Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Sonal Manju

जब महिला होगी सशक्त, तब देश उन्नति में न लगेगा वक्त

जब महिला होगी सशक्त, तब देश उन्नति में न लगेगा वक्त आज के आधुनिक समय में महिला उत्थान एक विशेष …


जब महिला होगी सशक्त, तब देश उन्नति में न लगेगा वक्त

जब महिला होगी सशक्त, तब देश उन्नति में न लगेगा वक्त

आज के आधुनिक समय में महिला उत्थान एक विशेष विचारणीय विषय है। हमारे आदि – ग्रंथों में नारी के महत्व को मानते हुए यहाँ तक बताया गया है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते है।

लेकिन विडम्बना तो देखिए नारी में इतनी शक्ति होने के बावजूद भी उसके उत्थान की अत्यंत आवश्यकता महसूस हो रही है। यह आवश्यकता इसलिये पड़ी क्योंकि प्राचीन समय से भारत में लैंगिक असमानता, सती प्रथा, नगर वधु व्यवस्था, दहेज प्रथा, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, गर्भ में बच्चियों की हत्या, पर्दा प्रथा, कार्यस्थल पर यौन शोषण, बाल मजदूरी, बाल विवाह तथा देवदासी प्रथा आदि परंपरा रही। इस तरह की कुप्रथा का कारण पितृसत्तामक समाज और पुरुष श्रेष्ठता मनोग्रन्थि रही। महिलाओं को उनके अपने परिवार और समाज द्वारा कई कारणों से दबाया गया तथा उनके साथ कई प्रकार की हिंसा हुई और परिवार और समाज में भेदभाव भी किया गया। ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी दिखाई पड़ता है।

भारतीय समाज में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं कि केवल महिलाओं को पूजने भर से देश के विकास की जरूरत पूरी हो जायेगी। आज जरूरत है कि देश की आधी आबादी यानि महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाए जो देश के विकास का आधार बनेंगी। इसीलिए महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत होती है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन रहता है। 2018 में यूनिसेफ के एक रिपोर्ट द्वारा पता चलता है, कि भारत में अब भी हर वर्ष लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले ही कर दी जाती है, जल्द शादी हो जाने के कारण महिलाओं का विकास रुक जाता है। साथ ही साथ कन्या भ्रूण हत्या जैसी शोषण भी घटित होते है। जहाँ गर्भ में ही लिंग की जांच करा कर बच्चियों का गर्भपात करा दिया जाता है। हालांकि सरकार ने गर्भ में लिंग जाँच पर प्रतिबंध लगाया हुआ है फिर भी कई जगहों पर ये घटनाएं देखने को मिलती है। कन्या भ्रूण हत्या के कारण ही हरियाणा और जम्मू कश्मीर जैसे प्रदेशों में स्त्री और पुरुष लिंगानुपात में काफी ज्यादे अंतर आ गया है। लैंगिक असमानता भारत में मुख्य सामाजिक मुद्दा है जिसमें महिलाएँ पुरुषवादी प्रभुत्व देश में पिछड़ती जा रही है। इसके लिए महिलाओं को समझना होगा कि यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार है कि उन्हें समाज में पुरुषों के बराबर महत्व मिले।

महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने की जरूरत है। आज भी कई पुरानी और रूढ़िवादी विचारधाराओं के कारण भारत के कई सारे क्षेत्रों में महिलाओं के घर छोड़ने पर पाबंदी होती है। इस तरह के क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा का हक नही होता(भारत में महिला शिक्षा दर 64.6 प्रतिशत है जबकि पुरुषों की शिक्षा दर 80.9 प्रतिशत है) या फिर रोजगार के लिए घर से बाहर जाने के लिए आजादी नही होती है। इसके साथ ही उन्हें आजादीपूर्वक कार्य करने या परिवार से जुड़े फैलसे लेने की भी आजादी नही होती है और उन्हें सदैव हर कार्य में पुरुषों के अपेक्षा कमतर ही माना जाता है। समान कार्य को समान समय तक करने के बावजूद भी महिलाओं को पुरुषों के अपेक्षा काफी कम भुगतान किया जाता है, यह भी लैंगिक असमानता का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसके अतिरिक्त महिलाओं की असुरक्षा भी महिला उत्थान में एक बड़ी बाधा है।

महिला उत्थान के लिए समय-समय पर अनेकों लोगों राजा राम मोहन रॉय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, आचार्य विनोभा भावे, स्वामी विवेकानंद ने अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया। आज भी अनेको एन. जी.ओ. और सरकार भी महिला उत्थान के लिए कार्यरत है। जैसे – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, महिला हेल्पलाइन योजना, उज्ज्वला योजना, सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम फ़ॉर वीमेन, महिला शक्ति केंद्र, पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण आदि। कानूनी अधिकार के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये संसद द्वारा पास किये गये कुछ अधिनियम है – एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976, दहेज रोक अधिनियम 1961, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, मेडिकल टर्म्नेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987, बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006, लिंग परीक्षण तकनीक (नियंत्रक और गलत इस्तेमाल के रोकथाम) एक्ट 1994, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013।

ऐसा नही है कि इतनी सब योजनाओं, प्रयासों और कानून के बाद भी बदलाव नहीं हुआ या हो रहा है। परिवर्तन तो आया है, पिछले कुछ वर्षों में हमें महिला सशक्तिकरण का फायदा मिल रहा है। महिलाएँ अपने स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी, तथा परिवार, देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी को लेकर ज्यादा सचेत रहती है। वो हर क्षेत्र में प्रमुखता से भाग लेती है और अपनी रुचि प्रदर्शित करती है। अंतत: कई वर्षों के संघर्ष के बाद सही राह पर चलने के लिये उन्हें उनका अधिकार मिल रहा है। लेकिन यह बदलाव बहुत निम्न स्तर पर हो रहा है। इसके लिये महिला उत्थान में तेजी लाने की जरूरत है। क्योंकि विज्ञान भी यह बात मानता है कि महिलाएं जब एक बार अपना कदम उठा लेती है तब परिवार आगे बढ़ता है, गाँव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। इसीलिए…
“होगी जब महिला सशक्त। देश उन्नति में न लगेगा वक्त।।”

–सोनल मंजू श्री ओमर
राजकोट, गुजरात – 360007
8780039826


Related Posts

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

March 28, 2023

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूलदेवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील

कोविड कंट्रोल – तैयारियों का जायजा लेने राष्ट्रव्यापी मॉकड्रिल 10-11 अप्रैल 2023

March 28, 2023

फिर कोविड का कहर?  कोविड कंट्रोल – तैयारियों का जायजा लेने राष्ट्रव्यापी मॉकड्रिल 10-11 अप्रैल 2023  युद्ध स्तरपर तैयारियों और

भूकंप की तैयारी सिर्फ इमारतों के बारे में नहीं है।

March 28, 2023

भूकंप की तैयारी सिर्फ इमारतों के बारे में नहीं है। सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और अखबारों के जरिए आम लोगों

आम बज़ट 2023 संसद में पारित, प्रक्रिया पूरी हुई

March 28, 2023

आम बज़ट 2023 संसद में पारित, प्रक्रिया पूरी हुई सभापति ने वित्त विधेयक पर सदन में चर्चा के लिए निर्धारित

लड़किया लीडर बनेगी तभी उनकी दुनिया बदलेगी |

March 25, 2023

लड़किया लीडर बनेगी तभी उनकी दुनिया बदलेगी लड़कियों में नेतृत्व के गुणों का निर्माण करने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में

विश्व टीबी पूर्ण उन्मूलन लक्ष्य 2030 बनाम भारत 2025

March 25, 2023

विश्व टीबी पूर्ण उन्मूलन लक्ष्य 2030 बनाम भारत 2025 वन वर्ल्ड टीबी शिखर सम्मेलन का आगाज़ टीबी उन्मूलन अभियान से

PreviousNext

Leave a Comment