Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr. Alpa. H. Amin, poem

जिंदगी तो है बहता झरना/zindagi to hai bahta jharna

जिंदगी तो है बहता झरना कितनी सारी जिंदगियाँ मिलती है रोजानाहर जिंदगी जैसे है किताब का एक पन्नापर कहाँ मुनासिब …


जिंदगी तो है बहता झरना

जिंदगी तो है बहता झरना
कितनी सारी जिंदगियाँ मिलती है रोजाना
हर जिंदगी जैसे है किताब का एक पन्ना
पर कहाँ मुनासिब होता है पूरी किताब पढ़ना

कई आरजू, कई जरूरियात, कई आहटे,कई चींखे,
कहाँ कहाँ बिखरी संभव नहीं है खोजना
पढ़ने बैठे तो शायद कम पड़ जाये जीना

तरह तरह के माहौल तरह तरह के लोग
और इन सब में टकरा रहे है सब इंसान
जैसे आफ़तो का उठा हो बवंडर भरा तूफ़ान

कही पर ख़ुशी कही पर गम का सागर
उन सबमें झरने, नदियाँ जैसी छोटी छोटी कहानी
फैली है संसार में जीवन किताब के पन्नो की कई रचना

होता है ताज्जुब हमें, रचनाकार ने भी क्या पढ़ी है रचना ?
अगर पढ़ी होती तो करुणता भरा, भला क्यों किया आलेखन ?

जिंदगी तो है बहता झरना वो तो बहे है निरंतर
अच्छे बुरे अहसास से वो निखरे है निरंतर
शायद यही वजह से ये जिंदगियाँ चले है निरंतर

  Dr.Alpa H Amin
Ahmedabad


Related Posts

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों,

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

 सहनशीलता कैसा जमाना आ गया है ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा हैहम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,हमारी

देश का दुर्भाग्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

 देश का दुर्भाग्य कृषि के लिए नीतियां बनाने मेंकृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने मेंशिक्षक का प्रतिनिधित्व

क्या हमनें पा लिया है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

क्या हमनें पा लिया है? वक्त गुजरने के साथसरल शिक्षाओं कोरूढ़ करके सदियों के लिएजटिल हमनें बना लिया है, महापुरुषों

सच्चाई सामने जरूर आएगी-जितेन्द्र ‘कबीर’

November 30, 2021

सच्चाई सामने जरूर आएगी नुकसान होगा,सोचकर जो तुमनेकदम खींच लिए अपनेसच्चाई की राह सेतो आस्था तुम्हारी सच्चाई परकभी सच्ची न

संविधान दिवस विशेष- सुधीर श्रीवास्तव

November 30, 2021

 व्यंग्य संविधान दिवस आइए ! मौका भी है दस्तूर भी हैहमारे मन भरा फितूर जो है,आज भी हमसंविधान संविधान खेलते

Leave a Comment