Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी

जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से …


जब वक्त थम सा गया

जब वक्त थम सा गया

एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गया
मिलने के लिए उसी से दिल बेताब होने लगा
ख्वाबों में भी वही खयालों में भी वही
लेकिन अब ढूंढना उसे मेरा एक ही काम ही रह गया
वही आंखे,वही अदाएं ,सरका दुपट्टा संभालने की
दिखती थी वहीं हर शहर,हर गली
हर पल हर घड़ी ही
छाई रहती थी मेरे ही खयालों में
दिखती नहीं थी कहीं
क्या करूं कहां ढूंढू उसे मेरे खयालों की रानी को
अब तो सहना ही मुश्किल था इस जुदाई को
और वह मंजर आ ही गया जब देखा उसे नहाते हुए झरने पर
आंखें जम गई वहीं और दिल थम गया कहीं
लगा था अब तो वक्त ही थम सा गया था
और अरमानों में हालचल सी आ गई थी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

हार क्यों मान ली जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

हार क्यों मान ली जाए? बुरे से बुरा क्या हो सकता हैहमारे साथ?यही कि हमारी धन – संपत्तिहमारे हाथ से

सफेद आसमां- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सफेद आसमां कड़ाके की सर्दी मेंरजाई का मोह छोड़ पाओ अगरतो निकलो बाहर जराआंगन चौबारे तक, देखो ऊपर!आसमान बरसा रहा

खट्टी मीठी यादें – डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

खट्टी मीठी यादें आती है मानस पटल परउभरकर वो सुनहरी यादें प्रेम रस में भीगा -भींगामधुरमय स्नेहिल सौगातें जिनकी यादें

Leave a Comment