Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’

जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों, …


जरूरत है जागरूक बनने की

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र 'कबीर'
देखकर उन्हें आनी चाहिए
आम जनता में सुरक्षित होने की भावना,
निकल जाना चाहिए डर मन से
गुण्डों, चोरों, झपटमारों एवं कातिलों का,

लेकिन बजाय इसके अगर आज
अधिकांश जनता के मन में
पुलिस को देखकर होता है
अपनी सलामती को लेकर डर का प्रादुर्भाव,
उठती हैं आशंकाएं उनकी लूट अथवा
अभद्र व्यवहार का शिकार बन जाने से संबंधित,

तो समझ जाना चाहिए सरकारों को
कि इस देश में जरूरत कितनी है
प्रभावी पुलिस सुधारों की,
और अगर दिखती नहीं यह कमियां किसी सरकार को
तो जिम्मेदारी जनता की है
जागरुक बनकर सरकार को आईना दिखाने की।

देखकर उन्हें आनी चाहिए
आम जनता में इंसाफ मिल जाने की भावना,
अपने ऊपर हुई बेइंसाफी के
न्यायोचित निपटारे की जगनी चाहिए
उनके मन में उम्मीद,

लेकिन बजाय इसके अगर आज
हमारी न्यायपालिका के घटकों को
देखकर होता है जनता के मन में
बुरे पचड़े में पड़ जाने की भावना का प्रादुर्भाव,

उठती हैं आशंकाएं चालबाजों और
पैसे वालों के हर हाल में
मुकदमें जीत जाने से संबंधित,
तो समझ जाना चाहिए सरकारों को
कि इस देश में जरूरत कितनी है
प्रभावी न्यायिक सुधारों की,
और अगर दिखती नहीं यह कमियां किसी सरकार को
तो जिम्मेदारी जनता की है
जागरुक बनकर सरकार को आईना दिखाने की।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों,

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

 सहनशीलता कैसा जमाना आ गया है ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा हैहम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,हमारी

देश का दुर्भाग्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

 देश का दुर्भाग्य कृषि के लिए नीतियां बनाने मेंकृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने मेंशिक्षक का प्रतिनिधित्व

क्या हमनें पा लिया है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

क्या हमनें पा लिया है? वक्त गुजरने के साथसरल शिक्षाओं कोरूढ़ करके सदियों के लिएजटिल हमनें बना लिया है, महापुरुषों

सच्चाई सामने जरूर आएगी-जितेन्द्र ‘कबीर’

November 30, 2021

सच्चाई सामने जरूर आएगी नुकसान होगा,सोचकर जो तुमनेकदम खींच लिए अपनेसच्चाई की राह सेतो आस्था तुम्हारी सच्चाई परकभी सच्ची न

संविधान दिवस विशेष- सुधीर श्रीवास्तव

November 30, 2021

 व्यंग्य संविधान दिवस आइए ! मौका भी है दस्तूर भी हैहमारे मन भरा फितूर जो है,आज भी हमसंविधान संविधान खेलते

Leave a Comment