बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और शांत गाँव था—देवगिरी इस गाँव के पास एक नीली-सी झील थी, जिसे सब “जादुई झील” कहते थे। लोग कहते थे कि रात को जब चाँदनी झील पर पड़ती है, तो परियाँ वहाँ नाचती हैं। लेकिन किसी ने उन्हें कभी देखा नहीं था।
गाँव में एक नन्ही लड़की रहती थी—मीरा। मीरा बहुत जिज्ञासु और साहसी थी। उसे परियों की कहानियाँ सुनना बहुत पसंद था। एक दिन उसने ठान लिया कि वो परियों को अपनी आँखों से देखेगी।
रात को सबके सो जाने के बाद मीरा चुपचाप झील की ओर निकल गई। चाँद आसमान में चमक रहा था, और झील का पानी चाँदी जैसा लग रहा था। मीरा झील के किनारे बैठ गई और इंतज़ार करने लगी।
अचानक, हवा में संगीत गूंजा। मीरा ने देखा कि झील के ऊपर चमकदार रौशनी उठने लगी। कुछ ही पलों में सात परियाँ झील से बाहर आईं। उनके पंख तितली जैसे थे और वे रंग-बिरंगे कपड़े पहने थीं।
मीरा को देखकर वे चौंक गईं, लेकिन फिर मुस्कुराईं। सबसे बड़ी परी ने कहा, “तुम बहादुर हो, मीरा। बहुत कम लोग हमारे पास तक पहुँच पाते हैं।”
मीरा बोली, “मैं सिर्फ आपको देखना चाहती थी। क्या मैं आपकी दोस्त बन सकती हूँ?”
परियाँ हँस पड़ीं और बोलीं, “ज़रूर! लेकिन यह हमारा रहस्य है। किसी को बताना मत।”
मीरा ने वादा किया और परियों के साथ खूब खेली। परियों ने उसे जादुई फूल, चमकता पत्थर और एक छोटी सी घंटी दी जो कभी भी बजाई जाए, तो परियाँ तुरंत आ जाएँगी।
सुबह होने से पहले परियाँ फिर झील में समा गईं। मीरा चुपचाप घर लौट आई। उसने किसी को नहीं बताया, लेकिन हर पूर्णिमा की रात वह झील के किनारे जाती और अपनी परियों से मिलती।
और इस तरह मीरा की जिंदगी जादू और दोस्ती से भर गई।
सीख: सच्चा दिल, बहादुरी और दोस्ती से बड़ी कोई जादूगरी नहीं।
– डॉ. मुल्ला आदम अली
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तिरुपति – आंध्र प्रदेश
