Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

जाने के बाद।

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना। …


जाने के बाद।

कुछ हो जाने के बाद,
उसके बारे में क्यों सोचना,
कुछ खो जाने के बाद,
उसे सोच कर क्यों रोना।

कुछ हो जाने के बाद,
उससे जरूरी है सीखना,
कुछ खो जाने के बाद,
अहमियत रखें, बाकी है हमारे पास जितना।

कुछ हो जाने के बाद,
क्यों उदासी में रहना,
कुछ खो जाने के बाद,
क्यों उसके बारे में बार-बार कहना।

कुछ हो जाने के बाद,
वर्तमान और भविष्य को
बेहतरीन बनाना,
कुछ खो जाने के बाद,
जो है उसे शिद्दत से बचाना और बढ़ाना ।।

About author

डॉ. माध्वी बोरसे!
डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)

Related Posts

दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है सोशल  मीडिया के दुनिया में आगमन के बाद  आ गई है हम सबके हाथ एक

संत शिरोमणी नानक देव -डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 संत शिरोमणी नानक देव सिखों के प्रथम गुरु  संत शिरोमणी नानक देव बहाए प्रेम की  गंग सदैव प्रकाश पूंज फैलाने

प्यार की डोर-डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 प्यार की डोर हम सब जिनसे बँधे हुए  वो   है  प्यार   की  डोर वर्ना रिश्ते चटक  रहे है बिना   किये 

गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव

November 22, 2021

 गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन  तलवंडी,

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी

बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर  इतिहास के साथ छेड़खानी

Leave a Comment