Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

जहां प्रयत्नों की ऊंचाई ज्यादा होती है,

जहां प्रयत्नों की ऊंचाई ज्यादा होती है, वहां किस्मत को भी झुकना पड़ता है हिम्मत और कोशिशों के बल पर …


जहां प्रयत्नों की ऊंचाई ज्यादा होती है, वहां किस्मत को भी झुकना पड़ता है

जहां प्रयत्नों की ऊंचाई ज्यादा होती है,

हिम्मत और कोशिशों के बल पर सफ़लता की मंजिल पर पहुंचने की प्रेरणा लेना समय की मांग

आओ अपनी हिम्मत और कौशल विशेषज्ञता के बल पर इतिहास रचें – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – सृष्टि रचनाकर्ता ने मानवीय जीव की रचना कर उसमें गुण दोषों की प्रकृति तो शामिल कर दी है, परंतु दोषों के पहचान व निदान के लिए उसमें चौरासी लाख जीवों से सबसे अधिक बौद्धिक क्षमता का संचार उसके मस्तिष्क में कर दिया है ताकि वह अपने दैनिक जीवन को व्यतीत करने के लिए गुण दोषों को पहचान कर गुणों का चयन करें और दोषों को सिरे से ख़ारिज कर दे तो जीवन सफ़ल हो जाता है परंतु यदि किस्मत में दोष आना लिखाहै तो हिम्मतकर दोषों से अपने बौद्धिक क्षमता के बल पर जांबाज़ी व ज़ज्बे से मुकाबला कर उन पर यादगार जीत हासिल करें जो सफ़लता का प्रतीक है। परंतु कई बार ऐसा होता है कि मानवीय जीव की करनी के नतीजे में असफलताएं भीआती है, उसी के आधार पर मानवीय जीव में दोषों की घेराबंदी हो जाती है और वह हिम्मत हार देता है, बस!! यहीं मानवीय जीव की चूक हो जाती है! हमें हिम्मत नहीं हारना है बल्कि प्रयत्नों कोशिशों रूपी टानिक से असफ़लताओं को मात देना है, गिरकर उठना है, क्योंकि जहां कोशिशों प्रयत्नों की ऊंचाई अधिक होती है वहां किस्मत को भी झुकना पड़ता है। हम तो फिर भी बुद्धिजीवी मानुषी जीव हैं परंतु हमारे प्रयत्नों कोशिशों को जारी रखने के लिए हिम्मत का बहुत बड़ा रोल है या यूं कहेंकि प्रयत्नों का आधार ही हिम्मत है जिसे कायम रखना अत्यंत आवश्यक है। अगर हमनें एक चींटी को जरूर देखें होंगे कि दीवार पर चढ़ते हुए बार-बार गिरती है परंतु हिम्मत नहीं हारती और हम देखते हैं कि आखिर वह अपनी मंजिल तक पहुंचती है, इसलिए आज हम कुछ मनीषियों के विचारों को आत्मसात करते हुए इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे कि आओ अपनी हिम्मत और कौशल विशेषज्ञता के बल पर इतिहास रचें।
साथियों बात अगर हम प्रयासों प्रयत्नों कोशिशों के बावजूद हिम्मत टूटने पर उपायों की करें तो, हिम्मत जब टूटने लगे, जब यह लगने लगे की सब कुछ खत्म हो चूका है। तब थोड़े समय के लिए सब छोड़ छाड़ कर बैठ कर चिंतन करना चाहिए। कि क्या जो मैं कर रहा हूँ वो जरुरी है? क्या कोई और मार्ग शेष नहीं? मैने क्या गलतियां की और किस तरह से उन्हें सुधारा जा सकता है? क्या कोई है जो मेरी सहायता कर सकता है? क्या बस इतनी ही हिम्मत है मुझमे?जब हम शांत चित्त से ये सोचेंगे तब कुछ न कुछ मार्ग अवश्य ही निकलेगा। और ये बिलकुल सत्य भी है कि जब एक मार्ग बंद हो जाता है तो दूसरा अपने आप खुल भी जाता है। हमको केवल धैर्य रखने की आवश्यकता है। यातो हमको अगर अपने काम में आगे भी स्कोप दिखता है तो डटे रहें अथवा उसको बदल लें। अपने आपको मजबूत बनाये रखें। ये जीवन संघर्षों से भरा हुआ है और ईश्वर अल्लाह ने हमें इन संघर्षो से लड़ने के लिए ही दुनिया में भेजा है व साथ ही साथ वो हमारा हाथ थामे खड़ा हुआ है। उसपर विश्वासकरें। वे कभी हमको झुकने नहीं देंगे।
साथियों बात अगर हम प्रयत्नों कोशिशों के लिए हिम्मत टूटने को समझने की करें तो, सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि हिम्मत टूटना क्या है?,क्यों टूटती है और कब टूटती हैं?जब हमारी ज्ञानेंद्रियां के द्वारा मन को,मन के द्वारा मस्तिष्क को सही आंकड़े नहीं मिलते है तब हमारी कर्मेंद्रियां कर्म करने में सक्षम नहीं हो पाती है और निराशा बढ़ती जाती है। इसी को हिम्मत का टूटना कहते हैं। जैसे हम किसी लछ्या को प्राप्त करने के लिए कोई काम करते है और एक समय ऐसा आता है कि हम अपने लक्ष्यों के करीब होते है परन्तु कोई ऐसी समस्या आ जाती है कि हम उस समस्या को हल नहीं कर पाते है और धीरे धीरे निराशा बढ़ती जाती है इसी को हिम्मत टूटना कहते है।
साथियों बात अगर हम हिम्मत टूटने के कारणों को समझने की करें तो, अब हम यह समझते है कि हिम्मत टूटने का कारण क्या है। पहला कारण जब हम किसी लक्ष को प्राप्त करने के लिए काम करते है, तब हम ना तो स्पस्ट रूप से अपने लक्ष्य को लिखते है और ना ही उसे प्राप्त करने की नीति ही लिखते है जिसके कारण कई छोटी छोटी गलतियां होती जाती है।जब हम लक्ष के करीब पहुंचे है,तोये गलतियां एक बड़ी गलती का रूप ले लेती है उस समय हमारा मन उत्साहित अवस्था में होता है और गलतियों को नहीं पकड़ पाता है और उत्साह धीरे धीरे निराशा में बदल जाता है। दूसरा सबसे मुख्य कारण है वह है दुनिया को चलाने वाले तत्व काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह ईर्ष्या, द्वेष,पाखंड आदि जैसे तत्वों में फंसा होना।कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति को ये पता होता है कि उसे लक्ष प्राप्ति में बाधा लालच के कारण या क्रोध के कारण आ रही होती है परन्तु फिरभी वह लक्ष को प्राप्त करने की कोशिश करता है और एक समय ऐसा आता है कि वह निराश होने लगता है, उसका मन मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है उसकी कर्मेंद्रियों के द्वारा सही काम नहीं होता है और उसकी हिम्मत टूट जाती है। जब हमारी हिम्मत टूट रही होती है उस समय हमे तनाव बहुत होता है। मस्तिष्क का सीधा संबंध हमारे पाचन तंत्र से होता है।हमारा पाचन तंत्र खराब ना हो इसके लिए हमे फल और हल्का आहार लेना चाहिए ताकि और तनाव ना बढ़े। दूसरी बात हमे योग भी करना चाहिए । तीसरी बात हमे किसी शांत जगह पर बैठकर उस लक्ष को लिखना चाहिए,जिसको प्राप्त करने में हमारी हिम्मत टूट रही है।उसके बाद उस लक्ष को प्राप्त करने की विधि लिखनी चाहिए जब हम ऐसा करते है तब हमें लक्ष्य को प्राप्त करने में जो भूल हो रही होती है उसका ज्ञान प्राप्त हो जाता है। एक बात का और ध्यान देना चाहिए कि कोई ऐसा व्यक्ति तो नहीं है जो काम,क्रोध,मदलोभ मोह,इर्ष्या आदि तत्वों में ज़रूरत से ज्यादा फंसा हो। जब हम ऐसा करते है तब हमे अपनी गलतियों का पता चल जाता है और मन उत्साह से भरना शुरू हो जाता है।
दूसरा जो मुख्य कारण है उसमे व्यक्ति को स्वयं पाता होता है कि हिम्मत टूटने का क्या कारण है जैसे लालच, काम भावना,क्रोध, इर्ष्या,मोह आदि। इन तत्वों का निराकरण करके हम हिम्मत टूटने से बच सकते है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि
जहां प्रयत्नों की ऊंचाई ज्यादा होती है, वहां किस्मत को भी झुकना पड़ता है।आओ अपनी हिम्मत और कौशल विशेषज्ञता के बल पर इतिहास रचें।हिम्मत और कोशिशों के बल पर सफ़लता की मंजिल पर पहुंचने की प्रेरणा लेना समय की मांग है।

About author

kishan bhavnani

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 

Related Posts

14 नवम्बर बाल दिवस विशेष| children day special

November 13, 2022

बच्चों को सिखाया जाना चाहिए कि कैसे सोचना है, न कि क्या सोचना है? आज के भारतीय परिपेक्ष्य में जब

टेलीविजन और सिनेमा के साथ जुड़े राष्ट्रीय हित|National interest associated with television and cinema

November 13, 2022

टेलीविजन और सिनेमा के साथ जुड़े राष्ट्रीय हित|National interest associated with television and cinema  टेलीविजन और सिनेमा में कुछ विषय

विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं।|Adversity often pushes us in a new direction.

November 13, 2022

विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं। अगर हमें कठिन परिस्थितियों से गुजरनी पड़ती है तो सबसे

आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे|koi bhi matdata na chhute

November 13, 2022

मतदाता आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे मतपत्र के जबरदस्त बल के माध्यम से ताकत निर्बाध रूप से

नो मनी फॉर टेरर| No money for terror

November 13, 2022

नो मनी फॉर टेरर| No money for terror  आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने वैश्विक सम्मेलन 18 -19 नवंबर 2022 आतंकवाद

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं

November 13, 2022

किसी ने रोज़ा रखा किसी ने उपवास- कबूल उसका हुआ जिसने मां-बाप को रखा अपने पास माता-पिता और बुजुर्गों की

Leave a Comment