Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023

आओ जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 कानून के बारे में जानें जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 …


आओ जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 कानून के बारे में जानें

जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023

जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 कानून से कारोबार के कई प्रावधान अपराध मुक्त होंगे

कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देने 42 कानूनों के 183 धाराओं में संशोधन कर उन्हें अपराध मुक्त करना मील का पत्थर साबित होगा – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया -संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 3 बिल ध्वनिमत से पारित हुए हैं,इनमें से एक 27 जुलाई 2023 को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2023 को ध्वनि मत से पारित किया गया, फिर राज्यसभा में पारित किया और उसपर माननीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो गए जो आप कानून बन गया है,जिसमें कारोबार को बढ़ावा देने 42 कानूनों की 183 धाराओं को संशोधित कर उन्हें अपराध मुक्त बनाकर इज ऑफ डूइंग बिजनेस और एज आफ लिविंग को साकार करने की कोशिश की गई है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मतलब होता है किसी भी देश में कारोबार कितनी सरलता से शुरू किया जा सकता है। विश्व बैंक हर साल डूइंग बिजनेस रिपोर्ट जारी करता है जिसमें वह 10 पैमानों पर 190 देशों की रैकिंग करता है जिसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग कहते हैं। इसलिए आज हम पीआईबी और मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, कारोबार को सुगम बनाकर तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने की ओर दौड़ पड़ा है भारत!
साथियों बात अगर हम इस कानून की करें तो 76 पुराने और अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने के लिए निरसन एवं संशोधन विधेयक 2023 कानून बन गया हैउल्लेखनीय है कि जन विश्वास विधेयक पारित होने से कई प्रविधानों में अब जेल की सजा नहीं होगी और कारोबारी जुर्माना देकर बचसकेंगे। कई मामलों में जुर्माना लगाने के लिए अदालती कार्यवाही की जरूरत नहीं होगी। कई बार छोटी-मोटी गलती केकारण कारोबारियों को अदालतों का चक्कर लगाना पड़ता था। बड़ी संख्या में छोटी-मोटी गड़बडि़यों को अपराध के दायरे से बाहर करने से व्यापार करना आसान होगा।कई प्रविधानों को अपराधमुक्त करने से कारोबार में आसानी होगी।सरकार ने कहा कि यह कदम जीवन और व्यापार करने में आसानी के लिए उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।जन विश्वास विधेयक पेश करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि कई प्रविधानों को अपराधमुक्त करने से कारोबार में आसानी होगी, उन्होंने कहा कि सरकार अब तक 1,486 कानूनों को निरस्त कर चुकी है और इस विधेयक को उप्री संसद की मंजूरी मिलने के बाद निरस्त कानूनों की संख्या 1,562 हो जाएगी।जन विश्वास बिल को सरकार ने पिछले साल यानी 2022 में लोकसभा में पेश किया था। बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था, इस बिल को लेकर कई मंत्रालयों और कानूनी मामलों के विभागों से चर्चा हुई थी.। समिति ने सरकार से कहा था कि इसमें संशोधन करने चाहिए और कई चीजों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहिए। जिससे कोर्ट में लंबित पड़े लाखों मामलों में कमी आए,जेल की जगह वसूला जाएगा जुर्माना, संसदीय समिति ने इस बिल के जरिए 19 मंत्रालयों से जुड़े करीब 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था, जिनमें वित्त मंत्रालय से लेकर सड़क परिवहन, कृषि, सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अन्य कई मंत्रालय शामिल हैं।इन मंत्रालयों के तहत आने वाले कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर जुर्माने तक सीमित कर दिया जाएगा. इससे कोर्ट-कचहरी की झंझट से मुक्ति मिलेगी, वहीं बिजनेस करना भी आसान हो जाएगा दिलचस्प है कि एक सुधार पीएमएलए में भी है, जिसका ईडी विरोध कर रहा है. पीएमएलए के प्रावधानों को डिक्रिमिनेलाइज करने का प्रस्ताव है जिसका ईडी ने यह कह कर विरोध किया कि इससे जांच एजेंसी की ताकत कम होगी। जनविश्वास बिल में कई अपराधों में सजा के बजाए जुर्माने का प्रावधान है।कोर्ट का बोझ होगा कम, जेलों में भीड़ भी ना होगी।डिक्रिमिनेलाइज करने से अदालतों का बोझ भी कम होगा और जेलों में भीड़ कम करने में भी मदद मिलेगी, जिन कानूनों में प्रावधानों को डिक्रिमिनेलाइज किया जा रहा है, उनमें पर्यावरण संरक्षण कानून, आईटी ऐक्ट, मोटर व्हीकल ऐक्ट, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट शामिल है। इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि इस बिल में कारोबार की सुगमता के लिए छोटे अपराधों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन की व्यवस्था है।
साथियों बात अगर हम इस कानून को विस्तृत रूप से जानने की करें तो, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) कानून, 2023 के माध्यम से, निम्नलिखित तरीके से गैर अपराधीकरण हासिल करने का प्रस्ताव है: -(i) कुछ प्रावधानों में कारावास और/या जुर्माना दोनों को हटाने का प्रस्ताव है।(ii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बरकरार रखने का प्रस्ताव है।(iii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है।(iv) कुछ प्रावधानों में कारावास और जुर्माने को दंड में बदलने का प्रस्ताव है।(v) अपराधों के शमन को कुछ प्रावधानों में शामिल करने का प्रस्ताव है।उपरोक्त के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, विधेयक ऐसे उपायों का प्रस्ताव करता है जैसे (ए) किए गए अपराध के अनुरूप जुर्माने और जुर्माने का व्यावहारिक संशोधन; (बी) निर्णायक अधिकारियों की स्थापना; (सी) अपीलीय प्राधिकारियों की स्थापना; और (डी) जुर्माने और दंड की मात्रा में आवधिक वृद्धियह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सजा की डिग्री और प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो।
साथियों बात अगर हम इस संशोधित विधेयक के लाभों की करें तो, संशोधन विधेयक के लाभ इस प्रकार बताए गए हैं:(1) संशोधन विधेयक आपराधिक प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने और यह सुनिश्चित करने में योगदान देगा कि नागरिक, व्यवसाय और सरकारी विभाग मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमी के लिए कारावास के डर के बिना काम करें।(2)किसी अपराध के दंडात्मक परिणाम की प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए। यह विधेयक किये गये अपराध/उल्लंघन की गंभीरता और निर्धारित सजा की गंभीरता के बीच संतुलन स्थापित करता है। कानून की कठोरता को खोए बिना, प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों और नागरिकों द्वारा कानून का पालन सुनिश्चित करते हैं।(3)तकनीकी/प्रक्रियात्मक गलती और गौण दोष के लिए निर्धारित आपराधिक परिणाम, न्याय वितरण प्रणाली को अवरुद्ध करते हैं और गंभीर अपराधों पर निर्णय को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। विधेयक में प्रस्तावित कुछ संशोधन, जहां भी लागू और व्यवहार्य हो, उपयुक्त प्रशासनिक न्यायनिर्णयन प्रणाली प्रस्तुत करने के लिए हैं। इससे न्याय प्रणाली पर भारी दबाव को कम करने, लंबित मामलों को कम करने और अधिक कुशल और प्रभावी न्याय वितरण में मदद मिलेगी।(4)नागरिकों और कुछ श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को अपराधमुक्त करने से उन्हें मामूली उल्लंघनों के लिए कारावास से डरे बिना जीवन जीने में मदद मिलेगी।(5) इस कानून का अधिनियमन कानूनों को तर्कसंगत बनाने, बाधाओं को दूर करने और व्यवसायों के विकास को बढ़ावा देने की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कानून विभिन्न कानूनों में भविष्य के संशोधनों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में काम करेगा। एक समान उद्देश्य के साथ विभिन्न कानूनों में समेकित संशोधन से सरकार और व्यवसायों दोनों के लिए समय और लागत की बचत होगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, आओ जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 कानून के बारे में जानें। जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 कारोबार के कई प्रावधान अपराध मुक्त होंगे।कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देने 42 कानूनों के 183 धाराओं में संशोधन कर उन्हें अपराध मुक्त करना मील का पत्थर साबित होगा।

About author

kishan bhavnani

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 

Related Posts

कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी | housewife is not an iota less than a working woman.

December 11, 2022

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब

शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं | shaskeeye thappe wali vastuon ki heraferi karta hun

December 11, 2022

यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

December 10, 2022

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है? हमारे

भ्रष्टाचार की पोल खोलते रहेंगे| bhrastachar ki pol kholte rahenge

December 10, 2022

 यह  व्यंग्यात्मक कविता वर्तमान में असफ़ल हुए उम्मीदवारों और पार्टी के भाव कविता के माध्यम से प्रस्तुत है। व्यंग्य कविता–भ्रष्टाचार

वाइब्रेंट बॉर्डर – विलेज़ टूरिज्म – टूरिज्म डेस्टिनेशन | vibrant border-Village tourism- tourism destination

December 10, 2022

 यह आर्टिकल वाइब्रेट बॉर्डर विलेज टूरिज्म-टूरिज्म डेस्टिनेशन। भारत की जी-20 अध्यक्षता देश के प्रत्येक हिस्से की विशिष्टताओं को दुनिया के

नानक दुखिया सब संसार | nanak dukhiya sab sansar

December 10, 2022

यह आर्टिकल,आओ जीवन में अच्छे बुरे दोनों दिनों का शुक्राना अदा करें।जीवन के हर बीते हुए दिन का शुक्राना अदा

Leave a Comment