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Dr_Madhvi_Borse, poem

जाने के बाद।

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना। …


जाने के बाद।

कुछ हो जाने के बाद,
उसके बारे में क्यों सोचना,
कुछ खो जाने के बाद,
उसे सोच कर क्यों रोना।

कुछ हो जाने के बाद,
उससे जरूरी है सीखना,
कुछ खो जाने के बाद,
अहमियत रखें, बाकी है हमारे पास जितना।

कुछ हो जाने के बाद,
क्यों उदासी में रहना,
कुछ खो जाने के बाद,
क्यों उसके बारे में बार-बार कहना।

कुछ हो जाने के बाद,
वर्तमान और भविष्य को
बेहतरीन बनाना,
कुछ खो जाने के बाद,
जो है उसे शिद्दत से बचाना और बढ़ाना ।।

About author

डॉ. माध्वी बोरसे!
डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)

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