म भी कोलकाता में ही हुआ था। इसके पहले इस परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद इस परिवार ने कभी ब्रिटेन वापस जाने के बारे में नहीं सोचा। जिलियन के पिता दोबारा बीमार पड़ गए। उनके परिवार की हालत इतनी खराब हो गई कि उनके पास रहने के लिए घर भी नहीं रहा। जिलियन का कहना है कि उनके परिवार ने पड़ोसियों के घर में शरण ली। उनकी मां को छोटे-मोटे काम करने पड़े। कभी-कभी उन लोगों को भूखे भी रहना पड़ा था।
बात यह थी कि जिलियन जब पांच साल की थी, तब उनके पिता को डमडम में टीचर की नौकरी मिली थी। वह परिवार के साथ वहां रहने आ गए थे। रहने के लिए दो कमरे का मकान मिला था। सभी खुश थे। तभी उनकी जुड़वां बहनें बीमार हो गईं। जिलियन का कहना है कि वे कुल मिला कर 12 भाई-बहन थे। परिवार बड़ा था और आमदनी कम थी। उनकी जुड़वां बहनो की मौत हो गई थी। उन बहनों को दफनाने के लिए काॅफिन खरीदने का भी पैसा उस समय उन लोगों के पास नहीं था। समय बीतता रहा। एक दिन किसी ने उनके पिता से कहा कि तुम्हारी बड़ी बेटी डोना का जीवन खतरे में है। इसलिए तुम्हें यह जगह छोड़ देनी चाहिए। उस समय उनकी बहन डोना मात्र 13 साल की थी। वह बहुत सुंदर थी। उनसे कहा गया था कि किसी भी समय उसका अपहरण हो सकता है। यह सुन कर सभी डर गए और डमडम छोड़कर कोलकाता वापस आ गए।
जिलियन का कहना है, ‘मेरे पिता की तबीयत फिर खराब हो गई। उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सिस्टर चैरिटी नाम की संस्था ने हमारी मदद की। समय के साथ हमारे पिता फिर ठीक हो गए। परंतु ब्रिटेन वापस जाने के बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं। वह हमेशा के लिए कोलकाता में ही रहना चाहते थे। कुछ समय बाद हम कोलकाता की किडरपोर नाम की बस्ती में रहने आ गए। शुरुआत के दिनों में तो इस बस्ती में बिजली और पानी भी नहीं था। उसी दौरान मेरी मां को एक बेटा पैदा हुआ, जिसका नाम नील रखा गया था।’
जिलियन और अपनी बड़ी बेटी को पिता ने सेंट थामस बोर्डिंग स्कूल में भर्ती करा दिया था। उसी बीच पिता को हार्टअटैक आया। मां ने जिलियन को छोटे भाई-बहनों की देखरेख के लिए बोर्डिंग स्कूल से वापस बुला लिया। क्योंकि मां पिता की देखभाल में व्यस्त रहती थी। घर की जिम्मेदारी संभालते हुए भी जिलियन अपनी पढ़ाई अच्छी तरह कर रही थी। पढ़ाई में वह काफी होशियार थी और परीक्षा में बहुत अच्छे मार्क्स लाती थी। वह और उसके सभी भाई-बहन भारतीय वातावरण में ही पढ़ रहे थे। होली के त्योहार पर सभी के साथ गीत गाते हुए नाचते थे। दीवाली पर पटाखे भी छोड़ते थे।
17 साल की उम्र में जिलियन दिल्ली आ गई थी। प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद उसे ब्रिटिश एम्बेसी में नौकरी मिल गई। उसी दौरान उसकी मां को कैंसर हो गया। इलाज के लिए मां को दिल्ली ले आई। पर वह बच नहीं सकी। मां की मौत के बाद छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी जिलियन ने संभाल ली। इसके बाद जिलियन को बैंक आफ अमेरिका में नौकरी मिल गई। इसके बाद उन सभी की जिंदगी बदल गई। अपनी काबिलियत के आधार पर जिलियन ने एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी से ले कर सीईओ तक के ओहदे को संभाला। उसे चैरिटी से जुड़े मामलों की जिम्मेदार सौंपी गई। पांच साल की सख्त मेहनत के बाद जिलियन को स्पेशल पैकेज मिला। इसमें से होने वाली आमदनी से काफी रकम उसने भाई-बहनों पर खर्च की। जिलियन सभी को ब्रिटेन ले गई और सभी को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
सन 2000 में दिल्ली में जिलियन ने विवाह किया। इसके बाद पति के साथ वह ब्रिटेन चली गई। नौकरी करते हुए जिलियन लोगों के कल्याण के लिए भी काम करने लगी। उसका कहना है, ‘मैंने गरीबी नजदीक से देखी है। मैं मजबूर और निस्सहाय लोगों के दर्द को समझती हूं। अब मैं समाज के लिए जीना चाहती हूं।’
सन 2010 के बाद वह अपना अधिक समय लोगों की सेवा करने में व्यतीत करने लगी। उसने अपनी आत्मकथा भी लिखी। लोगों ने उसकी आत्मकथा को बहुत पसंद किया। जिलियन का कहना है, ‘मेरे आत्मकथा लिखने का मतलब यह था कि मैं लोगों से कहना चाहती थी कि मैंने कितना दुख सहन किया। मैं लोगों से यह भी कहना चाहती हूं कि गरीबी या मजबूरी आप का रास्ता नहीं रोक सकती। मेहनत करो और हिम्मत रखो। मनोबल मजबूत रखो, एक दिन आप को सफलता जरूर मिलेगी।
ब्रिटेन में स्थाई हुई जिलियन हर साल कोलकाता आती हैं। यहां उनके तमाम पुराने मित्र हैं। उन सभी से वह मजे से हिंदी और बांग्ला भाषा में बात करती है। इस समय वह कोलकाता और दिल्ली में कई कल्याणकारी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। जिलियन का कहना है, ‘मै कहीं भी रहूं, पर मेरा दिल तो कोलकाता में ही रहता है। कोलकाता मेरी जन्मभूमि है। मैं उसे कभी नहीं भूल सकती।

(जिलियन की आत्मकथा से)

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

लोग क्या सोचेंगे-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 25, 2021

 लोग क्या सोचेंगे! बहुत समय पहले मैंने कहानी सुनी थी, जिसमें एक आदमी अपने गधे के साथ जाता है, जब

स्वयं को बेहतरीन बनाइए-डॉ. माध्वी बोरसे

November 24, 2021

 स्वयं को बेहतरीन बनाइए! एक जिंदगी है, दूसरे जन्म का हमें कोई पता नहीं! इतना तो पता है कि हमें

किसका कार्य?-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 22, 2021

 किसका कार्य? आज 21वीं सदी में, हम पूरी तरह से दकियानूसी सोच से आजाद हो चुके हैं, फिर भी बहुत

सर्दियां अदरक और हम -जयश्री बिरमी

November 22, 2021

सर्दियां अदरक और हम आयुर्वेद में अदरक के फायदों का वर्णन किया गया हैं ये तो अपने देश में ही

बेमौत मरती नदियां , त्रास सहेंगी सदियां ।-आशीष तिवारी निर्मल

November 22, 2021

बेमौत मरती नदियां , त्रास सहेंगी सदियां । छठ पर्व पर एक भयावह तस्वीर यमुना नदी दिल्ली की सामने आयी,

कोविड-19 से हुई क्षति की रिकवरी -किशन भावनानी गोंदिया

November 22, 2021

 कोविड-19 से हुई क्षति की रिकवरी व समाज की बेहतरी के लिए ज्ञान, धन और आर्थिक संपदा अर्जित करने हेतु

Leave a Comment