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जलवायु परिवर्तन का तांडव! /jalwayu parivartan ka tandav

जलवायु परिवर्तन का तांडव!  दुनियां में आग उगती गर्मी, भूस्खलन – नासा ने आग उगलती धरती की सेटेलाइट इमेज जारी …


जलवायु परिवर्तन का तांडव! 

दुनियां में आग उगती गर्मी, भूस्खलन – नासा ने आग उगलती धरती की सेटेलाइट इमेज जारी की! 

प्रकृति के साथ तात्कालिक सामंजस्य बैठाना मानवीय जीवन की अति प्राथमिकता को रेखांकित करना ज़रूरी है – एड किशन भावनानी 

 सृष्टि के रचनाकर्ता ने मानवीय जीव की रचना करते समय ऐसा अनुमान भी नहीं लगाया होगा कि जिसकी रचना कर, बुद्धि की अपार क्षमताओं का ख़जाना जिस मानवीय ज़ीव में डालने जा रहे हैं, वही कुदरत द्वारा रचित प्रकृति के विनाश की ओर बढ़ने का मुख्य कारण बनेगा!! 

साथियों आज वैश्विक स्तरपर मानव जीव द्वारा बढ़ते हुए प्राकृतिक प्रकृति का दोहन आज भी विशाल स्तरपर कर संपूर्ण मानव जाति को खतरे में डालने के पीछे नहीं हट रहे हैं, जिसके कारण सर्दी में भी गर्मी, गर्मी में बरसात, बरसात में भयंकर आग उगलती गर्मी के परिणाम मानव जाति भुगत रही है! आज कई यूरोपियन देशों,मध्य अमेरिकी देशों में आग उगलती गर्मी का प्रकोप, भूस्खलन का दौरलगातार शुरू है और 2 दिन पूर्व ही नासा ने आग उगलती धरती की सेटेलाइट इमेज जारी की है जिससे दुनिया डरी हुई है? इसलिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आर्टिकल के माध्यम से हम पेरिस समझौते और जलवायु परिवर्तन के बारे में चर्चा करेंगे। 

साथयों बात अगर हम पिछले कुछ दिनों से सबसे ठंडे रहने वाले यूरोप में भयंकर गर्मी के तांडव की करें तो, ब्रिटेन, फ्रांस समेत यूरोप के कई देशों में इन दिनों हीट वेव का कहर जारी है, आलम यह है कि यूरोप के कई देशों में प्रचंड गर्मी का माहौल बना हुआ है. जिसे देखते हुए नासा ने धरती की सेटेलाइट तस्वीर जारी की है, जिसमें दुनिया लाल दिखी है, जिससे देखने के बाद दुनिया के देशों में हडकंप मच गया है। वहीं इस बीच फ्रांस ने गर्मी का 100 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है, इस वजह से जंगलों में आग लग गई है। भयंकर गर्मी की चपेट में आने से यूरोप और उत्तरीअफ्रीका के कई देशों में तापमान इतना बढ़ गया है कि पुर्तगाल के जंगलों में भीषण आग लग गई। जिससे पुर्तगाल, स्पेन,फ्रांस और मोरक्को में हजारों लोगों को उनके घरों से निकालना पड़ा। फायर ब्रीगेड की टीम आग से निपटने में लगी हुई हैं। मीडिया के अनुसार पिछले हफ्ते पुर्तगाल के एक जंगल में आग लगने के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कम से कम 135 लोग घायल हुए थे। 

देश के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण के अनुसार,रविवार सेआकस्मिक स्थिति लागू हो गई है और लगभग 800 लोगों को उनके घरों से निकाल लिया गया है। दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में शुक्रवार को जंगल की आग के बेकाबू होने के कारण सैकड़ों लोगों को उनके घरों से निकाला गया। पिछले मंगलवार से हवाई जहाज से पानी डालकर जंगल की आग बुझाई जा रही है। 1,000 से अधिक फायर फाइटर्स चिलचिलाती गर्मी, टिंडर-बॉक्स की स्थिति और तेज हवाओं के कारण दो धमाकों से जूझ रहे हैं। यहां पर कई दिनों से आग लगी हुई है। जिससे 4200 हेकटेयर जंगल जलकर राख हो गए। लगभग एक हज़ार रहवासियों को वहां से निकाला गया। स्पेन के कई हिस्सों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, गुरुवार को पहली बार उत्तर-पश्चिमी शहर ओरेन्से में पारा 44.1 डिग्री पहुंचा। एक्स्ट्रीमादुरा के कुछ हिस्सों में तापमान 45 डिग्री पहुंच चुका है। यहां फायरफाइटर्स जंगल की आग से अभी भी जूझ रहे हैं। यहां लगी आग की वजह से जंगल के 4 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र जल कर राख हो चुके हैं। चीन भी भीषण गर्मी की चपेट में

भीषण गर्मी ने चीन के अधिकांश हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे 900 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों को ऐसी स्थितियों के खतरे के बारे में चेतावनी दी है। देश के सबसे अधिक आबादी वाले शहर शंघाई ने इस गर्मी में तीसरी बार अपना हाई अलर्ट जारी किया है। इस बार गर्मी के उच्च तापमान ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिया। गुरुवार दोपहर को तापमान 40.6 डिग्री तक बढ़ गया। हालांकि, शुक्रवार को हुई बारिश ने शंघाई के निवासियों के लिए राहत की सांस ली। 

साथियों बात अगर हम जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते की करें तो यह जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी मुद्दों पर, देशों के लिये, क़ानूनी रूप से बाध्यकारी एक अन्तरराष्ट्रीय सन्धि है। ये समझौता वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप-21) के दौरान, 196 पक्षों की ओर 12 दिसम्बर को पारित किया गया था। 4 नवम्बर 2016 को यह समझौता लागू हो गया था। पेरिस समझौते का लक्ष्य औद्योगिक काल के पूर्व के स्तरकी तुलना में वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखना है, और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये विशेष प्रयास किये जाने हैं। तापमान सम्बन्धी इस दीर्घकालीन लक्ष्य को पाने के लिये देशों का लक्ष्य, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के उच्चतम स्तर पर जल्द से जल्द पहुँचना है ताकि उसके बाद, वैश्विक स्तर उसमें कमी लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके.इसके ज़रिये 21वीं सदी के मध्य तक कार्बन तटस्थता (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. जलवायु कार्रवाई के लिये बहुपक्षीय प्रक्रिया में पेरिस समझौता एक अहम पड़ाव है,पहली बार क़ानूनी रूप से बाध्यकारी एक समझौते के तहत सभी देशों को, साझा उद्देश्य की पूर्ति हेतु साथ लाया गया है ताकि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटा जा सके और अनुकूलन के प्रयास सुनिश्चित किये जा सकें, वैसे बता दें कि, अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जोसेफ़ बाइडेन ने पेरिस जलवायु समझौते में, फिर से शामिल होने की घोषणा की है. पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने, वर्ष 2020 में, अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से हटा लिया था. इस सन्दर्भ में, पेरिस जलवायु समझौता एक बार फिर से ज़ोरदार चर्चा में आ गया है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि जलवायु परिवर्तन का तांडव मचा हैं!!दुनिया में आग उगलती गर्मी, भूस्खलन, नासा ने आग उगलती धरती की सेटेलाइट इमेज जारी की हैं प्रकृति के साथ तात्कालिक सामंजस्य बैठाना मानवीय जीव की अति प्राथमिकता कोरेखांकित करना ज़रूरी है। 

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एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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